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“मणिमहेश यात्रा में 16 श्रद्धालुओं की मौत, हजारों सुरक्षित, कई किलोमीटर पैदल चलकर बचाई जान”

On: September 1, 2025 8:10 AM
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हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, शिमला, सिरमौर, सोलन, ऊना और हमीरपुर जिलों में लगातार बारिश का दौर जारी है। नदियाँ और नाले उफान पर हैं, जिससे फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ गई हैं। कई सड़कें और भवन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, कुछ घरों को खतरा बना हुआ है, और लोग अपने घर खाली कर रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।

चंबा में हालात गंभीर

चंबा में बारिश 25 अगस्त से जारी है। 27 अगस्त को भारी बारिश के कारण मणिमहेश यात्रा पर रोक लगाई गई थी। भूस्खलन के चलते सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे लगभग 15,000 श्रद्धालु फंस गए। एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। प्रशासन ने हेलीकॉप्टरों की मदद से श्रद्धालुओं को निकालने का प्रयास किया, लेकिन खराब मौसम और धुंध के कारण उड़ानें संभव नहीं हो पाईं।

16 श्रद्धालुओं की मौत

डीसी चंबा मुकेश रेप्सवाल के अनुसार, मणिमहेश यात्रा के दौरान 16 श्रद्धालुओं की मौत हुई। इनमें से 7 की मौत कैलाश परिक्रमा के दौरान और 9 अन्य ने तीर्थयात्रा मार्ग पर खोई। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना।

पैदल सुरक्षित निकाले गए श्रद्धालु

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें फंसे श्रद्धालुओं को मणिमहेश डल झील से हड़सर और भरमौर तक सुरक्षित पहुँचाने में कामयाब रही। 10,000 से अधिक श्रद्धालु पैदल कलसुई पहुंचे, जहां से उन्हें बसों और निजी वाहनों के माध्यम से चंबा, पठानकोट और जम्मू पहुंचाया गया।

फंसे श्रद्धालुओं की स्थिति

31 अगस्त की शाम तक गौरीकुंड हड़सर मार्ग पर लगभग 50 श्रद्धालु फंसे हुए थे। राहत दल और स्थानीय लोग उनके साथ हैं। भरमौर में लगभग 4,000 श्रद्धालु अब भी हैं, जो पैदल चंबा के लिए रवाना हो रहे हैं।

अफवाहों से सावधानी बरतें

डीसी चंबा ने श्रद्धालुओं और आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया या अनधिकृत चैनलों की खबरों पर भरोसा न करें। केवल सरकारी आंकड़ों और सूचनाओं पर विश्वास करें।

मणिमहेश यात्रा का परिचय

मणिमहेश यात्रा चंबा जिले के हड़सर से मणिमहेश झील तक पैदल की जाती है। यह करीब 13 किलोमीटर लंबा कठिन ट्रेक है, जिसकी ऊँचाई समुद्र तल से 14,500 फीट है। यात्रा जन्माष्टमी से शुरू होकर राधा अष्टमी पर शाही स्नान के साथ समाप्त होती है। यह यात्रा भारत और विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए अमरनाथ यात्रा के बराबर महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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