गैरसैंण (भराड़ीसैंण): देवभूमि उत्तराखंड के संसदीय इतिहास में आज का दिन एक नया अध्याय लिख गया। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹1.10 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट पेश किया। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की आहट के बीच, इस बजट को धामी सरकार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। विशेष बात यह है कि वित्त विभाग का जिम्मा संभाल रहे मुख्यमंत्री धामी का पूर्णकालिक वित्त मंत्री के रूप में यह पहला बजट है।
बजट की भव्यता और ऐतिहासिक परंपरा
उत्तराखंड के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब सत्र के पहले ही दिन राज्यपाल का अभिभाषण हुआ और उसी दिन शाम को बजट भी पेश कर दिया गया। सोमवार सुबह 11 बजे राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने अपने अभिभाषण के साथ सत्र की औपचारिक शुरुआत की। इसके ठीक बाद, अपराह्न 3 बजे मुख्यमंत्री धामी ने सदन के पटल पर बजट रखा। ₹1.10 लाख करोड़ के इस बजट का मुख्य फोकस बुनियादी ढांचे, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर केंद्रित है।
चुनावी साल की ‘जोरआजमाइश’
उत्तराखंड में 2027 के शुरुआती महीनों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में इस सत्र को केवल बजट सत्र न मानकर ‘चुनावी बिगुल’ के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने जहाँ विकास के आंकड़ों के जरिए जनता का दिल जीतने की कोशिश की, वहीं विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर अपने ‘तरकश के तीर’ तैयार कर रखे हैं।
बजट सत्र की मुख्य विशेषताएं:
- कुल बजट का आकार: लगभग ₹1.10 लाख करोड़।
- विधायी कार्य: 10 मार्च को सरकार सदन में 9 महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी।
- जनता की भागीदारी: 38 विधायकों ने जनसरोकारों से जुड़े लगभग 600 प्रश्न लगाए हैं, जिनका जवाब सरकार को देना होगा।
विपक्ष की दूरी और ‘बहिष्कार’ की राजनीति
जहाँ सत्तापक्ष इस बजट को ‘ऐतिहासिक’ और ‘समावेशी’ बता रहा है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के तेवर तल्ख नजर आ रहे हैं। रविवार शाम विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण द्वारा बुलाई गई कार्यमंत्रणा समिति और सर्वदलीय बैठक से कांग्रेस ने पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपने बहुमत के अहंकार में विपक्ष की आवाज को दबा रही है और एजेंडा तय करने में उनकी राय को नजरअंदाज किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने बेरोजगारी, पलायन, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के बदहाल ढांचे को लेकर ‘सड़क से सदन तक’ सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
मुख्यमंत्री धामी का नया अवतार
पिछले वर्ष तत्कालीन वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद से वित्त मंत्रालय की कमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास ही है। पिछले साल उन्होंने अनुपूरक बजट पेश कर अपनी वित्तीय सूझबूझ का परिचय दिया था, लेकिन यह पहली बार है जब उन्होंने राज्य का मुख्य वार्षिक बजट पेश किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीएम धामी इस बजट के जरिए एक ‘विकास पुरुष’ की छवि को और मजबूत करना चाहते हैं, ताकि आगामी चुनावों में भाजपा को इसका सीधा लाभ मिल सके।
सत्तापक्ष की जवाबी रणनीति
भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में मुख्यमंत्री धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अपने विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य विपक्ष के हमलों का जवाब तथ्यों और आंकड़ों के साथ देना है। संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और बजट में समाज के हर वर्ग—किसान, युवा, महिला और बुजुर्ग—का ध्यान रखा गया है।
निष्कर्ष: क्या यह बजट बदलेगा उत्तराखंड की तस्वीर?
भराड़ीसैंण की ठंडक के बीच सदन के अंदर सियासी पारा चढ़ चुका है। ₹1.10 लाख करोड़ का यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देने का दावा करता है। हालांकि, असली चुनौती इस बजट के प्रावधानों को धरातल पर उतारने की होगी। क्या धामी सरकार इस भारी-भरकम निवेश के जरिए पलायन और बेरोजगारी जैसे ‘नासूर’ का इलाज कर पाएगी? यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल गैरसैंण की फिजाओं में चुनावी राजनीति की गूंज साफ सुनाई दे रही है।








