ED Raid Harish Rawat: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत एक बार फिर सियासी सुर्खियों में हैं। उनके पूर्व ओएसडी और पीए रह चुके चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की छापेमारी के बाद रावत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई सवाल उठाए। उन्होंने जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर अपनी बात खुलकर रखी और इसके लिए सीधे तौर पर किसी पार्टी का नाम लिए बिना बीजेपी पर निशाना साधा।
बताया गया है कि चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर यह कार्रवाई UKSSSC भर्ती परीक्षा मामले से जुड़ी जांच के सिलसिले में की गई। छापेमारी के दौरान करीब 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, लगभग 200.5 ग्राम सोने के सिक्के और चेन तथा 12 लग्जरी घड़ियां बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद हरीश रावत के पार्टी के कुछ संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की चर्चा भी तेज हुई।
अब रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले को लेकर अपनी स्थिति साफ की और कहा कि वह किसी भी तरह की जांच से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
‘जहां कहते हो, वहां बैठ जाता हूं’, हर जांच के लिए तैयार बोले रावत
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरीश रावत ने कहा कि जांच एजेंसियां अगर उनसे पूछताछ करना चाहती हैं तो वह तैयार हैं। उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि जहां उन्हें बैठने के लिए कहा जाएगा, वह वहां बैठ जाएंगे और CBI, ED या Income Tax जैसी किसी भी एजेंसी की जांच का सामना करने को तैयार हैं।
रावत का यह बयान उस समय आया है जब ED Raid Harish Rawat को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी घोषित संपत्तियों से अलग अगर किसी तरह की जांच करनी है तो की जा सकती है। उनका दावा है कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कोई गलत काम नहीं किया।
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बीजेपी का नाम लिए बिना लगाए गंभीर आरोप
हरीश रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी का सीधे नाम लेने से परहेज किया, लेकिन उनके निशाने पर साफ तौर पर सत्तारूढ़ पक्ष नजर आया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के पास कई तरह के ‘हथियार’ हैं और उनमें ED, CBI जैसी जांच एजेंसियों के साथ-साथ स्टिंग करने वाले लोग भी शामिल हैं।
रावत ने कहा कि जिसके पास जितने हथियार हैं, वह उनका इस्तेमाल कर सकता है। उनके मुताबिक, जांच एजेंसियों की कार्रवाई को जिस तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे लेकर राजनीतिक सवाल उठना स्वाभाविक है।
उनके इस बयान के बाद ED Raid Harish Rawat मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है।
चुनाव से पहले कार्रवाई की टाइमिंग पर क्यों उठाया सवाल?
उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में हरीश रावत ने ED की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कांग्रेस लगातार राज्य सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठा रही है और ऐसे समय में जांच एजेंसी की कार्रवाई से राजनीतिक नैरेटिव प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।
रावत ने दावा किया कि कांग्रेस जिस तरह से भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रही है, उससे ध्यान हटाने के लिए यह कार्रवाई की गई हो सकती है। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और जांच एजेंसी की कार्रवाई के पीछे वास्तविक कारण जांच के आधिकारिक निष्कर्षों से ही स्पष्ट होंगे।
पदों से इस्तीफा देने के फैसले पर भी दी सफाई
छापेमारी के बाद हरीश रावत के कांग्रेस संगठन के कुछ पदों से इस्तीफा देने की खबरों ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी थी। अब रावत ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को अपने निर्णय की जानकारी दे दी है।
उनका कहना है कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया ताकि चंदन सिंह जीना से जुड़ी कार्रवाई का असर कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे राजनीतिक संघर्ष पर न पड़े। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी की मुहिम कमजोर हो।
रावत के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपने फैसले के बारे में मौखिक रूप से बता दिया है और पत्र भी भेजा जाएगा।
‘मैं सच और अपने उसूलों के लिए लड़ता रहूंगा’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरीश रावत ने अपने राजनीतिक तेवर भी साफ किए। उन्होंने कहा कि जब तक उनमें ताकत है, वह सच, अपने सिद्धांतों और उत्तराखंड के हित के लिए लड़ते रहेंगे।
रावत ने कहा कि किसी जांच या कार्रवाई से वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर किसी के पास भर्ती मामलों में उनकी संलिप्तता या किसी तरह की गड़बड़ी का प्रमाण है तो वह उसे ED या CBI के सामने पेश करे।
इस बयान के जरिए रावत ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह जांच को लेकर आशंकित नहीं हैं और किसी भी ठोस सबूत की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं।
‘यह चंदन सिंह जीना का मामला है’, रावत की सफाई
हरीश रावत ने यह भी कहा कि फिलहाल जो कार्रवाई हुई है, उसका सीधा संबंध चंदन सिंह जीना से है। उन्होंने स्वीकार किया कि जीना उनके साथ जुड़े रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस कार्रवाई का संकेत या संदेश उनसे जोड़कर देखा जा रहा है।
यही बिंदु ED Raid Harish Rawat को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना रहा है। एक तरफ जांच एक पूर्व सहयोगी से जुड़े मामले के रूप में सामने आई है, वहीं दूसरी तरफ रावत इसे अपने और कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं।
भर्ती घोटाले और राजनीतिक आरोपों के बीच बढ़ी गर्मी
उत्तराखंड में भर्ती से जुड़े विवाद पिछले कुछ समय से राजनीति के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में किसी पूर्व राजनीतिक सहयोगी के यहां जांच की कार्रवाई का असर सीधे राजनीतिक विमर्श पर पड़ना तय है।
हरीश रावत ने मांग की कि अगर कोई आरोप है तो जांच तेजी से पूरी हो और मामले की सच्चाई सामने आए। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे को लंबा खींचने के बजाय एक बार में पूरी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
उनके अनुसार, लगातार कार्रवाई और उससे जुड़ी खबरों की प्रस्तुति एक तरह का ‘मीडिया ट्रायल’ बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल खबरों और आरोपों के आधार पर किसी की छवि तय नहीं की जानी चाहिए।
कांग्रेस के लिए क्या मायने रखता है यह विवाद?
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में ED Raid Harish Rawat जैसी खबरें पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी असर डाल सकती हैं। अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस भ्रष्टाचार और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है।
रावत पर केंद्रित यह विवाद पार्टी के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है। एक तरफ उसे राजनीतिक हमले का जवाब देना होगा, तो दूसरी तरफ संगठन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जांच से जुड़े विवाद चुनावी अभियान की दिशा पर हावी न हो जाएं।
बीजेपी के खिलाफ रावत का हमला, लेकिन जांच का फैसला क्या बताएगा?
हरीश रावत ने साफ तौर पर कार्रवाई की टाइमिंग और राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ, किसी भी जांच का अंतिम निष्कर्ष सबूत और आधिकारिक जांच प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा। इसलिए फिलहाल इस मामले में आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं अलग-अलग स्तर पर चल रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है कि जांच करनी है तो पूरी तरह की जाए और सच सामने लाया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि ED की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है, चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में क्या और तथ्य सामने आते हैं और इस पूरे घटनाक्रम का उत्तराखंड की चुनावी राजनीति पर कितना असर पड़ता है। ED Raid Harish Rawat विवाद ने फिलहाल कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी को और तेज जरूर कर दिया है।








