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​भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच: शंभू और खनौरी बॉर्डर सील, कटड़ा एक्सप्रेसवे ठप; धारा 163 लागू

On: July 21, 2026 6:47 AM
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Heavily barricaded Shambhu border at night with farmers protesting and security forces deployed.

अंबाला/पटियाला

​भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) के विरोध में पंजाब के किसान एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले और किसान नेता सरवन सिंह पंढेर की अगुवाई में सैकड़ों किसानों ने दिल्ली की ओर रुख किया है। किसानों के इस उग्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने हरियाणा-पंजाब से सटे शंभू और खनौरी बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है।

​अप्रिय घटनाओं से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंबाला और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर दी गई है। बॉर्डर पूरी तरह बंद होने के कारण दिल्ली-पंजाब राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही ठप पड़ गई है, जिससे आम यात्रियों और ड्राइवरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

​किसान घाट पर हुंकार: “सस्ते अमेरिकी उत्पादों से बर्बाद होंगे देसी किसान”

​दिल्ली कूच की शुरुआत से पहले किसानों ने ‘किसान घाट’ पर चार घंटे तक एक विशाल विरोध रैली की। रैली को संबोधित करते हुए किसान नेता सरवन सिंह पंढेर और अन्य किसान प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
​किसान नेताओं का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत में देश के अन्नदाताओं की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

किसानों को आशंका है कि इस डील के लागू होते ही अमेरिका से सस्ते दरों पर सोयाबीन, सूखे मेवे (ड्राय फ्रूट्स), डेयरी उत्पाद और खाद्यान्न भारतीय बाजारों में डंप किए जाएंगे। इससे भारत के छोटे और सीमांत किसानों, कृषि मजदूरों तथा स्थानीय दुकानदारों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार होगा और वे प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे।

​शंभू और खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

​स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए हरियाणा पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की अतिरिक्त टुकड़ियों को सीमा पर तैनात कर दिया गया है।

• ​कंक्रीट बैरिकेड्स और लोहे की कीलें: शंभू और खनौरी बॉर्डर पर हाईवे को ब्लॉक करने के लिए बड़े-बड़े कंक्रीट के स्लैब, लोहे के बैरिकेड्स और भारी वाहन खड़े किए गए हैं।
• ​कटड़ा एक्सप्रेस-वे बंद: दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस-वे पर आवागमन को पूरी तरह रोकने के लिए सड़क के बीचों-बीच बड़े-बड़े ट्रक और ट्राले खड़े कर दिए गए हैं।
• ​प्रवेश पर सख्त पाबंदी: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा के दृष्टिकोण से पंजाब की ओर से आने वाले किसी भी व्यक्ति या वाहन को हरियाणा की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

​खनौरी में भी तनावपूर्ण शांति, एक्सप्रेस-वे पर बैठे किसान

​खनौरी बस स्टैंड और आसपास के क्षेत्रों को छावनी में बदल दिया गया है। पुलिस ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए किसानों की गतिविधियों पर नजर रख रही है।

​कड़ी सुरक्षा के बावजूद कुछ किसान कटड़ा एक्सप्रेस-वे तक पहुँचने में कामयाब रहे, लेकिन पुलिस बलों ने उन्हें वहीं रोक लिया। पुलिस की रोक के बाद किसान एक्सप्रेस-वे पर ही शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे अपने शीर्ष नेतृत्व के अगले दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं और उनका आंदोलन पूरी तरह से अनुशासित व शांतिपूर्ण रहेगा।

​यात्रियों के लिए हरियाणा पुलिस का ‘ट्रैफिक अलर्ट’ और वैकल्पिक मार्ग

​शंभू बॉर्डर पूरी तरह बंद होने के कारण अंबाला पुलिस और यातायात विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए रूट डायवर्जन प्लान (Route Diversion) जारी किया है:

​1. दिल्ली से पंजाब जाने वाले वाहनों के लिए:
• ​रूट 1: अंबाला छावनी → चंडीगढ़ मार्ग → लालड़ू → डेरा बस्सी → जीरकपुर → पंजाब।
• ​रूट 2: लालड़ू या डेरा बस्सी के आंतरिक रास्तों का उपयोग कर पंजाब में प्रवेश करें।

​2. पंजाब से दिल्ली जाने वाले वाहनों के लिए:

• ​रूट 1: राजपुरा → लालड़ू → डेरा बस्सी → जीरकपुर → अंबाला छावनी → दिल्ली।
• ​रूट 2: राजपुरा व डेरा बस्सी के ग्रामीण वैकल्पिक रास्तों से अंबाला कैंट पहुँचकर आगे दिल्ली जाएं।

प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे जीटी रोड (GT Road) का इस्तेमाल करने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में सहायता के लिए आपातकालीन नंबर 112 पर संपर्क करें।

​13 महीने बंद रहा था खनौरी बॉर्डर, पुरानी यादें ताज़ा

​गौरतलब है कि इससे पहले हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान भी खनौरी और शंभू बॉर्डर लगभग 13 महीनों तक पूरी तरह सील रहे थे। एक बार फिर सीमाओं की किलेबंदी होने से स्थानीय कारोबारियों और दैनिक यात्रियों में चिंता की लहर दौड़ गई है।

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​एक तरफ जहाँ किसान संगठन अपनी मांगों और कृषि क्षेत्र के वजूद को बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि आम जनता की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। फिलहाल बॉर्डर पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह से नियंत्रण में बनी हुई है।

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