अल्मोड़ा:
उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा क्षेत्र से एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहाँ सोमवार दोपहर एक मारुति अल्टो कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी।
इस दर्दनाक हादसे में कार सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में कोहराम मचा हुआ है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दोपहर के वक्त अचानक हुआ हादसा
मिली जानकारी के मुताबिक, यह भीषण दुर्घटना अल्मोड़ा जिले के चायखान-बेगानिया मार्ग पर सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे (2:30 PM) घटित हुई। मारुति अल्टो कार (पंजीकरण संख्या: UK 04 Z-5819) में सवार होकर छह लोग अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। जैसे ही कार लमगड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बलिया गांव के समीप पहुँची, अचानक चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा।
ढलान और संकरा रास्ता होने के कारण कार सीधे सड़क से नीचे कई सौ फीट गहरी खाई में जा गिरी। कार के खाई में गिरते ही उसमें चीख-पुकार मच गई। दुर्घटना इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और चार लोगों ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
रेस्क्यू ऑपरेशन और ग्रामीणों की मदद
हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के खेतों और घरों में मौजूद स्थानीय ग्रामीण तुरंत घटना स्थल की ओर दौड़े। खाई गहरी होने के कारण नीचे उतरना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए राहत कार्य शुरू किया। इसी बीच लमगड़ा थाना पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही लमगड़ा थाना पुलिस की टीम दलबल और रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुँची। स्थानीय नागरिकों और पुलिस बल ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर काफी मशक्कत के बाद घायलों और शवों को खाई से बाहर निकाला।
मृतकों की पहचान: एक ही गांव के थे चारों लोग
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वाले चारों व्यक्ति एक ही गांव (ग्राम बलिया) के निवासी थे, जिससे पूरे गांव में मातम पसर गया है। मृतकों की पहचान निम्नलिखित रूप में की गई है:
- राजेंद्र सिंह बेलवाल (40 वर्ष), पुत्र नारायण सिंह बेलवाल
- जगदीश सिंह (35 वर्ष), पुत्र लक्ष्मण सिंह
- लछम सिंह (56 वर्ष), पुत्र प्रताप सिंह
- पान सिंह (50 वर्ष), पुत्र बिशन सिंह
एक ही गांव के चार कमाने वाले सदस्यों की असमय मौत से बलिया गांव के चूल्हे तक नहीं जले हैं। हर तरफ सिर्फ चीखें और सन्नाटा पसरा हुआ है।
नियति का क्रूर खेल: पिता की मौत, बेटा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा
- इस सड़क हादसे की एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली कहानी भी सामने आई है। मृतकों में शामिल 40 वर्षीय राजेंद्र सिंह बेलवाल का 18 वर्षीय बेटा सचिन बेलवाल भी उसी अभागे वाहन में सवार था। जहाँ एक तरफ पिता राजेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं उनका युवा बेटा सचिन इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया है।
- सचिन के अलावा कार में सवार एक अन्य ग्रामीण गोपाल सिंह (45 वर्ष), पुत्र खीम सिंह भी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। दोनों घायलों को बेहद नाजुक हालत में खाई से बाहर निकाला गया।
प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर
- दुर्घटना स्थल से रेस्क्यू करने के बाद दोनों गंभीर घायलों (सचिन और गोपाल सिंह) को तत्काल एम्बुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लमगड़ा ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन आंतरिक चोटें अधिक होने और उनकी बेहद नाजुक व चिंताजनक स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत जिला अस्पताल अल्मोड़ा (हायर सेंटर) के लिए रेफर कर दिया। फिलहाल हायर सेंटर में दोनों घायलों का उपचार जारी है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
- पुलिस जांच में जुटी: तकनीकी खराबी या मानवीय भूल?
- हादसे के बाद लमगड़ा थाना पुलिस ने चारों मृतकों के शवों को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत पंचनामा भरने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
- प्रारंभिक जांच में दुर्घटना के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, पुलिस अधिकारी हर पहलू से मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि:
- क्या वाहन में कोई अचानक तकनीकी खराबी (जैसे ब्रेक फेल होना या स्टीयरिंग लॉक होना) आई थी?
- या फिर यह हादसा पहाड़ी रास्तों पर तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग के कारण हुआ? इन सभी बिंदुओं पर बारीकी से तफ्तीश की जा रही है। पोस्टमार्टम और घायलों के बयान दर्ज होने के बाद ही असली वजह सामने आ पाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion) और चेतावनी
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार होते ये सड़क हादसे इस बात का संकेत हैं कि घुमावदार रास्तों पर जरा सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अल्मोड़ा का यह हादसा बेहद दुखद है, जिसने कई परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। प्रशासन और परिवहन विभाग को ऐसे डेंजर ज़ोन (Danger Zones) पर क्रैश बैरियर लगाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।








