मुख्य बिंदु (Key Highlights)
• बड़ी सैन्य कार्रवाई: अमेरिकी सेना ने लगातार छठे दिन ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए।
• निशाने पर बुनियादी ढांचा: दक्षिणी ईरान का एक हवाई अड्डा, बंदर अब्बास रेलवे स्टेशन और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास दो प्रमुख पुल तबाह।
• हताहतों की संख्या: हमलों में कम से कम 7 लोगों की दर्दनाक मौत, कई अन्य नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की खबर।
• वैश्विक संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा आपूर्ति ठप होने का मंडराया खतरा।
तेहरान / वाशिंगटन डीसी
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने लगातार छठे दिन ईरान के भीतर घुसकर उसके कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर रात भर भीषण बमबारी की। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस ताजा और बेहद घातक हमले में दक्षिणी ईरान के एक प्रमुख हवाई अड्डे, रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के रेलवे स्टेशन और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के पास स्थित दो पुलों को निशाना बनाया गया है। इस विनाशकारी हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
ईरानशहर हवाई अड्डे पर गिरे अमेरिकी गोले, धमाकों से दहला इलाका
ईरान के सरकारी टेलीविजन चैनल ‘आईआरआईबी’ (IRIB) की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित ईरानशहर हवाई अड्डे और उसके आस-पास का इलाका रात भर जोरदार धमाकों से गूंजता रहा। स्थानीय समयानुसार, देर रात हवाई अड्डे के परिसर में तीन बेहद शक्तिशाली विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। बताया जा रहा है कि हवाई अड्डे के रनवे और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए कम से कम एक अमेरिकी गोला सीधे परिसर के भीतर गिरा, जिससे एयरपोर्ट को भारी नुकसान पहुँचा है। हवाई अड्डे के आसपास के नागरिक इलाकों में भी इस हमले के बाद भारी दहशत का माहौल है।
बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन पर हमला और भारी तबाही
अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने ईरान के प्रमुख तटीय और व्यापारिक शहर बंदर अब्बास को भी अपना निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन स्टेशन पर अमेरिकी विमानों ने सटीक बमबारी की। इस हमले में रेलवे स्टेशन की इमारत और पटरियों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। प्राथमिक रिपोर्टों में इस जंक्शन पर हुए हमले में दो ईरानी नागरिकों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पुल जमींदोज, रणनीतिक सप्लाई कटी
ईरानी समाचार एजेंसी ‘इरना’ (IRNA) के हवाले से जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया है कि होर्मोजगान प्रांत में, जो सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील माना जाता है, होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित दो प्रमुख पुलों पर हवाई हमले किए गए। इन पुलों पर हुए मिसाइल हमलों में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग मलबे की चपेट में आने से घायल हो गए। इन पुलों के नष्ट होने से ईरानी सेना की तटीय मूवमेंट और स्थानीय रसद आपूर्ति व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। ईरानी मीडिया ने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे “अमेरिकी दुश्मन की कायराना हरकत” करार दिया है।
यूएस सेंट्रल कमांड का बड़ा बयान: “दर्जनों सैन्य ठिकाने किए नष्ट”
इस भीषण सैन्य कार्रवाई को लेकर यूएस सेंट्रल कमांड (USCENTCOM) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर हमलों की पुष्टि की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक:
”अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने फाइटर जेट्स, एरियल ड्रोन (UAVs) और युद्धपोतों का इस्तेमाल करते हुए सटीक निशाना लगाने वाले आधुनिक हथियारों (Precision-Guided Munitions) से हमला किया। इस ऑपरेशन के तहत ईरान के दर्जनों सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया गया है। हमारे निशाने पर मुख्य रूप से ईरान की तटीय निगरानी प्रणाली (Coastal Surveillance), एयर डिफेंस साइट्स, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और उनकी समुद्री युद्ध क्षमताएं थीं।”
हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने बुनियादी ढांचे (जैसे रेलवे स्टेशन और पुलों) पर नागरिकों की मौत को लेकर फिलहाल कोई सीधा विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन उनका दावा है कि ये हमले क्षेत्र में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए किए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट का गहराया खतरा
क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव अब केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। जिस होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका ने पुलों और तटीय ठिकानों को निशाना बनाया है, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में सैन्य टकराव आगे और बढ़ता है या ईरान इस मार्ग को ब्लॉक करने की कोशिश करता है, तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और कच्चे तेल की आपूर्ति पर इसका बेहद घातक असर पड़ेगा, जिससे दुनिया भर में मंदी और महंगाई का नया संकट खड़ा हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, बचाव कार्य जारी
ईरानी अधिकारियों ने इस निरंतर बमबारी की कड़े शब्दों में निंदा की है। तेहरान में जारी एक बयान में ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का यह आक्रमण सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून और देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है। हमले के तुरंत बाद ईरान की सेना, सिविल डिफेंस और रेड क्रेसेंट की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुँच चुकी हैं। मलबे को हटाने और घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव कार्य जारी है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि लगातार छह दिनों से जारी इन हमलों के बाद अब ईरान की तरफ से भी किसी बड़े जवाबी पलटवार की आशंका बढ़ गई है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में एक पूर्ण विकसित युद्ध (Full-Scale War) छिड़ने का खतरा पैदा हो गया है।











