​जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में नाम पूछकर दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या: 9 दिनों में दूसरा बड़ा आतंकी हमला, TRF ने ली जिम्मेदारी

श्रीनगर / कुलगाम:

​जम्मू-कश्मीर के दक्षिण कश्मीर इलाके से एक बार फिर कायराना आतंकी हमले की दर्दनाक खबर सामने आई है। आतंकवादियों ने कुलगाम जिले में ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले छत्तीसगढ़ के दो निर्दोष गैर-स्थानीय श्रमिकों की नाम पूछकर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर हत्या कर दी। इस जघन्य वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। घाटी में बीते नौ दिनों के भीतर यह दूसरा लक्षित हमला (टारगेट किलिंग) है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​वारदात की पूरी कहानी: नाम पूछा और नजदीक से दाग दीं गोलियां

​मिली जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक घटना शुक्रवार रात करीब 8:15 बजे कुलगाम के केलम इलाके स्थित ‘ईंट भट्ठा-77’ पर घटी। वहां काम करने वाले छत्तीसगढ़ निवासी दो मजदूर काम खत्म करके पास ही में स्थित अपने किराए के मकान की तरफ जाने की तैयारी में थे।
​अचानक दो हथियारबंद आतंकवादी भट्ठे पर आ धमके। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, आतंकियों ने बेहद क्रूरता का परिचय देते हुए दोनों श्रमिकों से पहले उनका नाम और पहचान पूछी। जैसे ही श्रमिकों ने अपनी पहचान बताई, आतंकियों ने बिना किसी झिझक के बेहद करीब से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

• ​दीपक रातरे (24 वर्ष): पिता उमा शंकर, निवासी छत्तीसगढ़ — गोलियां सीधी छाती में लगीं।
• ​भूपेंद्र (28 वर्ष): पिता दशरथ, निवासी छत्तीसगढ़ — गोलियां पेट में लगीं।

​दोनों मजदूर खून से लथपथ होकर वहीं जमीन पर गिर पड़े। आतंकियों ने उन्हें मृत समझ लिया और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

​अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों ने तोड़ा दम

​आतंकियों के भागने के तुरंत बाद भट्ठे पर मौजूद अन्य साथियों और स्थानीय नागरिकों ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने तुरंत दोनों खून से लथपथ घायलों को पास के अनंतनाग स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अस्पताल पहुँचाया।
​चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद 24 वर्षीय दीपक रातरे को मृत घोषित कर दिया, क्योंकि गोली उनके दिल के पास लगी थी। वहीं 28 वर्षीय भूपेंद्र की हालत गंभीर बनी हुई थी, जिसके चलते उन्हें देर रात प्राथमिक उपचार के बाद श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) रेफर किया गया। हालांकि, डॉक्टरों के भरसक प्रयासों के बावजूद देर रात भूपेंद्र ने भी ज़ख्मों का ताब न सहते हुए दम तोड़ दिया।

​TRF ने ली ज़िम्मेदारी, दी और हमलों की धमकी

​इस नृशंस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तय्यबा के मुखौटा संगठन ‘द रजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली है। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में संगठन ने न केवल इस हमले का जिम्मा उठाया, बल्कि आने वाले दिनों में गैर-स्थानीय लोगों और बाहरी श्रमिकों को निशाना बनाते हुए ऐसे और भी हमले करने की धमकी दी है।
​हमले की खबर मिलते ही भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टुकड़ियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है। आतंकवादियों की तलाश में जंगलों और आसपास के रिहायशी इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान (Cordon and Search Operation) चलाया जा रहा है।

​9 दिनों में दूसरा बड़ा हमला: पहलगाम की यादें ताजा

​घाटी में गैर-स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाए जाने की यह कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन हालिया दिनों में इसमें तेजी देखी गई है:

1. ​22 जुलाई का हमला: इससे ठीक नौ दिन पहले 22 जुलाई को आतंकवादियों ने अनंतनाग के व्यस्त लाल चौक इलाके में श्रीअमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
2. ​पहलगाम हमला: पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, इस साल यह अपनी तरह का दूसरा सबसे बड़ा और लक्षित हमला माना जा रहा है।

​लगातार हो रहे इन हमलों से यह स्पष्ट है कि आतंकवादी घाटी में शांति व्यवस्था को भंग करने और स्थानीय व बाहरी लोगों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा करने की साजिश रच रहे हैं।

​मजदूरी कर परिवार पालने आए थे दीपक और भूपेंद्र

​छत्तीसगढ़ के बेहद गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले दीपक और भूपेंद्र अपने-अपने घरों के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। वे हर साल की तरह इस साल भी रोजी-रोटी की तलाश में कश्मीर के ईंट-भट्ठों पर मजदूरी करने आए थे। उन्हें क्या मालूम था कि जिस धरती पर वे अपना पसीना बहाकर अपने बच्चों और परिवार का पेट पालने का सपना देख रहे हैं, वहीं आतंकवादियों की गोलियाँ उनके सीने को छलनी कर देंगी।


​इस घटना के बाद से ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले अन्य गैर-स्थानीय मजदूरों में भारी खौफ व्याप्त है। कई मजदूर सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं, तो कई वापस अपने गृह राज्यों की ओर लौटने का विचार कर रहे हैं।

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​सुरक्षाबलों का सख्त रुख

​जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने इस जघन्य अपराध पर कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निर्दोष और निहत्थे नागरिकों पर हमला करना आतंकियों की हताशा को दर्शाता है। हमले में शामिल आतंकियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें अंजाम तक पहुँचाया जाएगा। क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं ताकि अन्य संवेदनशील इलाकों में काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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