देहरादून (डोईवाला):
राजधानी देहरादून से सटे डोईवाला क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। धन्याड़ी (बड़ासी ग्रांट) गांव में सोमवार शाम दूध लेकर अपने घर लौट रही 37 वर्षीय अंजली गुप्ता पर अचानक एक जंगली हाथी ने हमला कर दिया। हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई महिला की देर रात देहरादून के सीएमआई (CMI) अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं दूसरी ओर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
दिन में देखा गया था हाथी, फिर भी बेखबर रहा प्रशासन
ग्रामीणों के अनुसार, घटना वाले दिन (सोमवार) को ही सौड़ा सरोली क्षेत्र के खेतों में इस हाथी की आवाजाही देखी गई थी। सोशल मीडिया पर हाथी की मौजूदगी का वीडियो भी जमकर वायरल हो रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद वन विभाग ने कोई सतर्कता नहीं दिखाई और न ही क्षेत्र में गश्त बढ़ाई, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हो गया।
क्या था मामला?
धन्याड़ी निवासी अंजली गुप्ता (पुत्री विक्रम सिंह मनवाल) सोमवार शाम करीब दूध लेकर अपने घर वापस आ रही थीं। इसी दौरान थानों के जंगल से निकलकर आए हाथी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। गंभीर रूप से घायल अंजली को तुरंत परिजन अस्पताल ले गए, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का लगा जमावड़ा
घटना की सूचना मिलते ही देर रात डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार धीरेंद्र पंवार सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी और घटना की विस्तृत जानकारी ली।
प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ा जनाक्रोश: नहीं लगी सोलर फेंसिंग
ग्रामीणों का कहना है कि थानों, लच्छीवाला और बड़कोट से लगे ग्रामीण इलाकों में हाथियों की आवाजाही अब आम बात हो चुकी है। ग्राम प्रधान राहुल मनवाल ने बताया:
• शिविर में उठाई थी मांग: बीती 15 जनवरी को थानों में लगे बहुउद्देशीय शिविर में डोईवाला एसडीएम और विधायक को सोलर फेंसिंग की मांग का ज्ञापन दिया गया था।
• समय पर नहीं हुई कार्रवाई: यदि समय रहते आबादी वाले क्षेत्रों की घेराबंदी कर सोलर फेंसिंग लगा दी जाती, तो आज अंजली की जान बचाई जा सकती थी।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि केवल घटना होने के बाद जागने के बजाय जंगलों से सटे गांवों में सुरक्षा के स्थायी और ठोस उपाय किए जाएं।









