मुख्य बिंदु:
• सैन्य एक्शन टला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले बड़े सैन्य हमले को फिलहाल रोकने का ऐलान किया।
• मिडिल ईस्ट का अनुरोध: ईरान और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के अन्य देशों के हस्तक्षेप और अनुरोध के बाद लिया गया फैसला।
• ऐतिहासिक सैन्य तैयारी: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के बाद की सबसे बड़ी सैन्य ताकत के साथ कार्रवाई के लिए तैयार था।
• समझौते की रूपरेखा: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करने की शर्त पर बनी सहमति।
वॉशिंगटन / तेहरान
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भीषण तनाव और संभावित महायुद्ध की आहट के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ होने वाले एक बड़े और विनाशकारी सैन्य हमले को फिलहाल के लिए टालने की घोषणा की है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह फैसला ईरान तथा मध्य पूर्व के अन्य पड़ोसी देशों के कूटनीतिक अनुरोध और दुनिया के शांतिपूर्ण भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
हालांकि, हमला रोकने के साथ ही ट्रंप ने यह चेतावनी भी दोहराई है कि अमेरिकी सेना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे शक्तिशाली सैन्य बल के साथ पूरी तरह मुस्तैद थी और यदि जल्द ही कोई स्थाई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकता है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का बड़ा दावा: “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी तैयारी”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक बयान जारी करते हुए इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी सशस्त्र बल ईरान पर अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार और आधुनिक हथियारों से लैस थे।
ट्रंप के शब्दों में:
“अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए उस स्तर पर तैयार था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक नहीं देखा गया। हमारी ताकत और क्षमता चरम पर थी। लेकिन इसके बावजूद, ईरान और मध्य पूर्व के कई मित्र देशों की ओर से हमसे हमले को रोकने की अपील की गई, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच एक कूटनीतिक समझौते की रूपरेखा पर शुरुआती सहमति बन गई है।”
समझौते की शर्तें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम
इस संभावित सैन्य कार्रवाई को रोकने के पीछे कुछ बेहद कड़े नियम और शर्तें तय की गई हैं। ट्रंप द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नए कूटनीतिक ढांचे के तहत दो मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनना बेहद आवश्यक है:
1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पूर्ण संचालन: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को तुरंत, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलना होगा।
2.परमाणु खतरे का खात्मा: ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े उन सभी गतिविधियों को समाप्त करना होगा, जिनसे वैश्विक सुरक्षा को खतरा पैदा होता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “मैंने दुनिया के भविष्य, वैश्विक शांति और एक समृद्ध ईरान के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए इस हमले को रद्द करने का फैसला लिया है। लेकिन यह इस शर्त पर निर्भर करता है कि जल्द से जल्द एक अंतिम और ठोस समझौता हो जाए। इस पूरी प्रतिबद्धता में इजरायल भी अमेरिका के साथ पूरी तरह खड़ा है।”
चेतावनी और पलटवार: युद्ध की आग में झुलसने का खतरा
सैन्य एक्शन टालने के इस फैसले से ठीक पहले, दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और युद्ध की चेतावनियां अपने चरम पर थीं। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर ईरान को आगाह किया था कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई शुरू की, तो वह ईरान पर इतना भीषण हमला करेगा जिसे बर्दाश्त करना उसके लिए नामुमकिन होगा।
दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी चेतावनियों का जवाब दिया था। तेहरान (ईरान की राजधानी) की ओर से कहा गया था कि यदि अमेरिका हमला करता है, तो मध्य पूर्व में अमेरिका का समर्थन करने वाले सभी देश और अमेरिकी सैन्य ठिकाने सीधे तौर पर युद्ध की इस आग में झुलस जाएंगे।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य मुठभेड़ होती, तो इसका सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर पड़ता। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर दुनिया का एक-चौथाई तेल गुजरता है। ऐसे में ट्रंप का यह फैसला न केवल मध्य पूर्व में शांति बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़े झटके से राहत मिली है।
फिलहाल, दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच यह कूटनीतिक वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या दोनों देश एक स्थाई शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर पाते हैं या नहीं।