मुख्य बिंदु:
- तनाव की वजह: अप्रैल में लागू हुआ युद्धविराम टूटा; पश्चिम एशिया संघर्ष के 100 दिन पूरे होने पर भड़की भीषण जंग।
- ताजा घटनाक्रम: इजरायल ने वाशिंगटन की अपील को दरकिनार कर बेरुत पर हमला किया, जवाबी कार्रवाई में ईरान ने दागीं ताबड़तोड़ मिसाइलें।
- अमेरिका का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा— “या तो समझौता करो या पूरी तरह तबाही के लिए तैयार रहो।”
- राजनयिक हलचल: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शांति संदेश लेकर तेहरान पहुंचे।
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के आसार, सायरन की गूंज से दहला इजरायल
नई दिल्ली/तेल अवीव/तेहरान:
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति के तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रयास एक बार फिर मटियामेट होते दिख रहे हैं। क्षेत्र में जारी संघर्ष के सौ दिन पूरे होते ही माहौल बेहद विस्फोटक हो गया है। अप्रैल महीने की शुरुआत में बड़े प्रयासों के बाद लागू किया गया युद्धविराम अब पूरी तरह से टूट चुका है। देर रात ईरान ने इजरायल के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग दीं। इस अचानक हुए हमले के बाद इजरायल के कई प्रमुख शहरों में हवाई हमले के सायरन गूंज उठे और नागरिक सुरक्षित ठिकानों (बंकरों) की ओर भागने को मजबूर हो गए।
इस नए घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीतिज्ञों की चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि मध्यस्थता के जरिए युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त करने की जो उम्मीदें बची थीं, वे अब बेहद जटिल हो गई हैं।
बेरुत पर इजरायली हमले के बाद भड़का ईरान
इस ताजा सैन्य टकराव की पटकथा रविवार को उस समय लिखी गई, जब इजरायल ने अमेरिकी प्रशासन के अनुरोधों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। वाशिंगटन ने इजरायल से लेबनान की राजधानी बेरुत पर हमला न करने की अपील की थी। इसके बावजूद, इजरायली वायुसेना ने बेरुत के दक्षिणी उपनगरों पर भीषण बमबारी की।
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस इजरायली हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने इस हमले को सही ठहराते हुए कहा कि उत्तरी इजरायल में हिजबुल्लाह द्वारा की गई गोलाबारी के जवाब में उन्होंने यह कार्रवाई की है।
इस हमले के तुरंत बाद ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGS) ने चेतावनी जारी की थी, जिसे कुछ ही घंटों में मिसाइल हमले के रूप में बदल दिया गया। IRGS ने साफ कहा है कि यदि इजरायल ने लेबनान पर हमले तुरंत बंद नहीं किए और ईरान की जवाबी कार्रवाई का विरोध किया, तो आगामी हमले इससे भी कहीं अधिक विनाशकारी होंगे।
डोनाल्ड ट्रंप की दोटूक: “समझौता करो या तबाही के लिए तैयार रहो”
पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालातों की पूरी रिपोर्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंप दी गई है। इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने इरादे बेहद सख्त कर दिए हैं। ट्रंप ने एक कड़े बयान में कहा:
”ईरान के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं— या तो वह हमारे साथ टेबल पर आकर समझौता करे, या फिर पूरी तरह से तबाह होने के लिए तैयार रहे। जब तक कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका न तो ईरान की संपत्तियों को अनफ्रीज (बहाली) करेगा और न ही उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाएगा।”
ट्रंप ने आगे की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि तेहरान के साथ समझौता होता है, तो अमेरिका ईरान की सभी परमाणु सामग्रियों को जब्त कर उन्हें नष्ट कर देगा। यदि ईरान ने इस रास्ते को नहीं चुना, तो अमेरिका बेहद सख्त कदम उठाएगा।
ईरान की संसद का पलटवार: अमेरिकी ठिकाने अब निशाने पर
अमेरिकी और इजरायली दबाव के आगे झुकने के बजाय ईरान ने भी युद्ध का रास्ता चुनने के संकेत दिए हैं। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल केवल ‘ताकत की भाषा’ समझते हैं।
गलीबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने न केवल ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी की है, बल्कि इजरायल को लेबनान में कत्लेआम मचाने की खुली छूट (हरी झंडी) भी दी है। उन्होंने घोषणा की कि अब पश्चिम एशिया में स्थित तमाम अमेरिकी सैन्य अड्डे और इजरायली ठिकाने ईरान की मिसाइलों के सीधे निशाने पर हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अब किसी भी दिखावे की बातचीत का हिस्सा नहीं बनेगा, बल्कि दुश्मनों से आमने-सामने का मुकाबला करेगा।
समुद्र में भी टकराव: सेंटकाम ने मार गिराए ईरानी ड्रोन
यह तनाव सिर्फ जमीन और आसमान तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र में भी दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों के लिए खतरा बने दो ईरानी आत्मघाती ड्रोनों को मार गिराया है।
इससे पहले भी दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। खाड़ी देशों की ओर आ रहे ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नष्ट कर दिया था, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के रडार और निगरानी ठिकानों को निशाना बनाया था।
ईरानी संपत्ति से होगी खाड़ी देशों के नुकसान की भरपाई
अमेरिका अब आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान को घेरने की बड़ी तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपनी एक विशेष टीम को निर्देश दिया है कि वे ईरान के हमलों से सहयोगी खाड़ी देशों को हुए वित्तीय और बुनियादी नुकसान का सटीक आकलन करें। अमेरिका की योजना है कि प्रतिबंधों के तहत जब्त की गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग इस नुकसान की भरपाई के लिए किया जाए, जिससे ईरान पर आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा।
राजनयिक गतिरोध और पाकिस्तान की एंट्री
एक तरफ जहाँ युद्ध के बादल गहरे हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मुलाकात की संभावना जताई थी। अराघची ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को भ्रम की दुनिया से बाहर निकलकर “वास्तविक दुनिया” में जीना चाहिए।
इस बीच, बढ़ते वैश्विक तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास किया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी आनन-फानन में तेहरान पहुंचे हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नकवी वाशिंगटन और तेहरान के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू कराने के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व का एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील संदेश लेकर ईरान के सर्वोच्च नेता के पास गए हैं।
निष्कर्ष: पश्चिम एशिया का यह नया मोड़ बेहद खतरनाक है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक पूर्ण विकसित वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।










