Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Speech के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ मामले को उठाकर संसद का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपनी दलित पृष्ठभूमि और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए संसद में इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। इस पूरे विवाद के बाद उत्तराखंड की राजनीति से लेकर देश की सबसे बड़ी पंचायत राज्यसभा तक बहस छिड़ गई है।
Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Speech & Haldwani Rally: क्या था पूरा मामला?
हाल ही में उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी की ‘विजय शंखनाद रैली’ का आयोजन किया गया था। इस जनसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे।
रैली के दो दिन बाद 10 अगस्त को ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ नामक संगठन के कार्यकर्ता रामलीला मैदान पहुंचे। संगठन के लोगों ने मैदान में हवन किया और गंगाजल का छिड़काव किया। उनका दावा था कि यह मैदान सनातन परंपराओं से जुड़ा पवित्र स्थल है और रैली के दौरान इसकी मर्यादा प्रभावित हुई थी। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चूंकि रैली में शामिल प्रमुख नेता अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए जानबूझकर इस तरह का सांकेतिक कार्य कर दलित समाज का अपमान करने का प्रयास किया गया।
Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Speech Highlights: खरगे ने राज्यसभा में क्या कहा?
गुरुवार को संसद सत्र के दौरान Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Speech देते हुए बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा:
”मैं हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने गया था। मैंने अपने भाषण में केवल सरकार से जुड़े जनकल्याणकारी मुद्दों को उठाया था। लेकिन मेरे जाने के बाद भाजपा समर्थित सोच के लोगों ने उस मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए हवन किया। क्या लोकतंत्र में ऐसा व्यवहार स्वीकार्य है? मैं वर्षों से इस सदन का सदस्य रहा हूं और अनुसूचित जाति से आता हूं। मैंने कभी किसी से मदद की भीख नहीं मांगी, लेकिन क्या विपक्ष के नेता के साथ ऐसा व्यवहार संविधान की रक्षा है?”
खरगे के इस वक्तव्य के बाद राज्यसभा में माहौल गरमा गया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया।
Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Speech Reaction: यशपाल आर्य ने उठाए गंभीर सवाल
उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भूमि हमेशा से सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतीक रही है।
- सामाजिक समरसता पर चोट: यशपाल आर्य के अनुसार, सार्वजनिक स्थल किसी एक जाति, वर्ग या राजनीतिक दल के नहीं होते। किसी जनसभा के बाद मैदान को गंगाजल से ‘शुद्ध’ करना छुआछूत और ऊंच-नीच जैसी पुरानी कुरीतियों को बढ़ावा देने वाली मानसिकता को दर्शाता है।
- संविधान और बराबरी का अपमान: उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे देश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं। उनके भाषण के बाद इस तरह का कृत्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा स्थापित सामाजिक बराबरी की भावना का सीधा अपमान है।
- भाजपा से जवाब की मांग: यशपाल आर्य ने सवाल उठाया कि क्या सत्तारूढ़ दल इस तरह की सोच का समर्थन करता है? उन्होंने मांग की कि राजनीतिक वैचारिक मतभेदों का मुकाबला विचारों से होना चाहिए, न कि किसी नेता की सामाजिक पृष्ठभूमि या जाति को निशाना बनाकर।
Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Speech Controversies: रैली के दौरान भी हुआ था हंगामा
हल्द्वानी में आयोजित यह विजय शंखनाद रैली शुरुआत से ही विवादों में रही थी।
- एसएसपी कार्यालय पर धरना: रैली के दिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गाड़ियों को पुलिस चेकिंग के नाम पर रोकने का आरोप लगा था। इसके विरोध में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और यशपाल आर्य कार्यकर्ताओं के साथ एसएसपी दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
- भाजपा के आरोप: दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि रैली के दौरान माहौल बिगाड़ने और विशेष समुदाय के समर्थन में नारेबाजी करने की कोशिश की गई थी, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी थी।
Mallikarjun Kharge Rajya Sabha Speech Impact: सामाजिक समरसता और संवैधानिक अधिकार
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर देश में जातिगत भेदभाव, राजनीतिक नैतिकता और संवैधानिक मर्यादाओं पर बहस छेड़ दी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 और 21 हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के सम्मान और समानता के साथ जीने का अधिकार देता है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक रैलियां और सभाएं सामान्य प्रक्रिया हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर सांकेतिक शुद्धिकरण जैसे कृत्य समाज में भाईचारे को कमजोर करते हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जांच के बाद क्या प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।





