कई सालों से बंद पड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल फिर से शुरू होने जा रही है। यह यात्रा 30 जून 2025 से दोबारा शुरू होगी। कोरोना महामारी की वजह से यह यात्रा साल 2020 से बंद थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कोशिशों से इसे फिर से शुरू किया जा रहा है।
इस पवित्र यात्रा का संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) करेगा और यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले से होकर गुजरेगी। यात्रा का मार्ग लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) से होकर जाता है। यह दर्रा भारत-चीन सीमा पर स्थित है और यह रास्ता सबसे नजदीकी और पारंपरिक मार्गों में से एक माना जाता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिन्दू धर्म के लिए बहुत ही पवित्र मानी जाती है। इसे भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और हर साल हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं। अब जब यह यात्रा फिर से शुरू हो रही है, तो श्रद्धालुओं में एक बार फिर से उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा के दौरान यात्रियों को ऊंचे पहाड़, कठिन रास्ते और ठंडे मौसम का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद लोग इस यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव के तौर पर देखते हैं।
सरकार की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पूरी तैयारी की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाएं, ठहरने की व्यवस्था, खाने-पीने की सुविधा और मार्ग की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जो लोग यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पासपोर्ट की जरूरत होगी, क्योंकि यह यात्रा चीन की सीमा से भी होकर गुजरती है।
यह यात्रा न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत-तिब्बत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कड़ी को भी मजबूत करती है।
जो भी लोग इस पवित्र यात्रा में शामिल होने का मन बना रहे हैं, वे कुमाऊं मंडल विकास निगम की वेबसाइट से यात्रा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।
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