​ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट: पहाड़ों का सीना चीरकर आर-पार हुई 10 किमी सुरंग, तिरंगा फहराकर मनाया जश्न - Doonprimenews
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​ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट: पहाड़ों का सीना चीरकर आर-पार हुई 10 किमी सुरंग, तिरंगा फहराकर मनाया जश्न

On: September 13, 2026 6:58 AM
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​Rishikesh Karnaprayag Rail Project ने पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के मामले में एक नया इतिहास रच दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण हिस्से ढालवाला से शिवपुरी के बीच बनाई जा रही निकास सुरंग (Escape Tunnel) का शुक्रवार को सफलता के साथ ‘ब्रेकथ्रू’ पूरा कर लिया गया। जैसे ही पहाड़ के दोनों छोर आपस में मिले और सुरंग आर-पार हुई, वहां मौजूद इंजीनियरों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर इस ऐतिहासिक सफलता का उत्सव मनाया।

​यह सफलता इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि Rishikesh Karnaprayag Rail Project के तहत इस 10 किलोमीटर लंबी सुरंग की खोदाई भूगर्भीय दृष्टि से बेहद जटिल और संवेदनशील इलाके में की गई है। मुख्य सुरंग के समानांतर बनाई जा रही इस एस्केप टनल के तैयार होने से अब मुख्य सुरंग के निर्माण कार्य में भी तेजी आएगी।

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​भूगर्भीय दरारें और जलस्रोतों के बीच Rishikesh Karnaprayag Rail Project का इंजीनियरिंग चमत्कार

​Rishikesh Karnaprayag Rail Project का यह चरण निर्माण एजेंसी और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के लिए एक परीक्षा से कम नहीं था। ढालवाला से नीर गड्डू के बीच का 5.7 किलोमीटर का हिस्सा सबसे ज्यादा जोखिम भरा था। जमीन के भीतर बड़ी भूगर्भीय दरारें (Geological Faults) और खारास्रोत तथा नीर क्षेत्र में अचानक निकलने वाले प्राकृतिक जलस्रोत सुरंग खोदाई के रास्ते में बड़ी चुनौती बने हुए थे।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

​आरवीएनएल और मैक्स इंफ्रा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के इंजीनियरों ने आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए इस कार्य को अंजाम दिया। परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा और उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी के अनुसार, तमाम जटिलताओं के बावजूद शुक्रवार शाम ठीक 3 बजे 5.7 किमी की इस एस्केप टनल को पूरी तरह आर-पार कर लिया गया। अब यह पूरी निकास सुरंग ढालवाला से शिवपुरी (लगभग 10 किमी) तक एक सिरे से दूसरे सिरे से जुड़ चुकी है।

​क्यों बनाई जा रही है निकास सुरंग?

​सुरक्षा के विश्वस्तरीय मानकों को अपनाते हुए इस Rishikesh Karnaprayag Rail Project में मुख्य रेल सुरंगों के साथ-साथ समानांतर निकास सुरंगें तैयार की जा रही हैं।

  • ​आपकी सुरक्षा: किसी भी आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को मुख्य सुरंग से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इनका उपयोग किया जाएगा।
  • ​आवाजाही सुविधा: निकास सुरंग का आकार इतना रखा गया है कि इसमें एम्बुलेंस और छोटे राहत-बचाव वाहन आसानी से चल सकेंगे।
  • ​मुख्य सुरंग: मुख्य सुरंग का उपयोग सिर्फ ट्रेनों के आवागमन के लिए किया जाएगा।

​अधिकारियों का कहना है कि एस्केप टनल का काम पूरा होने के बाद मुख्य सुरंग का ब्रेकथ्रू अगले चार महीनों के भीतर पूरा करने की उम्मीद है।

​Rishikesh Karnaprayag Rail Project: एक नजर में मुख्य विशेषताएं

​उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल को ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली Rishikesh Karnaprayag Rail Project क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदलने वाली है।

  • ​कुल लंबाई: 125 किलोमीटर
  • ​प्रस्तावित नए रेलवे स्टेशन: 12 स्टेशन
  • ​ट्रेन स्पीड लिमिट: यात्री ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किमी/घंटा और मालगाड़ियों की 65 किमी/घंटा
  • ​पुलों की संख्या: 19 बड़े पुल
  • ​कुल सुरंगों की संख्या: 28 मुख्य सुरंगें
  • ​सुरंगों की कुल लंबाई: मुख्य एवं निकास सुरंगों को मिलाकर 213 किलोमीटर
  • ​वर्तमान स्थिति: 22 सुरंगों का काम पूरा हो चुका है।

​चारधाम यात्रा और स्थानीय विकास को मिलेगी नई गति

​हिमालयी राज्य उत्तराखंड में Rishikesh Karnaprayag Rail Project न केवल आम जनता की राह आसान करेगी, बल्कि प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं के सफर को बेहद सुगम और सुरक्षित बना देगी। जहां ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से पहुंचने में घंटों का समय लगता था, वहीं रेल नेटवर्क चालू होने के बाद यह दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी।

​इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने से उत्तराखंड के पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भारी बढ़ावा मिलेगा। कठिन विषम परिस्थितियों में 10 किलोमीटर एस्केप टनल का यह ब्रेकथ्रू भारतीय इंजीनियरिंग की दूरदर्शिता और समर्पण की एक बेहतरीन मिसाल है।

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