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Diet Coke Price Hike: ईरान संघर्ष का असर भारत में, डाइट कोक हुई महंगी, जानिए क्यों बढ़े दाम

On: July 24, 2026 3:56 PM
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Diet Coke Price Hike: Impact of Iran conflict felt in India; Diet Coke gets costlier—find out why prices rose.

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के उपभोक्ता बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावट के कारण Diet Coke Price Hike ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है जो नियमित रूप से डाइट कोक का सेवन करते हैं। एल्युमिनियम कैन की उपलब्धता प्रभावित होने से कोका-कोला ने भारतीय बाजार में डाइट कोक के नए पैक लॉन्च किए हैं, जिनकी कीमत पहले की तुलना में अधिक है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इस बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन बाजार में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट में संकट बना सप्लाई चेन की सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत सहित कई एशियाई देशों तक एल्युमिनियम कैन और उससे जुड़े कच्चे माल की आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट है। हाल के महीनों में ईरान और क्षेत्रीय तनाव के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा और एल्युमिनियम कैन की उपलब्धता कम हो गई।

स्थिति को संभालने के लिए कंपनियों को दक्षिण-पूर्व एशिया सहित अन्य देशों से बड़े आकार के कैन मंगाने पड़े। इनकी लागत पहले की तुलना में अधिक है, जिसका सीधा असर Diet Coke Price Hike के रूप में उपभोक्ताओं पर पड़ा है।

300 मिली की जगह अब 330 मिली का कैन

पहले भारतीय बाजार में डाइट कोक का 300 मिलीलीटर एल्युमिनियम कैन लगभग 40 रुपये में उपलब्ध था। लेकिन छोटे कैन की कमी के कारण अब कई स्थानों पर 330 मिलीलीटर का नया कैन 50 रुपये में बेचा जा रहा है।

पहली नजर में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त मात्रा मिलने का एहसास हो सकता है, लेकिन यदि प्रति मिलीलीटर कीमत का हिसाब लगाया जाए तो वास्तविक लागत पहले से अधिक हो गई है। यही वजह है कि बाजार विशेषज्ञ इसे Diet Coke Price Hike का स्पष्ट उदाहरण मान रहे हैं।

कांच की बोतल में भी उपलब्ध कराया जा रहा है डाइट कोक

बाजार में डाइट कोक की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कंपनी के एक बॉटलिंग पार्टनर ने सीमित स्तर पर 200 मिलीलीटर की कांच की बोतल में भी इसकी बिक्री शुरू की है। हालांकि इसकी कीमत विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हो सकती है और कई जगह यह कैन के मुकाबले महंगी बताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सप्लाई संकट के दौरान उपभोक्ताओं को उत्पाद उपलब्ध कराने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि बाजार में डाइट कोक की मौजूदगी बनी रहे।

भारत में लगातार बढ़ रही है डाइट कोक की मांग

भारत दुनिया के उन बड़े बाजारों में शामिल हो चुका है जहां शुगर-फ्री और लो-कैलोरी पेय पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा, फिटनेस प्रेमी और डायबिटीज के जोखिम को लेकर सतर्क उपभोक्ता बड़ी संख्या में डाइट ड्रिंक्स की ओर रुख कर रहे हैं।

इसी वजह से Diet Coke Price Hike का असर केवल कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव उन लाखों ग्राहकों पर भी पड़ रहा है जो इसे अपनी नियमित लाइफस्टाइल का हिस्सा बना चुके हैं।

कोक जीरो पर फिलहाल नहीं पड़ा बड़ा असर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कोका-कोला का दूसरा शुगर-फ्री ब्रांड कोक जीरो फिलहाल इस संकट से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कोक जीरो प्लास्टिक बोतलों और एल्युमिनियम कैन दोनों पैकेजिंग में उपलब्ध है।

इसके विपरीत डाइट कोक की बिक्री मुख्य रूप से एल्युमिनियम कैन पर निर्भर करती है। ऐसे में कैन की कमी का सबसे अधिक असर इसी उत्पाद पर देखने को मिल रहा है।

डाइट कोक की कमी से कारोबार के नए अवसर भी बने

बाजार में डाइट कोक की सीमित उपलब्धता ने कुछ व्यवसायों के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं। पिछले कुछ महीनों में कई शहरों में पब, कैफे और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने विशेष “डाइट कोक थीम” वाले कार्यक्रम आयोजित किए, जहां ग्राहकों को अलग अनुभव देने के लिए प्रवेश शुल्क तक लिया गया।

हालांकि यह ट्रेंड सीमित क्षेत्रों तक ही देखा गया, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया कि लोकप्रिय उपभोक्ता उत्पादों की कमी भी नए व्यावसायिक मॉडल को जन्म दे सकती है।

क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और वैश्विक सप्लाई चेन सामान्य नहीं होती, तो आने वाले समय में पेय पदार्थ उद्योग की लागत और बढ़ सकती है। इसका असर केवल डाइट कोक ही नहीं बल्कि अन्य आयात-निर्भर उत्पादों पर भी देखने को मिल सकता है।

हालांकि यदि समुद्री मार्ग सामान्य हो जाते हैं और एल्युमिनियम कैन की सप्लाई पहले जैसी होने लगती है, तो कंपनियां भविष्य में कीमतों को स्थिर रखने या पैकेजिंग विकल्पों में बदलाव करने पर विचार कर सकती हैं।

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