देहरादून। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसून के कड़े तेवरों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के 13 में से 12 जिलों में अगले 24 घंटों के भीतर कम से मध्यम स्तर के ‘फ्लैश फ्लड’ (अचानक आने वाली बाढ़) का गंभीर जोखिम जताया है। मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद हरकत में आए प्रदेश शासन ने एहतियातन सभी प्रभावित जिलों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।
संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने और आपदा प्रबंधन से जुड़ी तमाम एजेंसियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मैदानी जिले ऊधम सिंह नगर को छोड़ पूरे राज्य पर मंडराया खतरा
मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी किए गए ताजा फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन के अनुसार, केवल मैदानी जिले ऊधम सिंह नगर को छोड़कर राज्य के शेष 12 जिलों—अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल में अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
विभाग ने आगाह किया है कि इन जिलों के प्रमुख जलसंग्रहण (कैचमेंट) क्षेत्रों और उनके आसपास की नदियों तथा पहाड़ी नालों में अचानक पानी का जलस्तर प्रचंड गति से बढ़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी अत्यधिक संतृप्त (Saturated) हो चुकी है, जिससे अब पानी सोखने की क्षमता खत्म हो रही है। ऐसे में बारिश का पानी सीधे धरातल पर बहकर निचले इलाकों में तबाही मचा सकता है।
शासन सख्त: आपदा प्रबंधन सचिव ने जारी किए कड़े निर्देश
मौसम विभाग की चेतावनी की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने राज्य के सभी संबंधित जिलाधिकारियों (DMs) और विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि राज्य का आपदा तंत्र 24 घंटे सतर्क रहे।
“संवेदनशील और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जाए। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और राजस्व टीम को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।”
— विनोद कुमार सुमन, सचिव (आपदा प्रबंधन)
प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे नदियों और नदी-नालों के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए रखें और संवेदनशील बस्तियों में तुरंत लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी जारी करें।
पहाड़ी जलधाराओं में आ सकता है उफान: जलभराव और भूस्खलन की आशंका
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण मैदानी क्षेत्रों में जलभराव (Waterlogging) और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslides) का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में बहने वाले छोटे-छोटे बरसाती नाले और जलधाराएं (Streams) अचानक विकराल रूप ले सकती हैं।
निचले इलाकों में पानी भरने की वजह से आम जनजीवन प्रभावित होने के साथ-साथ प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित हो सकता है। पर्वतीय मार्गों पर चट्टानें गिरने और सड़कें बहने की घटनाएं सामने आ सकती हैं, जिससे संपर्क कटने का खतरा भी बना हुआ है।
नागरिकों और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श (Advisory)
शासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ उत्तराखंड की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और सतर्कता बरतें:
• अनावश्यक यात्रा से बचें: जब तक बहुत आवश्यक न हो, भारी बारिश और खराब मौसम के दौरान यात्रा करने से परहेज करें।
• नदी-नालों से दूर रहें: उफान पर आई नदियों, बरसाती नालों, पुल-पुलियाओं और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास बिल्कुल न जाएं।
• यात्रा से पहले लें जानकारी: पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित जिला प्रशासन या पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से मौसम और सड़कों की स्थिति (Road Conditions) की जानकारी अवश्य लें।
• भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सावधानी: पहाड़ी मार्गों पर वाहन चलाते समय अत्यधिक सावधानी बरतें और ढलान वाले पत्थरों पर पैनी नजर रखें।
राज्य में राहत कार्य और कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय
राज्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य आपदा परिचालन केंद्र (State Disaster Operation Center) को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। आम नागरिक किसी भी प्रकार की आपदा या सहायता के लिए जिला आपदा कंट्रोल रूम या आपातकालीन नंबरों पर तुरंत संपर्क कर सकते हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि जान-माल की सुरक्षा राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है और स्थिति पर पूरी तरह से नजर रखी जा रही है।









