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​Harish Rawat Resigns: पूर्व सीएम हरीश रावत का कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा, ED रेड के बाद मचा सियासी बवाल

On: September 12, 2026 8:35 AM
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Harish Rawat Resigns — उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त बड़ा सियासी भूचाल आ गया, जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से त्यागपत्र देने का ऐलान कर दिया। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आए इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

​यह पूरा घटनाक्रम शुक्रवार को हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) चंदन सिंह जीना के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद शुरू हुआ। इस कार्रवाई के तुरंत बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की घोषणा की।

​ED Raid and Harish Rawat Resigns: ओएसडी पर कार्रवाई और रावत का बड़ा फैसला

​पूर्व ओएसडी के ठिकाने पर हुई कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए हरीश रावत ने कहा कि उनके सहयोगी के खिलाफ लगे आरोपों से वह स्तब्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंदन सिंह जीना उनके साथ सरकार और संगठन, दोनों जगह महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में रहे हैं।

​रावत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सामने आ रही खबरों के अनुसार उनके पूर्व सहयोगी पर ओएमआर (OMR) शीट में गड़बड़ी और ग्राम सेवक भर्ती में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है और उनके सहयोगी ने कोई दुस्साहस किया है, तो वह इसके लिए बेहद लज्जित हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें अपने पूर्व ओएसडी पर लगाए गए इन आरोपों पर आसानी से विश्वास नहीं हो रहा है।

​Harish Rawat Resigns to Protect Party’s Anti-Corruption Image

​हरीश रावत ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी ‘छात्रों की गूंज’ जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा और रोजगार प्रणाली में व्याप्त खामियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है।

​”मैं नहीं चाहता कि मेरे या मेरे किसी पूर्व सहयोगी के ऊपर लगे आरोपों की वजह से कांग्रेस पार्टी के इस बड़े संघर्ष को कोई नुकसान पहुंचे या पार्टी की छवि कमजोर हो। इसीलिए Harish Rawat Resigns का यह निर्णय पूरी जिम्मेदारी के साथ लिया गया है।”

​उन्होंने कहा कि वह फिलहाल किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए वह केवल अपने संगठनात्मक दायित्वों से अलग हो रहे हैं ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित न हो।

​UKSSSC Recruitment Board and Harish Rawat Resigns Context

​उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) में हुई गड़बड़ियों के संदर्भ में बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने तीन साल के कार्यकाल का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार देना था।

  • 42,000 से अधिक नियुक्तियां: उनके कार्यकाल के दौरान 42,000 से ज्यादा पदों पर पारदर्शी भर्तियां की गईं।
  • भर्ती बोर्ड का गठन: मेडिकल और शिक्षा क्षेत्र में तेजी से काम करने के लिए अलग-अलग भर्ती बोर्ड बनाए गए।
  • सख्त कदम: अनियमितता की शिकायत मिलते ही संबंधित अध्यक्ष को पद से हटाया गया था।

​रावत ने स्वीकार किया कि यदि उस दौरान अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर कोई ‘एरर ऑफ जजमेंट’ (निर्णय की चूक) हुई है, तो वह इसके लिए उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगते हैं।

​Harish Rawat Resigns: खुली चुनौती और जांच एजेंसियों से अपील

​हरीश रावत ने विपक्षी दलों और जांच एजेंसियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी के पास भर्ती प्रक्रियाओं में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई भी प्रमाण है, तो उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए।

​उन्होंने अपील की कि साक्ष्यों को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) या उत्तराखंड पुलिस को सौंपा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वह जांच में दोषी पाए जाते हैं या उनकी कोई व्यक्तिगत चूक साबित होती है, तो कानून उन्हें सख्त से सख्त सजा देने के लिए स्वतंत्र है।

​Political Impact of Harish Rawat Resigns on Uttarakhand Elections

​विधानसभा चुनावों से ठीक पहले Harish Rawat Resigns की खबर ने कांग्रेस के भीतर और बाहर नई बहस छेड़ दी है। हरीश रावत उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली चेहरों में से एक माने जाते हैं। उनके इस रणनीतिक कदम को राजनीतिक जानकार एक तीर से दो निशाने लगाने के रूप में देख रहे हैं—एक तरफ उन्होंने नैतिक आधार पर पद छोड़कर अपनी छवि को साफ रखने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक से प्रेरित बताकर जनता की सहानुभूति हासिल करने का प्रयास किया है।

​अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान हरीश रावत के इस इस्तीफे को स्वीकार करता है या उन्हें मनाकर वापस संगठन में सक्रिय भूमिका सौंपता है।

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