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नौकरी का झांसा देकर डंकी रूट से म्यांमार भेजे गए उत्तरकाशी के युवक, साइबर ठगी के लिए बनाया बंधक

On: January 10, 2026 6:40 AM
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उत्तरकाशी के दो युवकों को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर डंकी मार्ग के जरिये म्यांमार ले जाने और वहां अवैध रूप से बंधक बनाकर साइबर ठगी कराने का गंभीर मामला सामने आया है। युवकों से फर्जी फेसबुक आईडी बनवाने का काम कराया गया और विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया। सेना के आपसी संघर्ष के दौरान मौका पाकर दोनों युवक वहां से भाग निकले और एक एनजीओ व भारतीय दूतावास की मदद से किसी तरह भारत लौट सके। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

पीड़ित यशपाल बिष्ट निवासी चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी समय से खराब चल रही थी। जून 2025 में उनकी मुलाकात उत्तरकाशी निवासी उनके परिचित कन्हैया बिल्जवाण से हुई। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी आर्थिक परेशानी बताई, जिस पर कन्हैया ने विदेश में नौकरी दिलाने की बात कही और दिल्ली में रहने वाले अपने चाचा केशव बिल्जवाण से संपर्क करवाया।

केशव बिल्जवाण ने व्हाट्सएप पर बातचीत के दौरान बताया कि अगर पासपोर्ट बना हुआ है तो जल्द ही विदेश भेजा जा सकता है। अंग्रेजी न आने की बात कहने पर केशव ने कहा कि विदेश में नौकरी के लिए अंग्रेजी जरूरी है और इसके लिए ट्यूशन लगाने की सलाह दी। इसके बाद केशव ने जूम एप के जरिए इंटरव्यू का लिंक भेजा। लिंक खोलने पर केशव सहित दो विदेशी नागरिक जुड़े थे, जिन्होंने अंग्रेजी में इंटरव्यू लिया।

कुछ दिन बाद 26 जून 2025 की दिल्ली से बैंकॉक की फ्लाइट का टिकट भेजा गया और दिल्ली बुलाया गया। 25 जून को यशपाल अपने दोस्त मनीष पंवार और कन्हैया के साथ दिल्ली पहुंचे, जहां केशव बिल्जवाण ने उनसे टिकट के नाम पर 13-13 हजार रुपये लिए। अगले दिन केशव ने उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट छोड़ा, जहां से वे बैंकॉक पहुंचे।

बैंकॉक एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति उन्हें लेने आया और मैसोट ले गया। वहां एक होटल में रात रुकवाई गई। युवकों को हालात कुछ संदिग्ध लगे, लेकिन शिवम नाम के व्यक्ति ने भरोसा दिलाया कि डरने की कोई बात नहीं है। अगले दिन जंगल के रास्ते उन्हें म्यांमार ले जाया गया और डांगयांग क्षेत्र में सुपना नामक कंपनी में छोड़ दिया गया।

वहां चीनी नागरिकों और एक भारतीय व्यक्ति ने उन्हें काम की जानकारी दी और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए। 28 जून से उन्हें फेसबुक एडिटिंग का काम सिखाया गया और अलग-अलग फोटो लगाकर फर्जी फेसबुक आईडी बनाने के लिए मजबूर किया गया। कुछ दिन काम करने के बाद युवकों को गड़बड़ी का एहसास हुआ।

काम से इनकार करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कई दिनों तक एक ही इमारत में कैद करके रखा गया। पीड़ितों ने बताया कि पूरा ऑफिस चीनी नागरिकों के नियंत्रण में था। बाद में इलाके में सेना के बीच संघर्ष शुरू हो गया, जिससे चीनी नागरिक वहां से भाग निकले। इसी अफरा-तफरी में दोनों युवक वहां से निकलने में सफल रहे।

इसके बाद वे म्यांमार में भटकते रहे और एक एनजीओ के संपर्क में आए, जहां उन्होंने करीब एक माह शरण ली। बाद में भारतीय दूतावास की मदद से उन्हें सुरक्षित भारत लाया गया। एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर केशव बिल्जवाण और शिवम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

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