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ऋषिकेश में बड़ा हादसा: गंगा में गिरा चश्मा उठाने के चक्कर में बहा देहरादून का किशोर, दोस्तों के सामने हुआ ओझल

On: May 24, 2026 12:26 PM
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ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा नदी के तेज बहाव के बीच नाव और लाइफ जैकेट के साथ लापता किशोर की तलाश करते हुए एसडीआरएफ और जल पुलिस के जवान, किनारे पर मौजूद श्रद्धालु। |

​ऋषिकेश/देहरादून।

तीर्थनगरी ऋषिकेश के सुप्रसिद्ध त्रिवेणी घाट पर रविवार सुबह एक बड़ा और दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां गंगा नदी में नहाने के दौरान अपना चश्मा बचाने के प्रयास में देहरादून का एक 17 वर्षीय किशोर पानी के तेज बहाव में बह गया। दोस्तों के सामने ही वह देखते-देखते नदी की लहरों में ओझल हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय जल पुलिस और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि, घंटों चले गहन सर्च अभियान के बाद भी समाचार लिखे जाने तक लापता किशोर का कुछ पता नहीं चल पाया है। पुलिस और गोताखोरों की टीमें लगातार गंगा की लहरों को खंगाल रही हैं।

​दून से चार दोस्तों संग आया था घूमने

​मिली जानकारी के मुताबिक, लापता किशोर की पहचान 17 वर्षीय आयुष थापा पुत्र सुनील थापा के रूप में हुई है, जो कि ओल्ड कनाट प्लेस, चकराता रोड, देहरादून का निवासी था। रविवार को आयुष अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ देहरादून से ऋषिकेश घूमने और मंदिरों के दर्शन करने के लिए आया था। वीकेंड होने के कारण चारों दोस्त सुबह-सुबह ही ऋषिकेश पहुंच गए थे। गर्मी से राहत पाने और पवित्र गंगा में स्नान करने के उद्देश्य से चारों सुबह करीब सात बजे त्रिवेणी घाट पहुंचे थे, जहां यह अनहोनी हो गई।

​चश्मा पकड़ने की होड़ और तेज बहाव का जाल

​एसडीआरएफ (SDRF) ढालवाला के निरीक्षक कवींद्र सजवाण ने घटना के विस्तृत घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि यह हादसा रविवार सुबह लगभग 7:40 बजे का है। चारों दोस्त त्रिवेणी घाट पर गंगा नदी में नहा रहे थे और मौज-मस्ती कर रहे थे। इसी दौरान अचानक आयुष का चश्मा आंखों से फिसलकर गंगा नदी के पानी में गिर गया। चश्मा पानी की सतह पर तैरते हुए बहाव के साथ आगे बढ़ने लगा। आयुष ने अपने चश्मे को डूबने या बहने से बचाने के लिए पानी में उसका पीछा करना शुरू कर दिया।

​जैसे-जैसे चश्मा पानी की रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा था, आयुष भी अनजाने में सुरक्षित घेरे को पार कर गहरे पानी की तरफ कुछ कदम आगे बढ़ गया। घाट के पास पानी का बहाव बेहद अप्रत्याशित और तेज था। जैसे ही आयुष गहरे पानी के मुहाने पर पहुंचा, वह नदी के तेज अंतःप्रवाह (Undercurrent) को संभाल नहीं पाया और सीधे तेज बहाव की चपेट में आ गया।

​आंखों के सामने डूबा दोस्त, घाट पर मची चीख-पुकार

​आयुष को पानी के साथ बहता देख घाट पर मौजूद उसके दोस्तों के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत चिल्लाना शुरू किया और आस-पास मौजूद स्थानीय लोगों, पुरोहितों और श्रद्धालुओं से मदद की गुहार लगाई। चश्मे को पकड़ने की कोशिश में आयुष चंद सेकंड के भीतर ही घाट से कुछ दूरी पर जाकर पानी में पूरी तरह अदृश्य हो गया। चीख-पुकार सुनकर घाट पर भारी भीड़ जमा हो गई और स्थानीय स्तर पर तुरंत पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।

​जल पुलिस और SDRF का सर्च ऑपरेशन जारी

​हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय जल पुलिस और ढालवाला से SDRF के जवान बिना वक्त गंवाए सुरक्षा उपकरणों, लाइफ जैकेट और मोटर बोट्स के साथ त्रिवेणी घाट पहुंचे। पुलिस के गोताखोरों ने तुरंत नदी में छलांग लगाई और उस पॉइंट से सर्च ऑपरेशन शुरू किया जहां आयुष आखिरी बार देखा गया था।

​SDRF के अधिकारियों के अनुसार, पहाड़ों में हो रही मौसमी हलचल के कारण इन दिनों गंगा का जलस्तर और बहाव दोनों ही काफी तेज हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। गोताखोरों की टीम त्रिवेणी घाट से लेकर नीचे बैराज तक के पूरे इलाके में लगातार सर्चिंग कर रही है।
​परिजनों में कोहराम, पुलिस ने दी चेतावनी

​ऋषिकेश कोतवाली पुलिस ने घटना के तुरंत बाद देहरादून में आयुष के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें इस दुखद हादसे की जानकारी दी। बेटे के बहने की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया और रोते-बिलखते परिजन भी सुबह ही ऋषिकेश त्रिवेणी घाट पहुंच गए। पुलिस आयुष के साथ आए अन्य तीनों दोस्तों से भी पूछताछ कर रही है, जो इस हादसे के बाद से गहरे सदमे में हैं।

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​प्रशासन की सख्त अपील: खतरे को गंभीरता से लें पर्यटक

​इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन, जल पुलिस और SDRF ने संयुक्त रूप से ऋषिकेश आने वाले सभी श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और विशेषकर पर्यटकों के लिए एक कड़ी चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है।
​प्रशासन ने अपील की है कि:

  • ​प्रतिबंधित क्षेत्रों से दूर रहें: गंगा नदी के जिन तटों या घाटों को असुरक्षित या प्रतिबंधित घोषित किया गया है, वहां भूलकर भी स्नान के लिए न उतरें।
  • ​चेतावनी बोर्ड का पालन करें: घाटों पर प्रशासन द्वारा लगाए गए सूचना और चेतावनी बोर्ड पर लिखे निर्देशों को गंभीरता से पढ़ें और उनका शत-प्रतिशत पालन करें।
  • ​सुरक्षित घेरे में रहें: केवल उन्हीं घाटों पर स्नान करें जहां सुरक्षा जंजीरें (Safety Chains) या बैरिकेडिंग लगी हो। पानी के भीतर जंजीर छोड़कर आगे जाने का दुस्साहस बिल्कुल न करें।
  • ​लापरवाही से बचें: नदी के भीतर मोबाइल से सेल्फी लेने, रील बनाने या पानी में बही किसी वस्तु को पकड़ने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में न डालें।

​SDRF ने स्पष्ट किया है कि घाटों पर चौबीसों घंटे जवानों की तैनाती रहती है। किसी भी आपातकालीन स्थिति या सुरक्षा संबंधी सहायता के लिए पर्यटक तुरंत वहां तैनात पुलिस बल या SDRF के जवानों से संपर्क कर सकते हैं।

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