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उत्तरकाशी: यमुनोत्री हाईवे पर भीषण हादसा, यमुना नदी में गिरी कार; दो युवाओं की दर्दनाक मौत से पसरा मातम

On: February 27, 2026 12:40 PM
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उत्तरकाशी |
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खराब रास्ते, तीखे मोड़ और तेज रफ्तार का कॉकटेल अक्सर निर्दोष जानों पर भारी पड़ रहा है। ताजा हृदयविदारक घटना सीमांत जिले उत्तरकाशी से सामने आई है, जहाँ यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई को पार करते हुए सीधे उफनती यमुना नदी में जा गिरी। इस भीषण दुर्घटना में कार सवार दो होनहार युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
रिखाऊं खड्ड के पास ‘काल’ बनी तीखी मोड़
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुखद दुर्घटना यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर डामटा के समीप ‘रिखाऊं खड्ड’ के पास घटी। कार संख्या UK 07 HA 3697 में सवार होकर दो युवक अपने पैतृक गांव ढुइंक (पुरोला) से डामटा की ओर जा रहे थे। अभी सफर शुरू हुए कुछ ही समय बीता था कि रिखाऊं खड्ड के पास एक बेहद तीखे और खतरनाक मोड़ पर चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। नियंत्रण खोते ही कार अनियंत्रित होकर सड़क से फिसली और गहरी खाई में गिरती हुई सीधे नीचे बह रही यमुना नदी के तेज बहाव में जा समाई।
हादसे का मंजर इतना खौफनाक था कि कार के नदी में गिरते ही जोरदार आवाज हुई, जिसे सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके की ओर दौड़े। गहरी खाई और यमुना नदी के रौद्र रूप को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तत्काल इसकी सूचना डामटा पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम को दी।
पुलिस और SDRF का चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन
दुर्घटना की सूचना मिलते ही डामटा पुलिस, फायर सर्विस और SDRF (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) की टीमें बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य के लिए घटनास्थल पर पहुँचीं। उबड़-खाबड़ रास्तों, खड़ी खाई और उफनती नदी के किनारे होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा था। रेस्क्यू टीमों को नदी के किनारे तक पहुँचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कड़ी जद्दोजहद के बाद SDRF की टीम नदी के किनारे फंसी क्षतिग्रस्त कार तक पहुँची। दुर्भाग्यवश, कार के अंदर मौजूद दोनों युवकों की मौके पर ही मृत्यु हो चुकी थी। टीम ने बेहद सावधानी से दोनों शवों को क्षतिग्रस्त वाहन से बाहर निकाला और स्ट्रेचर व रस्सियों के सहारे ऊँची खाई से ऊपर हाईवे तक पहुँचाया।
मृतकों की पहचान:
High-altitude rescue teams द्वारा शवों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के बाद उनकी पहचान की गई। मृतकों की शिनाख्त निम्नलिखित रूप में हुई है:

  • तुषार खत्री (25 वर्ष), पुत्र दिनेश, निवासी- ढुइंक (पुरोला)।
  • अजय (26 वर्ष), पुत्र मिजान सिंह, निवासी- ढुइंक (पुरोला)।
    ढुइंक गांव में पसरा सन्नाटा, परिजनों में कोहराम
    जैसे ही दो जवान बेटों की मौत की खबर उनके पैतृक गांव ढुइंक पहुँची, वहां चीख-पुकार मच गई। पूरा गांव स्तब्ध रह गया और घरों में चूल्हे तक नहीं जले। तुषार और अजय, दोनों अपनी उम्र के पच्चीसवें-छब्बीसवें साल में थे और परिवार की बड़ी उम्मीदें थे। एक ही गांव के दो युवाओं की एक साथ असमय मृत्यु ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
    परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और वे इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उनके लाल अब इस दुनिया में नहीं हैं। गांव के प्रधान त्रेपन रावत और जिला पंचायत सदस्य अनिता नेगी सहित राज्य मंत्री राजकुमार ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात कर उन्हें इस कठिन समय में ढांढस बंधाया है और सरकार से उचित सहायता की मांग की है।
    पुरोला के थानाध्यक्ष दीपक कठैत ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया:

“हादसे की सूचना मिलते ही डामटा पुलिस और SDRF की रेस्क्यू टीम तुरंत रवाना कर दी गई थी। खाई बेहद गहरी थी और नदी का बहाव भी तेज था, जिससे रेस्क्यू में चुनौती आई। दुर्भाग्यवश, कार सवार दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। शवों को खाई से बाहर निकालकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। दुर्घटना के कारणों की जाँच की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।”

उत्तरकाशी में बढ़ते सड़क हादसों ने बढ़ाई चिंता: प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल
यमुनोत्री हाईवे पर हुआ यह ताजा हादसा कोई इकलौती घटना नहीं है। उत्तरकाशी जिले में पिछले कुछ दिनों से सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जो प्रशासन और आम जनता, दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पहाड़ों में ड्राइविंग हमेशा से जोखिम भरी रही है, लेकिन हाल की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल के दिनों में हुई कुछ अन्य प्रमुख दुर्घटनाएं:

  • नौगांव-पुरोला मार्ग: सौंदाड़ी गांव के पास एक वाहन अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया था, जिसमें 4 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
  • अदनी-रौंतल मार्ग: एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी और दो लोग घायल हुए थे।
  • धरासू-जोगत मार्ग: खड़ाखाल के पास एक अन्य वाहन खाई में गिर गया था, जिसमें एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी और 5 लोग जख्मी हुए थे।
    ये लगातार हो रहे हादसे इस बात का प्रमाण हैं कि पहाड़ों में सड़क सुरक्षा को लेकर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
    निष्कर्ष और सुरक्षा की अपील: ब्लैक स्पॉट्स पर क्रैश बैरियर की सख्त जरूरत
    यमुनोत्री हाईवे पर तुषार और अजय की असमय मौत ने एक बार फिर पहाड़ों में ड्राइविंग के खतरों और व्यवस्थागत खामियों को उजागर किया है। रिखाऊं खड्ड के पास का वह तीखा मोड़ जहाँ यह हादसा हुआ, स्थानीय लोगों के अनुसार एक “ब्लैक स्पॉट” (Black Spot) है, जहाँ पहले भी कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
    अक्सर देखा जाता है कि पहाड़ों में खराब मोड़, विजिबिलिटी की कमी, और सबसे महत्वपूर्ण—सुरक्षा घेरों (Parapets) या क्रैश बैरियर (Crash Barriers) का अभाव—छोटी सी मानवीय चूक को बड़े हादसे में बदल देता है। यदि उस मोड़ पर मजबूत क्रैश बैरियर लगे होते, तो शायद कार नदी में गिरने से बच सकती थी और दो युवाओं की जान बच जाती।
    स्थानीय लोगों की मांग:
    गुस्साए और दुखी स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि यमुनोत्री हाईवे पर रिखाऊं खड्ड जैसे सभी खतरनाक और चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर तत्काल प्रभाव से क्रैश बैरियर लगाए जाएं। साथ ही, तीखे मोड़ों को चौड़ा करने और गति सीमा को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी और माँ की गोद सूनी न हो। जब तक प्रशासन और लोक निर्माण विभाग पहाड़ों की सड़कों को सुरक्षित नहीं बनाते, तब तक निर्दोष जानों की बलि इसी तरह चढ़ती रहेगी।
    नोट: यह समाचार लेख आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर आधारित है। कृपया प्रकाशन से पूर्व स्थानीय पुलिस या प्रशासन से तथ्यों की अंतिम पुष्टि कर लें।

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