रिटायरमेंट से महज 28 दिन पहले थमीं उत्तराखंड के वीर जवान महेंद्र की सांसें, सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

देवभूमि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। कौसानी निवासी और डिफेंस सिक्योरिटी कोर (DSC) में तैनात जवान महेंद्र सिंह का सेवानिवृत्ति (Retirement) से ठीक 28 दिन पहले निधन हो गया। दो दिन बाद उन्हें छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर वापस लौटना था, लेकिन उससे पहले ही इस दुखद हादसे ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।

​अचानक सीने में उठा दर्द, अस्पताल पहुंचने से पहले हो गया निधन

​मिली जानकारी के अनुसार, बागेश्वर जिले के कौसानी स्टेट निवासी 56 वर्षीय महेंद्र सिंह पुत्र खड़क सिंह देहरादून में डिफेंस सिक्योरिटी कोर (DSC) में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वह हाल ही में छुट्टियों पर अपने घर कौसानी आए हुए थे।
​शनिवार की रात अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा। तबीयत बिगड़ते देख परिजन उन्हें आनन-फानन में नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ लेकर पहुंचे। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद महेंद्र सिंह को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई।

​ सरयू-गोमती संगम तट पर दी गई भावभीनी अंतिम विदाई

​रविवार को पोस्टमार्टम के बाद जवान का पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटा जवान का शव उनके पैतृक निवास पहुंचा, पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।


​देर शाम सरयू-गोमती के पवित्र संगम तट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। कौसानी से पहुंची सिग्नल कोर की सैन्य टुकड़ी ने अपने जांबाज साथी को अंतिम सलामी (Guard of Honour) दी। इसके बाद जवान के पुत्रों—विशाल और विक्रम ने नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान स्थानीय प्रशासन, पुलिस और भारी संख्या में ग्रामीण वीर जवान को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

​ 28 दिन बाद 30 अगस्त को होना था रिटायरमेंट

​इस दुखद घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि सैनिक महेंद्र सिंह अपनी लंबी और निष्ठावान सेवा के बाद सेवानिवृत्त (Retire) होने वाले थे।

• ​रिटायरमेंट की तारीख: 30 अगस्त
• ​ड्यूटी पर वापसी: 2 दिन बाद उन्हें देहरादून स्थित अपनी यूनिट में रिपोर्ट करना था।

​परिवार और रिश्तेदार 30 अगस्त को उनके सुरक्षित और ससम्मान घर लौटने और उनके रिटायरमेंट के जश्न की तैयारियों का सपना देख रहे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज 28 दिन पहले आई इस खबर ने पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

​ पुलिस और डॉक्टरों का बयान: हार्ट अटैक की आशंका

​मामले की जानकारी देते हुए थानाध्यक्ष कैलाश नेगी ने बताया कि शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए मौत का प्राथमिक कारण हार्ट अटैक (हृदयघात) प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने नियमानुसार पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया था। मौत के सटीक और वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
​उत्तराखंड ने एक बार फिर अपने एक समर्पित और निष्ठावान सैनिक को खो दिया है, जिसकी कमी उनके परिवार और पूरे कौसानी क्षेत्र को हमेशा खलेगी।

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