अहमदाबाद / ग्लास्गो:
स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में 11 दिनों तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का एक शानदार और रंगारंग समापन समारोह के साथ समापन हो गया। इस समापन समारोह में भारत के लिए एक नया और ऐतिहासिक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जब स्कॉटलैंड ने आधिकारिक तौर पर राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज और बैटन भारत को सौंप दिया। वर्ष 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं, और इस ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण की मेजबानी का जिम्मा भारत के गुजरात राज्य स्थित अहमदाबाद शहर को मिला है।
इस हस्तांतरण के साथ ही भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद दुनिया का ऐसा दूसरा देश बन जाएगा जिसने एक से अधिक बार इन प्रतिष्ठित खेलों की मेजबानी की है। इससे पहले भारत ने साल 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का बेहद सफल और भव्य आयोजन किया था।
समापन समारोह में दिखा भारतीय संस्कृति का जादुई रंग
ग्लास्गो में आयोजित क्लोजिंग सेरेमनी (समापन समारोह) में जैसे ही भारतीय दल ने कदम रखा, पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। समापन समारोह में भारतीय मुक्केबाज़ और स्वर्ण पदक विजेता जैस्मिन लंबोरिया ने भारत की ध्वजवाहक के रूप में अगुवाई की।
ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय के प्रतिनिधि और ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग ‘प्रिंस एडवर्ड’ ने आधिकारिक तौर पर ग्लास्गो 2026 खेलों के समापन की घोषणा की। इसके बाद राष्ट्रमंडल खेलों के ध्वज को सम्मानपूर्वक उतारकर एक औपचारिक यात्रा के साथ भारत की प्रतिनिधिमंडली को सौंपा गया।
ध्वज सौंपने की यह प्रक्रिया बेहद खास रही। ग्लास्गो की लॉर्ड प्रोवोस्ट जैकलीन मैकलारेन ने ध्वज को कॉमनवेल्थ स्पोर्ट के अध्यक्ष डॉ. डोनाल्ड रुकारे, दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी को सौंपा।
ध्वज के सौंपे जाने के साथ ही राष्ट्रमंडल खेलों का कारवां अब आधिकारिक तौर पर भारत की ओर बढ़ चुका है।
2030 अहमदाबाद गेम्स: परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम
ध्वज हस्तांतरण के बाद समापन समारोह पूरी तरह से भारतीय रंग-रूप और लोक संस्कृति के जश्न में डूब गया। भारत की ओर से प्रस्तुत किए गए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय दर्शन, समृद्ध लोक परंपराओं और तेजी से बदलते ‘आधुनिक भारत’ की एक भव्य झलक पेश की गई।
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय और स्कॉटिश कलाकारों की संयुक्त प्रस्तुति रही, जिसने दोनों देशों के बीच की सांस्कृतिक साझेदारी और खेल भावना को एक नया आयाम दिया। अपनी इस प्रस्तुति के जरिए भारत ने पूरी दुनिया के एथलीटों और खेल प्रेमियों को 2030 में अहमदाबाद आने का भव्य निमंत्रण दिया।
यह प्रस्तुति सिर्फ जिम्मेदारी का हस्तांतरण नहीं थी, बल्कि राष्ट्रमंडल खेलों के 100वें साल को अविस्मरणीय बनाने के विज़न की एक झलक भी थी।
ग्लास्गो 2026 में भारतीय एथलीटों का दबदबा
अहमदाबाद को मेजबानी मिलने की खुशी के साथ-साथ, ग्लास्गो 2026 का सफर भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के लिए भी याद किया जाएगा। 11 दिनों के इस खेल महाकुंभ में भारतीय दल ने कुल 39 पदक अपने नाम किए और मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया।
भारतीय दल का पदक तालिका में प्रदर्शन:
पदक का प्रकार
संख्या
स्वर्ण (Gold)
13
रजत (Silver)
17
कांस्य (Bronze)
09
कुल (Total)
39
भारत के लिए क्यों खास है 2030 का आयोजन?
एक नज़र में प्रमुख तथ्य:
▪ 100 साल का इतिहास: 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों के 100 साल (1930 – 2030) पूरे हो रहे हैं।
▪ ऐतिहासिक शहर: अहमदाबाद इस ऐतिहासिक ‘सेंचरी एडिशन’ की मेजबानी करेगा।
▪ वैश्विक खेल केंद्र: इस आयोजन से गुजरात और अहमदाबाद को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी।
2030 में होने वाले ये खेल न केवल भारत की खेल क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि देश में विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भी एक नई दिशा देंगे। नई दिल्ली 2010 के बाद, अहमदाबाद 2030 देश में खेल पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को एक बड़ा बढ़ावा देगा। भारत अब 2030 के इस ऐतिहासिक खेल उत्सव का स्वागत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।