CNG Price Hike: दिल्ली में CNG की कीमत बढ़ने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने CNG Price Hike को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब कई दूसरे राज्यों में ऐसी बढ़ोतरी नहीं हुई, तो दिल्ली के लोगों पर ही अतिरिक्त बोझ क्यों डाला गया?
दिल्ली में CNG के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है। इसके बाद कीमत बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो रोजाना ऑटो, टैक्सी या CNG वाहनों से सफर करते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इस बढ़ोतरी को आम लोगों के लिए चिंता का विषय बताया। उनका कहना है कि पहले से महंगाई का सामना कर रहे परिवारों के खर्च पर इसका अतिरिक्त असर पड़ेगा।
CNG Price Hike पर कांग्रेस का सरकार से सवाल
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में CNG की कीमत बढ़ाने का फैसला ऐसे समय हुआ है जब आम आदमी पहले ही बढ़ती कीमतों से परेशान है। उनके मुताबिक, CNG के दाम बढ़ने से केवल निजी वाहन मालिक ही प्रभावित नहीं होंगे। ऑटो और टैक्सी चालक भी इसका असर महसूस करेंगे। ईंधन की लागत बढ़ने पर उनके दैनिक खर्च में इजाफा होगा। इसका असर आगे चलकर यात्रियों से लिए जाने वाले किराये पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि दिल्ली में ही CNG की कीमत बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी। पार्टी का कहना है कि सरकार को आम जनता के हित में इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
ऑटो-टैक्सी चालकों पर बढ़ सकता है दबाव
CNG का इस्तेमाल दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में बड़ी संख्या में होता है। खासकर ऑटो और टैक्सी चालक लंबे समय से CNG वाहनों का इस्तेमाल करते रहे हैं। ईंधन की कीमत बढ़ने का सीधा असर उनके दैनिक कारोबार पर पड़ता है। अगर वाहन चलाने की लागत बढ़ती है तो कमाई और बचत के बीच का अंतर भी कम हो सकता है। कांग्रेस का तर्क है कि इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि परिवहन लागत बढ़ती है, तो आम यात्रियों को भी अधिक किराया देना पड़ सकता है। इसी वजह से पार्टी ने सरकार से CNG की बढ़ी कीमत वापस लेने की मांग की है।
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दिल्ली की पुरानी CNG नीति का जिक्र
देवेंद्र यादव ने दिल्ली में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय सार्वजनिक परिवहन को CNG आधारित बनाने पर जोर दिया गया था। इस नीति के पीछे प्रदूषण कम करने का उद्देश्य भी था। दिल्ली में प्रदूषण लंबे समय से बड़ी समस्या रहा है। ऐसे में CNG को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया गया। कांग्रेस का कहना है कि उस समय सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण और जनहित दोनों से जोड़कर देखा गया था। पार्टी अब इसी आधार पर सरकार से सवाल कर रही है कि CNG की कीमत बढ़ने से आम यात्रियों और चालकों पर पड़ने वाले असर को कैसे कम किया जाएगा।
CNG Price Hike से मध्यम वर्ग पर असर
CNG की बढ़ी कीमत का असर मध्यम वर्ग के परिवारों पर भी पड़ सकता है। जिन लोगों के पास CNG वाहन हैं, उनके मासिक ईंधन खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा रोजाना ऑटो या टैक्सी से यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी परिवहन महंगा होने की आशंका रहती है। हालांकि किराये में वास्तविक बदलाव अलग-अलग सेवाओं और ऑपरेटरों के फैसलों पर निर्भर करेगा। कांग्रेस ने सरकार से कहा है कि महंगाई के इस दौर में ऐसे फैसलों से आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। पार्टी ने राहत के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
सरकार से कीमत वापस लेने की मांग
कांग्रेस ने CNG Price Hike को वापस लेने की मांग की है। देवेंद्र यादव ने कहा कि 3.89 रुपये प्रति किलो की वृद्धि आम जनता के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। उनका कहना है कि सरकार को बढ़ी कीमत पर पुनर्विचार करना चाहिए। साथ ही सार्वजनिक परिवहन के किराये को नियंत्रण में रखने के प्रयास होने चाहिए। कांग्रेस ने महंगाई से राहत देने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे लोगों के रोजमर्रा के बजट पर पड़ता है।
अब सरकार के जवाब पर नजर
दिल्ली में CNG की कीमत बढ़ने के बाद मामला केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहा है। विपक्ष ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस लगातार सरकार से इस बढ़ोतरी का कारण स्पष्ट करने और इसे वापस लेने की मांग कर रही है। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आने वाला जवाब महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल दिल्ली के ऑटो-टैक्सी चालकों और CNG वाहन मालिकों की नजर आगे के घटनाक्रम पर है। अगर कीमतों में राहत नहीं मिलती है, तो CNG Price Hike का मुद्दा आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।









