रुद्रप्रयाग/गौरीकुंड:
देवभूमि उत्तराखंड में मानसूनी बारिश आफत बनकर बरस रही है। रुद्रप्रयाग जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश का सबसे बुरा असर विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा पर पड़ रहा है। रुद्रप्रयाग-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-107) पर तिलवाड़ा के समीप स्थित ‘गीड गधेरा’ उफान पर आ गया है, जिसके कारण पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर सड़क पर आ गिरे हैं। हाईवे बंद होने की वजह से केदारनाथ धाम जाने वाले और दर्शन कर वापस लौटने वाले हजारों यात्री विभिन्न पड़ावों पर फंस गए हैं।
दूसरी ओर, केदारनाथ यात्रा के अंतिम मुख्य पड़ाव सोनप्रयाग स्थित बहुमंजिला पार्किंग की बदहाली ने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण करोड़ों का राजस्व देने वाली यह पार्किंग तालाब और दलदल में तब्दील हो चुकी है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
केदारनाथ हाईवे पर मलबा आने से यातायात ठप, मुसाफिरों की बढ़ीं मुश्किलें
रुद्रप्रयाग जिले में बीते कुछ घंटों से हो रही तीव्र बारिश के चलते बरसाती नाले और नदियां उफान पर हैं। केदारनाथ हाईवे पर तिलवाड़ा के पास ‘गीड गधेरा’ में अचानक आए पानी के तेज बहाव के साथ भारी मलबा बहकर सड़क पर आ गया। मलबे के कारण मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं।
प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है। संबंधित कार्यदायी संस्थाओं (NHAI/PWD) को मार्ग खोलने के कार्य में लगा दिया गया है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी से गिरते पत्थरों के कारण मलबा हटाने के कार्य में काफी बाधा आ रही है। सड़क बंद होने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सोनप्रयाग की बहुमंजिला पार्किंग बनी ‘तालाब’, बदहाली पर भड़के लोग
केदारनाथ यात्रा का मुख्य आधार केंद्र सोनप्रयाग है, जहां बनी बहुमंजिला पार्किंग हर साल सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का राजस्व प्रदान करती है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर आय होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। बारिश शुरू होते ही इस बहुमंजिला पार्किंग के विभिन्न तलों पर जलभराव हो गया है।
पानी की निकासी (Drainage System) की समुचित व्यवस्था न होने के कारण पार्किंग क्षेत्र किसी तालाब जैसी नजर आ रही है। यहां खड़े यात्रियों के वाहन घंटों तक पानी और कीचड़ में डूबे रहने को मजबूर हैं। श्रद्धालु अपने भारी-भरकम बैग और सामान के साथ पानी और कीचड़ से होकर गुजरने को विवश हैं, जिससे उनके फिसलकर चोटिल होने का खतरा लगातार बना हुआ है।
स्थानीय संगठनों और जीप टैक्सी यूनियन ने जताया आक्रोश
सोनप्रयाग में पार्किंग की दुर्दशा पर स्थानीय व्यापारियों, चालकों और यात्रियों में गहरा रोष है। जीप टैक्सी यूनियन सोनप्रयाग के अध्यक्ष अंकित गैरोला ने प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा:
“पार्किंग क्षेत्र में बरसाती पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। हर साल मानसून में यहाँ जलभराव की यही गंभीर समस्या पैदा होती है। पानी जमा होने से पूरा परिसर कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। इससे न केवल चालकों को वाहन पार्क करने में समस्या आती है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी असुविधा उठानी पड़ती है। हर साल करोड़ों का राजस्व देने वाली पार्किंग की ऐसी हालत बेहद चिंताजनक है।”
स्थानीय लोगों का भी यही आरोप है कि प्रशासन और संबंधित ठेकेदार केवल शुल्क वसूलने में रुचि दिखाते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में यात्रियों के लिए ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधा मुहैया कराने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
यात्रियों और प्रशासन के लिए चुनौतियां कायम
केदारनाथ यात्रा मार्ग में आए दिन भूस्खलन और गधेरों के उफान पर आने से यात्रा बार-बार बाधित हो रही है। मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों तक क्षेत्र में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और संवेदनशील इलाकों में पूरी सावधानी बरतें।
फिलहाल, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें हाईवे को जल्द से जल्द खुलवाने के प्रयास में जुटी हुई हैं, ताकि फंसे हुए तीर्थयात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक भेजा जा सके। हालांकि, सोनप्रयाग पार्किंग में पसरे जलभराव और हाईवे की बार-बार बदहाली ने केदारनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।








