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उत्तराखंड में मौसम का ‘महा-अलर्ट’: 22 मार्च तक बारिश और बर्फबारी का तांडव, पहाड़ी जिलों में बिजली गिरने की चेतावनी

On: March 17, 2026 5:12 AM
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उत्तराखंड के पहाड़ों में बर्फबारी और बारिश का दृश्य, पहाड़ी रास्तों पर अलर्ट और खराब मौसम की सांकेतिक तस्वीर।

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर कुदरत के मिजाज बदलने वाले हैं। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने राज्य के लिए आगामी पांच दिनों का विस्तृत वेदर बुलेटिन जारी करते हुए भारी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 22 मार्च तक पूरे प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। विशेष रूप से ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में ओलावृष्टि व बिजली गिरने (Thunderstorm with Lightning) का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

आज से करवट बदलेगा मौसम: पर्वतीय जिलों में हलचल

आज, 17 मार्च से ही राज्य के पर्वतीय जिलों में बादलों का डेरा जमना शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, मैदानी इलाकों (जैसे हरिद्वार और उधमसिंह नगर) में आज मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा, लेकिन शाम होते-होते बादलों की आवाजाही तापमान में गिरावट का संकेत देने लगेगी।

18 मार्च: मैदानों में भी पहुंचेगी बारिश की बौछारें

बुधवार, 18 मार्च से बारिश का दायरा बढ़ने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से पहाड़ी जिलों के साथ-साथ मैदानी जिलों में भी बारिश की एंट्री होगी।

  • प्रभावित जिले: उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़।
  • बर्फबारी का स्तर: 3300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सफेद चादर बिछनी शुरू हो जाएगी, जिससे ट्रेकिंग और चारधाम रूट पर ठंडक बढ़ेगी।

19 और 20 मार्च: पूरे प्रदेश में ‘वेट स्पेल’ का कहर

गुरुवार और शुक्रवार को मौसम अपने चरम पर होगा। इन दो दिनों में उत्तराखंड का कोई भी हिस्सा बारिश से अछूता नहीं रहेगा।

  • पर्वतीय क्षेत्र: यहां हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ऊंची चोटियों पर मध्यम बर्फबारी की संभावना है।
  • मैदानी क्षेत्र: देहरादून, ऋषिकेश, रुड़की और हल्द्वानी जैसे शहरों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी। अचानक होने वाली इस बारिश से तापमान में गिरावट आएगी, जिससे मार्च के महीने में भी लोगों को स्वेटर निकालने पड़ सकते हैं।

21-22 मार्च: बिजली चमकने और ओलावृष्टि की चेतावनी

सप्ताहांत (Weekend) पर भी राहत मिलने के आसार नहीं हैं। 21 मार्च को पूरे प्रदेश में मौसम विभाग ने ‘सावधान’ रहने की सलाह दी है। बादलों की गर्जना और बिजली चमकने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि इस समय फलों के पेड़ों पर आए बौर (फूल) ओलावृष्टि से प्रभावित हो सकते हैं। रविवार, 22 मार्च को भी यही सिलसिला जारी रहेगा, जिसके बाद मौसम के धीरे-धीरे खुलने की उम्मीद है।

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तापमान का गणित: ठंड और गर्मी की ‘लुका-छिपी’

पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में तापमान में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। कहीं तापमान सामान्य से अधिक है, तो कहीं पहाड़ों में यह सामान्य से काफी नीचे चला गया है।

विशेष नोट: मौसम विभाग ने एक दिलचस्प विरोधाभास भी बताया है। बारिश के अलर्ट के बावजूद, अगले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी जा सकती है। इसका मतलब है कि बारिश आने से ठीक पहले उमस और हल्की गर्मी महसूस होगी, जो बाद में बारिश के बाद ठंडक में बदल जाएगी।

यात्रियों और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी

अगर आप इस सप्ताह उत्तराखंड की वादियों का रुख करने का प्लान बना रहे हैं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखें:

  • ऊंचाई वाले क्षेत्र: 3300 मीटर से ऊपर जाने वाले पर्यटक गर्म कपड़ों का पर्याप्त स्टॉक साथ रखें।
  • सड़क मार्ग: बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) और पत्थर गिरने का खतरा रहता है, इसलिए रात के सफर से बचें।
  • बिजली से बचाव: बिजली कड़कने के दौरान ऊंचे पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में न रुकें।

किसानों के लिए मशविरा

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक होने वाली यह बारिश गेहूं की फसल और सेब के बागानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।

निष्कर्ष: उत्तराखंड में अगले पांच दिन कुदरत के अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे। जहां बर्फबारी पर्यटकों के चेहरे पर मुस्कान लाएगी, वहीं बारिश और बिजली का अलर्ट स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती पेश कर सकता है। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।

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