मुख्य बिंदु:
- बड़ी सौगात: दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (Rapid Rail) नेटवर्क का विस्तार अब धर्मनगरी हरिद्वार और योग नगरी ऋषिकेश तक होगा।
- समय की महाबचत: दिल्ली से ऋषिकेश के बीच 5-6 घंटे का सफर घटकर मात्र ढाई (2.5) घंटे का रह जाएगा।
- प्रस्तावित कॉरिडोर: मेरठ के मोदीपुरम से लक्ष्मणझूला (ऋषिकेश) तक बनेगा लगभग 150 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड ट्रैक।
- बजट और तैयारी: उत्तराखंड सरकार ने डीपीआर (DPR) तैयार करने के लिए आकस्मिकता निधि से 7.02 करोड़ रुपये की राशि को दी मंजूरी।
पूरी खबर: देवभूमि के लिए ऐतिहासिक परिवहन क्रांति
देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और कनेक्टिविटी को लेकर केंद्र व राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर छू लिया है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के बाद अब देश का सबसे आधुनिक और हाई-स्पीड क्षेत्रीय रेल नेटवर्क देवभूमि उत्तराखंड के दो सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों—हरिद्वार और ऋषिकेश को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ने जा रहा है।
दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) यानी ‘नमो भारत’ ट्रेन नेटवर्क को अब मेरठ से आगे बढ़ाकर मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार व ऋषिकेश तक विस्तारित करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस महापरियोजना के धरातल पर उतरने के बाद दिल्ली से ऋषिकेश का सफर मात्र ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा, जो वर्तमान समय की तुलना में आधा है।
सीएम धामी की पैरवी और पीएम मोदी की मुहर
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति देने में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर इस हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को उत्तराखंड तक विस्तार देने का विशेष आग्रह किया था। राज्य के विकास और चारधाम यात्रा सहित पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए इस अनुरोध पर केंद्र सरकार ने बेहद सकारात्मक रुख अपनाया।
इसके बाद उत्तराखंड सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ, जिसके बाद लगभग 150 किलोमीटर लंबे इस नए प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण को लेकर तीनों पक्षों के बीच पूर्ण सहमति बन गई है।
कैसा होगा 150 किलोमीटर लंबा नया रूट और ट्रैक का गणित?
दिल्ली-मेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश आरआरटीएस कॉरिडोर का खाका बेहद आधुनिक तरीके से तैयार किया जा रहा है। यह नया हाई-स्पीड रेल ट्रैक वर्तमान में संचालित दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के अंतिम छोर यानी मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से आगे शुरू होगा।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा का विभाजन
- कुल लंबाई: यह पूरा नया कॉरिडोर लगभग 150 किलोमीटर लंबा होगा।
- उत्तर प्रदेश का हिस्सा: इस रूट का लगभग 72 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र में आएगा, जो मोदीपुरम से शुरू होकर मुजफ्फरनगर और पुरकाजी होते हुए उत्तराखंड की सीमा तक पहुंचेगा।
- उत्तराखंड का हिस्सा: उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर इस कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 78 किलोमीटर होगी। यह रुड़की और हरिद्वार के मुख्य केंद्रों से गुजरते हुए ऋषिकेश के अंतिम छोर लक्ष्मणझूला तक पहुंचेगा।
डीपीआर के लिए 7.02 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत
परियोजना को बिना किसी देरी के धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड की धामी सरकार ने अपनी प्रशासनिक और वित्तीय प्रतिबद्धता दिखा दी है। राज्य सरकार ने उत्तराखंड के हिस्से में आने वाले 78 किलोमीटर लंबे हरिद्वार-ऋषिकेश खंड की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) को तैयार कराने के लिए हरी झंडी दे दी है।
