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प्रदेश में सैन्य पृष्ठभूमि केें ढाई लाख से ज्यादा वोटर होंगे निर्णायक, सभी राजनीतिक दल लगे वोटरों को लुभाने में


देहरादून- उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य प्रदेश होने के नाते यहां की राजनीति भी सैन्य मतदाताओं के इर्द गिर्द रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान एक बार फिर सैन्य पृष्ठभूमि के परिवार राजनेताओं की जुबां पर हैं। हर दल खुद को सैनिकों का हितैषी बताने में जुटा है। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा सर्विस वोटर्स की संख्या पौड़ी लोकसभा सीट में है। इसी सीट पर सर्विस वोटर्स, पूर्व सैनिकों और इनके परिजनों से जुड़े मुद्दे भी राजनेताओं की जुबान पर हैं।

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उत्तराखंड में सैनिकों के सम्मान से जुड़े तमाम विषय राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखते रहे हैं। पार्टियों के बड़े मंच हों या महत्वपूर्ण पद, सभी जगहों पर पूर्व सैनिकों को तवज्जो भी मिलती रही है। इसका सीधा कारण उत्तराखंड का सैनिक बाहुल्य प्रदेश होना है। शायद यही कारण है कि प्रदेश में देशभक्ति से जुड़े विषय राजनीतिक दल हाथों हाथ लेते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी सर्विस वोटर्स और पूर्व सैनिक राजनीतिक दलों के एजेंडे में दिख रहे हैं। इसीलिए जहां एक तरफ विपक्षी दल सेना से जुड़े कुछ मुद्दों को उठा रहे हैं तो भाजपा सेना में किए गए बड़े बदलावों की फेहरिस्त गिनवा रही है। उत्तराखंड में सैन्य वोटर्स को लेकर क्या है स्थिति आपको बताते हैं.


उत्तराखंड में सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े मतदाताओं की पहली पसंद अब तक भारतीय जनता पार्टी ही मानी जाती रही है। पिछले चुनावों के परिणामों में भी यह बात स्पष्ट होती हुई दिखाई देती है। लेकिन इतिहास को पीछे छोड़ते हुए कांग्रेस अब इन मतदाताओं के महत्व को समझकर इन्हें रिझाने के प्रयास में कमतर नहीं रहना चाहती। शायद इसीलिए लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के प्रत्याशी अग्निवीर जैसे मुद्दे को फिर से हवा देने में जुटे हुए हैं। यही नहीं पूर्व सैनिकों की समस्याओं से जुड़े विषयों को भी चुनाव में उठाया जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष मथुरा दत्त जोशी कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी दूसरे दलों के कार्यों को भी अपने खाते में जोड़ती रही है। वन रैंक वन पेंशन के मामले में यूपीए सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया था। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लिए गए निर्णय में विसंगति लाकर सैनिकों का नुकसान किया। इसके अलावा अग्निवीर के जरिए सेना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और युवाओं को भी स्थाई रोजगार से दूर रखा जा रहा है।


उत्तराखंड में सर्विस मतदाताओं की संख्या करीब 93,385 है। सबसे ज्यादा सर्विस वोटर्स पौड़ी जनपद में हैं 15,999 हैं। राज्य में सर्विस वोटर्स, पूर्व सैनिक और उनके परिजनों की संख्या 2 लाख 57 हजार से अधिक है। इस लिहाज से सबसे ज्यादा मतदाता देहरादून जिले में मौजूद हैं। कुल मतदाताओं में करीब 13 प्रतिशत मतदाता सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने भी अपने संगठनों में पूर्व सैनिकों को स्थान दिया है। अबतक सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े मतदाताओं की पहली पसंद भाजपा रही है।

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