क्राइसिस डेस्क, Dooon Prime News
काराकस/नई दिल्ली: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से तबाही की एक बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है। बुधवार को देश के पश्चिमी हिस्से में एक के बाद एक आए दो विनाशकारी भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। रिक्टर स्केल पर इनकी तीव्रता 7.1 और 7.5 मापी गई है।
महज एक मिनट के अंतराल पर आए इन दो शक्तिशाली झटकों के कारण राजधानी काराकस सहित कई बड़े शहरों में सैकड़ों बहुमंजिला इमारतें और रिहायशी मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस महाविपत्ति में शुरुआती अनुमानों के मुताबिक 10,000 से लेकर 1,00,000 (एक लाख) के बीच लोगों के मारे जाने की कगार पर होने की आशंका जताई जा रही है। हालात की गंभीरता को देखते हुए वेनेजुएला सरकार ने पूरे देश में आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा कर दी है।
महज 60 सेकंड में मलबे के ढेर में तब्दील हुए कई शहर
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का मुख्य केंद्र राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर (100 मील) पश्चिम में जमीन के भीतर था। स्थानीय समयानुसार बुधवार को पहले 7.2 (शुरुआती रीडिंग) तीव्रता का झटका लगा और लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही यानी एक मिनट से भी कम समय के भीतर 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक विनाशकारी झटका महसूस किया गया।
मौसम वैज्ञानिकों और भूगर्भ विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि भूकंप का केंद्र आबादी वाले इलाके के करीब होने के कारण जान-माल का नुकसान इतिहास के सबसे बड़े आंकड़ों को छू सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके इतने तेज थे कि जमीन लहरों की तरह डोल रही थी, जिससे मजबूत कंक्रीट के ढांचे भी पल भर में जमींदोज हो गए।
कार्यवाहक राष्ट्रपति ने घोषित की देशव्यापी इमरजेंसी
इस भीषण प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश को संबोधित किया। भावुक संदेश में उन्होंने पूरे देश में आधिकारिक रूप से ‘इमरजेंसी’ लागू करने का एलान किया। राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कहा, “यह हमारे इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक है। जिन नागरिकों ने इस आपदा में अपने प्रियजनों और परिवार के सदस्यों को खोया है, उनके प्रति पूरी सरकार गहरी संवेदना व्यक्त करती है।” हालांकि, जमीनी स्तर पर मलबे और कटे हुए संचार संपर्कों के कारण उन्होंने अभी तक मृतकों या घायलों का कोई निश्चित या अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया है।
युद्ध स्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन, सेना ने संभाला मोर्चा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘CNN’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मलबे के नीचे दबे हजारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए देश की सभी इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों और सैन्य बलों को मोर्चे पर उतार दिया गया है। प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
वेनेजुएला के गृह मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने सरकारी टेलीविजन पर लाइव आकर स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “राजधानी और उसके पश्चिमी हिस्सों में सैकड़ों घर और इमारतें पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं। नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित सहायता के लिए सरकार के पास उपलब्ध हर छोटे-बड़े संसाधन, क्रेन, और मेडिकल टीमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता मलबे में फंसी जिंदगियों को बचाना है।”
आजादी के जश्न का दिन मातम में बदला
भूकंप वाले दिन वेनेजुएला में एक ऐतिहासिक संयोग भी रहा, जिसने इस त्रासदी के दर्द को और बढ़ा दिया। दरअसल, बुधवार को देश का स्वतंत्रता दिवस था। 1821 में इसी दिन वेनेजुएला को स्पेन से आजादी मिली थी, जिसके कारण पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश (सार्वजनिक छुट्टी) थी। छुट्टी होने की वजह से लोग अपने दफ्तरों या बाहर होने के बजाय घरों में मौजूद थे। यही कारण है कि बहुमंजिला इमारतों के गिरने से हताहतों की संख्या इतनी भयावह होने की आशंका है।
पश्चिमी काराकस की रहने वाली 41 वर्षीय एस्ट्रिड रामिरेज़ ने रोते हुए अपना अनुभव साझा किया, “जैसे ही धरती हिली, चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। हर कोई अपनी जान बचाने के लिए सीढ़ियों की तरफ भाग रहा था। पीछे मुड़कर देखा तो पड़ोस की इमारत ताश के पत्तों की तरह गिर चुकी थी।” वहीं पूर्वी काराकस की कोरो मार्टिनेज (56 वर्ष) ने बताया, “एक भयानक गड़गड़ाहट की आवाज हुई। घर का सारा सामान, फ्रिज और अलमारियां पलट गईं। अपनी पूरी जिंदगी में मैंने ऐसा खौफनाक मंजर कभी नहीं देखा था।”
अस्पतालों में हाई अलर्ट, मुख्य हवाई अड्डा बंद
भूकंप के केंद्र के उत्तर में स्थित माइक्वेटिया में देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रनवे और बुनियादी ढांचे को पहुंचे गंभीर नुकसान के कारण अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। सभी उड़ानों को डायवर्ट किया गया है। उधर, घायलों की बढ़ती तादाद को देखते हुए चिकित्सा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। काराकस के प्रमुख ‘अस्पताल डी क्लिनिकास’ के प्रबंधन ने बताया कि सभी डॉक्टरों, सर्जनों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और नाइट शिफ्ट के कर्मचारियों को चौबीसों घंटे ड्यूटी पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पीएम मोदी ने जताया दुख: भारत हर संभव मदद के लिए तैयार
वेनेजुएला में आई इस प्रलयंकारी आपदा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने वेनेजुएला की जनता के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा, “वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि और तबाही की खबरों से मन अत्यंत व्यथित है। भारत के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से मैं वेनेजुएला की सरकार और वहां के पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस संकट में अपनों को खोया है।”
पीएम मोदी ने आगे कहा, “हम घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं। इस बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में भारत संकटग्रस्तों के साथ मजबूती से खड़ा है और मानवीय आधार पर हर संभव सहायता और राहत सामग्री भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
राहत की बात: तेल इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित
वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले तेल क्षेत्र (Oil Sector) से एक राहत भरी खबर जरूर आई है। शुरुआती सरकारी समीक्षा के अनुसार, देश के प्रमुख तेल इंफ्रास्ट्रक्चर और रिफाइनरियों पर इस भूकंप का कोई तात्कालिक या गंभीर असर नहीं पड़ा है। इसका मुख्य कारण यह है कि जिन पश्चिमी शहरों में सबसे ज्यादा तबाही दर्ज की गई है, वहां कोई बड़ा तेल केंद्र स्थित नहीं था। लेक माराकाइबो के विशाल तेल हब के पास स्थित माराकाइबो शहर के नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वहां तेल संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
वैश्विक समुदाय से मदद की अपील, अमेरिका आया आगे
इस बीच, राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद के हाथ बढ़ने लगे हैं। अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी देते हुए कहा, “हम वेनेजुएला के प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और आपातकालीन सहायता सामग्री जुटा रहे हैं। यह भूकंप बेहद विनाशकारी और दिल दहला देने वाला है।” काराकस स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें क्षतिग्रस्त इलाकों से दूर रहने और सुरक्षित शेल्टर होम में शरण लेने की सलाह दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।










