बागपत |
सड़क हादसों की खबरें अक्सर विचलित करती हैं, लेकिन बागपत में हुआ ताजा हादसा तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता और निर्माणाधीन हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। दिल्ली से देहरादून के लिए निकले दो दोस्तों की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब उनकी कार निर्माणाधीन दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे पर एक अस्थाई बैरियर से जा टकराई। इस भीषण टक्कर में एक नव-शिक्षित इंजीनियर और उसके साथी की जान चली गई।
गूगल मैप ने दिखाया ‘मौत का रास्ता’
मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली के नांगलोई निवासी कपिल ने हाल ही में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। वह अपने करियर की नई शुरुआत करने से पहले अपनी डिग्री लेकर कॉलेज से लौटा था। खुशी के इन पलों को मनाने के लिए कपिल मंगलवार रात अपनी कॉलोनी के ही दोस्त
प्रयागराज कौशिक के साथ कार से देहरादून घूमने के लिए निकला था।
युवकों ने सफर को आसान बनाने के लिए गूगल मैप (Google Maps) का सहारा लिया। मैप ने उन्हें दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे का रास्ता दिखाया, जो अभी पूरी तरह से जनता के लिए खुला नहीं है। तकनीक के भरोसे वे इस हाईवे पर चढ़ गए, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि आगे मौत उनका इंतजार कर रही है।
मवीकलां के पास हुआ भीषण हादसा
जैसे ही कार बागपत के मवीकलां क्षेत्र के पास पहुंची, वहां निर्माणाधीन हाईवे पर लगे एक अस्थाई लोहे के बैरियर से तेज रफ्तार कार की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। अंधेरे और तेज रफ्तार के कारण चालक बैरियर को समय रहते देख नहीं सका।
स्थानीय पुलिस को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को लहूलुहान हालत में जिला अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, चोटें इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। कोतवाली प्रभारी बृजेश कुमार ने पुष्टि की है कि युवक गूगल मैप का अनुसरण कर रहे थे, जिसके कारण वे प्रतिबंधित मार्ग पर प्रवेश कर गए।
हाईवे पर मौत का जाल: उद्घाटन से पहले ही दौड़ रहे वाहन
इस दुर्घटना ने हाईवे अथॉरिटी और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि:
- उद्घाटन लंबित: इस ग्रीनफील्ड हाईवे का आधिकारिक उद्घाटन 14 अप्रैल को प्रस्तावित है।
- प्रतिबंधित आवाजाही: फिलहाल दिल्ली के अक्षरधाम से मवीकलां तक केवल एलिवेटेड भाग पर ट्रायल चल रहा है। इसके आगे वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- ट्रैफिक नियमों की अनदेखी:प्रतिबंध के बावजूद इस हाईवे पर अवैध रूप से वाहनों का आवागमन जारी है, जिसे रोकने के लिए लगाए गए अस्थाई बैरियर अब जानलेवा साबित हो रहे हैं।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, झूठ बोलकर निकले थे घर से
मृतक कपिल के परिजनों ने बताया कि वह अपनी डिग्री मिलने से बहुत खुश था और भविष्य के सपने बुन रहा था। विडंबना यह है कि दोनों युवकों ने घर पर देहरादून जाने की बात नहीं बताई थी। उन्होंने परिजनों से कहा था कि वे मथुरा जा रहे हैं। जब सुबह पुलिस के माध्यम से मौत की खबर उनके घर पहुंची, तो कोहराम मच गया। परिजनों का कहना है कि अगर उन्हें पता होता कि वे देहरादून जा रहे हैं, तो शायद वे उन्हें रोक लेते।
तकनीक का अंधा अनुसरण कितना सही?
यह कोई पहला मामला नहीं है जब गूगल मैप की वजह से कोई वाहन निर्माणाधीन सड़क या नदी-नालों में गिरा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माणाधीन हाईवे अक्सर डेटाबेस में ‘सक्रिय’ दिखाई देते हैं, जबकि जमीनी हकीकत में वे सफर के लिए सुरक्षित नहीं होते।
विशेषज्ञ सलाह:
रात के समय अपरिचित रास्तों पर केवल नेविगेशन के भरोसे न चलें।
सड़क पर लगे चेतावनी बोर्ड (Caution Boards) और बैरिकेड्स को नजरअंदाज न करें।
यदि रास्ता वीरान या निर्माणाधीन दिखे, तो स्थानीय लोगों से पुष्टि जरूर करें।
जांच के घेरे में हाईवे सुरक्षा
पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि जब हाईवे पर आवागमन प्रतिबंधित था, तो कार वहां तक कैसे पहुंची। क्या प्रवेश द्वार पर कोई गार्ड या पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं थी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाईवे पर जगह-जगह आधे-अधूरे बैरियर लगे हैं, जो रात के अंधेरे में दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
निष्कर्ष:
दो होनहार युवाओं की असामयिक मृत्यु ने उनके परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। यह हादसा एक चेतावनी है कि तकनीक हमारी मदद के लिए है, लेकिन विवेक और सड़क सुरक्षा के नियमों का कोई विकल्प नहीं है।
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