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काला फीता, देवों की मूरत इनकी मांगे सुन लो तीरथ, NHM कर्मचारी इन 9 मांगों को लेकर करेंगें आंदोलन।

On: February 14, 2022 11:23 AM
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काला फीता देवों की मूरत इनकी मांगे सुन लो तीरथ, NHM कर्मचारी इन 9 मांगों को लेकर करेंगें आंदोलन।उत्तराखंड प्रदेश में संविदा NHM कर्मचारियों द्वारा अपनी 9 सूत्री मांगों के निराकरण हेतु आंदोलन करने का फैसला लिया गया है। यह भी दुविधा का ही कारण है कि एक ओर हम डॉक्टर को भगवान का रूप कहते हैं वहीं दूसरी ओर हालात यह हैं कि उन्हीं भगवान के रूप यानी डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों को अपनी मांगों को मनवाने के लिए संकट के इस दौर में भी आंदोलन तक करना पड़ रहा है। हम यह ना भूलें कि यह डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी ही हैं जो इस मुसीबत के दौर में भी निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा कर रहे हैं। जहां एक ओर खतरनाक महामारी को देखते हुए लोग घर से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं वहीं डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी अपने परिवार से मीलों दूर जनता की सेवा कर रहे हैं। ऐसे में यदि वे अपनी कुछ जायज मांगे सरकार के समक्ष रखते हैं तो सरकार को इन मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए और इस पर काम करना चाहिए।
28 से 31 मई तक एनएचएम कर्मचारी करेंगे हाथ में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन।
काला फीता देवों की मूरत इनकी मांगे सुन लो तीरथ, NHM कर्मचारी इन 9 मांगों को लेकर करेंगें आंदोलन। अपनी 9 सूत्री मांगों में को लेकर एनएचएम कर्मचारी 28 मई से लेकर 31 मई तक हाथों में काली पट्टी बांधकर आधे दिन काम करेंगे और उसके बाद आधे दिन होम आइसोलेट हो जाएंगे।
एनएचएम स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संगठन अल्मोड़ा की अध्यक्ष डॉ शिखा जोशी के अनुसार “उनकी सरकार से प्रमुख मांग है कि सभी एनएचएम कर्मचारियों को समान पद समान वेतन और 60 साल तक की जॉब सिक्योरिटी प्रदान की जाए।” साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें उनका 2 साल से लंबित लॉयल्टी बोनस भी दिया जाए।

वही संगठन के अल्मोड़ा जिला सचिव govind kunjwal ने कहा कि “उनका सरकार से निवेदन है कि उनकी मांगों को प्रमुखता से लें और जो भी 9 सूत्री मांगे हैं उन्हें पूरा करें। उनके द्वारा इस महामारी के दौर में भी लगातार जी जान लगाकर काम किया जा रहा है,ऐसे में सरकार को भी समझना चाहिए कि जब हम अपने काम में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं और अन्य सभी सरकारी कर्मचारियों के जितना ही काम कर रहे हैं तो फिर क्यों उनके साथ सरकार के द्वारा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।”साथ ही उन्होंने मांगे पूरी ना होने पर कठोर  कदम उठाने की भी चेतावनी दी।

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यह  है NHM कर्मचारियों की मांगे।
1- एनएचएम कर्मियों हेतु सुस्पष्ट सेवा नियमावली लागू की जाए।2- एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत कर्मियों को ex-cadre कर्मियों की भांति वेतन और 60 वर्ष तक जॉब सिक्योरिटी प्रदान करें।3- कोरोना को दृष्टिगत रखते हुए एनएचएम संविदा कर्मियों का सामूहिक बीमा एवं नियमित कर्मियों की भांति गोल्डन कार्ड की सुविधा अभिलंब प्रदान की जाए।4-  कोविड ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों को कोरोना होता है तो उनके इलाज के लिए वार्ड तैयार किए जाएं, जहां उनका इलाज हो सके, जिससे उनकी जान बचाई जा सके।5- 2 साल से लंबित पड़ा लॉयल्टी बोनस अभिलंब कर्मचारियों को दिया जाए।6- भारत सरकार द्वारा एचआर रेसमाइजेशन मद के प्रावधानों के अनुरूप एनएचएम कर्मियों की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए स्वीकृत धनराशि  का उपयोग अभिलंब NHM. कर्मियों की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए किया जाए।

7-एन. एच. एम. के अन्तर्गत कार्यरत ऐसे कर्मी जिनके पद चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के संवर्गिय ढांचे में पूर्व से ही स्वीकृत है एवं वर्तमान तक रिक्त हैं इन पदों पर वर्तमान / भविष्य में नियुक्ति प्रारम्भ होने की दशा में रिक्त पदों के सापेक्ष 50% पद एन.एच.एम. के अन्तर्गत कार्यरत ऐसे कर्मियों द्वारा जिनकी योग्यता तथा अनुभव पदो के अनुरूप हों को समायोजित कर भरा जायें।

8. एन.एच. एम. के अन्तर्गत आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति संम्बन्धि आदेशों को अबिलम्ब निरस्त किया जाये एवं राज्य तथा जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से संविदा में पूर्व की भांति नियुक्ति की जाये। उक्त के संदर्भ में यह भी अवगत कराना है कि वर्तमान में एन.एच.एम. के अन्तर्गत कार्यरत आउटसोर्सिंग एजेन्सियों द्वारा नियुक्त कर्मियों के वेतन से लगभग 52% की कटौती की जा रही है जिससे अल्पवेतन भोगी कर्मियों द्वारा अपने तथा अपने परिवार का भरण-पोषण किया जाना असम्भव है अतः आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त कर्मियों का एन.एच.एम. में अबिलम्ब समायोजित किया जाये जिससे कि भविष्य में एन.एच.एम. कर्मियों की सेवाओं पर कोई संकट पैदा न हो।
9- एनएचएम कर्मियों के कार्य के आधार पर वेतन की 5% वार्षिक वृद्धि को राज्य सरकार के स्तर पर बढ़ाकर 10% किया जाए।
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