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AAP में ‘बगावत’ के संकेत: राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाया, राज्यसभा में बोलने पर भी ‘सेंसरशिप’ की तैयारी

On: April 2, 2026 8:27 AM
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राघव चड्ढा का वीडियो संदेश 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं'

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे आंतरिक घमासान ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। पार्टी के सबसे युवा और चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब सांसद अशोक मित्तल राज्यसभा में पार्टी के नए उपनेता की जिम्मेदारी संभालेंगे।

यह कदम न केवल चड्ढा के बढ़ते कद को कम करने के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि पार्टी के भीतर एक गहरी खाई की ओर भी इशारा कर रहा है।
राज्यसभा सचिवालय को भेजा गया पत्र: बोलने के समय पर भी रोक
सूत्रों के अनुसार, AAP ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर इस फेरबदल की जानकारी दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पत्र में पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान राघव चड्ढा को बोलने के लिए समय (Time Allocation) आवंटित न किया जाए।

संसदीय राजनीति में अपनी ही पार्टी के सक्रिय सांसद को बोलने से रोकने का यह अनुरोध बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि पार्टी अब राघव चड्ढा को सदन में अपना प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं देना चाहती।

दिल्ली चुनाव 2025 के बाद बढ़ी दूरियां

राघव चड्ढा और पार्टी आलाकमान के बीच मनमुटाव की खबरें दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद से ही आनी शुरू हो गई थीं। दिल्ली चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद से चड्ढा ने खुद को पार्टी के एजेंडे और प्रमुख नेताओं से दूर कर लिया था।

पिछले कुछ महीनों में चड्ढा के सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयान भी पार्टी की विचारधारा के बजाय व्यक्तिगत और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं। उन्होंने सदन में और बाहर ‘पेड पेटर्निटी लीव’ (सवैतनिक पितृत्व अवकाश), हवाई अड्डों पर खाने की बढ़ती कीमतों और गिग वर्कर्स (स्वतंत्र कामगारों) के अधिकारों जैसे विषयों पर चर्चा की। हालांकि, इन मुद्दों को जनता ने सराहा, लेकिन AAP के नेतृत्व को उनकी ‘चुप्पी’ और पार्टी के मुद्दों से दूरी खलने लगी थी।

निशाने पर चड्ढा: असम के स्टार प्रचारकों की सूची से भी बाहर
राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने की अटकलें तब और तेज हो गई थीं, जब उन्हें असम चुनाव के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर रखा गया था। पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि चड्ढा जिस तरह से अपनी अलग छवि (Brand Identity) बनाने की कोशिश कर रहे थे, वह आलाकमान को रास नहीं आ रहा था।

यह भी पढ़ें-पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ममता के गढ़ भवानीपुर में अमित शाह की हुंकार, बोले— ‘दीदी की विदाई तय, 15 दिन बंगाल में ही डालूंगा डेरा’

हाल ही में उन्होंने शहरों में बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा, लेकिन जब पार्टी पर संकट के बादल थे या दिल्ली सरकार से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत थी, तब चड्ढा की गैर-मौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए।

कौन हैं नए उपनेता अशोक मित्तल?

राघव चड्ढा की जगह लेने वाले अशोक मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के चांसलर हैं। मित्तल की नियुक्ति को पार्टी द्वारा ‘अनुशासन’ और ‘स्थिरता’ बहाल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। राज्यसभा में AAP के कुल 10 सदस्य हैं, जिनमें से 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं। मित्तल की नियुक्ति पंजाब के कोटे को भी संतुलित करती है।

क्या राघव चड्ढा छोड़ेंगे ‘झाड़ू’ का साथ?

राजनीतिक गलियारों में यह सबसे बड़ा सवाल है। चड्ढा की चुप्पी और पार्टी की उन पर की गई हालिया कार्रवाई उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा करती है। 2025 की हार के बाद AAP अपने संगठन को पुनर्गठित कर रही है, और ऐसे में चड्ढा जैसे कद्दावर नेता को हाशिए पर धकेलना पार्टी के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है।

निष्कर्ष

आम आदमी पार्टी में अशोक मित्तल का उदय और राघव चड्ढा का निष्कासन केवल एक पद का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह पार्टी की आंतरिक रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। जहां एक ओर चड्ढा जनहित के ग्लोबल मुद्दों पर बात कर रहे हैं, वहीं पार्टी अब उन नेताओं को प्राथमिकता दे रही है जो उसके कोर एजेंडे के प्रति पूरी तरह समर्पित हों।

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