बैंकॉक / नई दिल्ली (Doon Prime News Desk):
थाईलैंड से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। राजधानी बैंकॉक के पास स्थित नोनथाबुरी जिले के प्रसिद्ध ‘देबसिरिन स्कूल’ में शुक्रवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक छात्र ने परिसर में घुसकर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस भीषण गोलीबारी में कम से कम 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 15 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर छात्र ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
सुबह 10 बजे फैला दहशत का माहौल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक घटना स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10 बजे घटी। स्कूल में अचानक गोलियों की आवाज सुनते ही परिसर में भगदड़ मच गई। छात्र और शिक्षक अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सूचना मिलते ही ‘पोह टेक तुंग फाउंडेशन’ के राहत और बचाव दल समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और घायलों को तुरंत पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स में मौतों की पुष्टि
यद्यपि आधिकारिक तौर पर मौतों का अंतिम आंकड़ा जारी होना बाकी है, लेकिन ‘द बैंकॉक पोस्ट’ और ‘थाई एनक्वायरर’ की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार 2 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। स्थानीय पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हमलावर ने हमले के तुरंत बाद खुद को गोली मार ली थी, जिससे उसकी भी मौत हो गई है।
सुरक्षाकर्मियों की अपील: ना करें घटना का लाइव प्रसारण
घटना के बाद घबराए हुए छात्रों के स्कूल से बाहर भागने और एम्बुलेंस की भागदौड़ के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने आम जनता और मीडिया से अपील की है कि घटना का लाइव प्रसारण या तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा न करें, ताकि अफवाहों और दहशत को रोका जा सके।
देश में बंदूक संस्कृति पर उठ रहे गंभीर सवाल
थाईलैंड में स्कूल शूटिंग की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले बीते फरवरी महीने में भी सोंगखला प्रांत के ‘फातोंग प्रथान खिरीवत स्कूल’ में 18 वर्षीय एक युवक ने गोलीबारी की थी, जिसमें एक शिक्षक की जान चली गई थी।
दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड बंदूक स्वामित्व के मामले में सबसे आगे माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 1 करोड़ से अधिक अवैध व वैध हथियार मौजूद हैं—यानी औसतन हर 7 में से 1 नागरिक के पास हथियार है। गन कल्चर पर नकेल कसने के तमाम सरकारी दावों के बावजूद इस तरह की लगातार घटनाएं देश की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।