इसके परामर्श शुल्क (Consultancy Fee) के रूप में आवश्यक 7.02 करोड़ रुपये (जिस पर जीएसटी अतिरिक्त देय होगा) की धनराशि को राज्य की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से तत्काल उपलब्ध कराने का बड़ा निर्णय लिया गया है।
परियोजना को रफ्तार देने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती
इस मेगा प्रोजेक्ट की महत्ता को देखते हुए तीनों हितधारकों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और एनसीआरटीसी) ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी कमर कस ली है। किसी भी प्रकार के अंतर-राज्यीय या तकनीकी गतिरोध को तुरंत दूर करने और फाइलों को गति देने के लिए अधिकारियों की नियुक्तियां कर दी गई हैं।
रीना जोशी बनीं उत्तराखंड की नोडल अधिकारी
उत्तराखंड सरकार ने परियोजना के समन्वय और तीव्र क्रियान्वयन के लिए अपर सचिव रीना जोशी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं दूसरी तरफ, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) और उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अपने-अपने वरिष्ठ नोडल अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट के लिए मैदान में उतार दिया है। अधिकारियों की यह संयुक्त टीम इस कॉरिडोर के शुरुआती चरणों की देखरेख करेगी।
फिजिबिलिटी सर्वे होगा अगला सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव
धनराशि की मंजूरी और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद अब इस प्रोजेक्ट का अगला सबसे महत्वपूर्ण चरण फिजिबिलिटी सर्वे (Feasibility Survey) होगा। इस सर्वे के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन और विस्तृत अध्ययन किया जाएगा:
- तकनीकी व्यवहार्यता: क्या प्रस्तावित रूट पर हाई-स्पीड नमो भारत ट्रेन को बिना किसी तकनीकी बाधा के 160 से 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा सकता है?
- स्टेशनों का निर्धारण: मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच यात्रियों की सुविधा के अनुसार कौन-कौन से संभावित स्टेशन बनाए जाने चाहिए?
- भूमि अधिग्रहण और लागत: इस ट्रैक को बिछाने के लिए कितनी सरकारी और निजी भूमि की आवश्यकता होगी और इसके निर्माण में कुल कितनी अनुमानित लागत आएगी?
- पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन (EIA): चूंकि यह रूट गंगा तटीय क्षेत्रों और उत्तराखंड के संवेदनशील वन क्षेत्रों के करीब से गुजरेगा, इसलिए पर्यावरण पर पड़ने वाले इसके प्रभाव और गंगा नदी के पास निर्माण की भू-वैज्ञानिक चुनौतियों का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
- यात्री दबाव का आकलन: महाकुंभ, अर्द्धकुंभ, कांवड़ यात्रा और सामान्य पर्यटन सीजन के दौरान ट्रेनों पर संभावित यात्री दबाव कितना रहेगा, इसका भी पूरा डेटा तैयार किया जाएगा।
सफर होगा आधा: दिल्ली-एनसीआर के प्रवासियों और पर्यटकों को मिलेगी बड़ी राहत
वर्तमान समय की बात करें तो दिल्ली से ऋषिकेश की सड़क मार्ग से दूरी तय करने में भारी ट्रैफिक, जाम और संकरे रास्तों के कारण यात्रियों को औसतन 5 से 6 घंटे का लंबा समय लग जाता है। वीकेंड या चारधाम यात्रा सीजन के दौरान तो यह समय और भी बढ़ जाता है।
ढाई घंटे में तय होगी दूरी, व्यापार और रोजगार को मिलेंगे नए पंख
नमो भारत (आरआरटीएस) ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद यह पूरी दूरी महज ढाई (2.5) घंटे में सिमट जाएगी। यह न केवल समय की बचत करेगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर में निवास करने वाले उत्तराखंड के लाखों प्रवासियों के लिए अपने घर आने-जाने का सबसे सुगम माध्यम बनेगा।
इसके साथ ही, इस आधुनिक रेल नेटवर्क से जुड़ने के बाद उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म, होटल इंडस्ट्री, व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।
कुल मिलाकर, नमो भारत ट्रेन का यह विस्तार उत्तराखंड के परिवहन इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है, जो विकास की रफ्तार को दोगुना करने जा रहा है।







