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उत्तराखंड: मुनस्यारी में भीषण सड़क हादसा, 200 मीटर गहरी खाई में गिरी पिकअप; दो युवकों की मौत, ड्राइवर सुरक्षित

On: June 1, 2026 9:45 AM
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मुनस्यारी में खाई में गिरे पिकअप वाहन का रेस्क्यू करते आईटीबीपी और एसडीआरएफ के जवान

​मुनस्यारी-मिलम मोटर मार्ग पर रड़गाड़ी के पास बेकाबू हुआ वाहन, गोरी नदी के किनारे उड़े परखच्चे; आईटीबीपी, एसडीआरएफ और पुलिस ने रात के अंधेरे में 8 घंटे चलाया बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन


मुनस्यारी (पिथौरागढ़), 1 जून 2026

​पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार देर शाम जनपद के मुनस्यारी क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। यहाँ मुनस्यारी-मिलम मोटर मार्ग पर एक अनियंत्रित पिकअप वाहन लगभग 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। इस हृदयविदारक घटना में वाहन में सवार दो युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि वाहन का चालक चमत्कारिक रूप से खिड़की से बाहर छिटक जाने के कारण सुरक्षित बच गया।

​हादसे की सूचना मिलते ही भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मोर्चे को संभाला। खड़ी चट्टानों और घने अंधेरे के बीच लगभग 8 घंटे तक चले अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों मृतकों के शवों को खाई से बाहर निकाला जा सका।

​लास्पा गांव से लौट रहा था वाहन, रड़गाड़ी के पास हुआ हादसा

​स्थानीय प्रशासन और पुलिस से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना रविवार शाम लगभग 5:00 बजे की है। एक कमर्शियल पिकअप वाहन संख्या (स्थानीय रूट) लास्पा गांव से आवश्यक कार्य निपटाकर मुनस्यारी मुख्य बाजार की तरफ आ रहा था। सफर के दौरान जैसे ही वाहन मुनस्यारी-मिलम मार्ग पर स्थित ‘रड़गाड़ी’ नामक स्थान के समीप पहुंचा, तभी अचानक मोड़ पर चालक नियंत्रण खो बैठा। नियंत्रण खोते ही वाहन सीधे सड़क किनारे स्थित अत्यधिक गहरी और खड़ी खाई में समा गया।
​प्रत्यक्षदर्शियों और रेस्क्यू टीम के मुताबिक, दुर्घटना स्थल का भूगोल बेहद खतरनाक और खड़ी चट्टानी दीवारों वाला है। सड़क से नीचे गिरने के बाद पिकअप वाहन अत्यंत तीव्र गति से विशालकाय चट्टानों से टकराते हुए सीधे नीचे बहने वाली गोरी नदी के तट तक जा पहुंचा। पत्थरों और चट्टानों की भीषण टक्कर के कारण पिकअप के परखच्चे उड़ गए और वह मलबे के ढेर में तब्दील हो गया।

​ड्राइवर की बची जान, दो घरों में पसरा मातम

​इस खौफनाक हादसे में वाहन के खाई में पलटते ही उसका चालक, जिसकी पहचान जगत मेहता (निवासी- तेजम) के रूप में हुई है, वह किसी तरह छिटककर ऊपरी ढलान पर ही अटक गया। ढलान पर गिरने के कारण उसे चोटें जरूर आईं, लेकिन उसकी जान बच गई। हालांकि, मुख्य केबिन में बैठे दो अन्य युवक वाहन के साथ सीधे नीचे चले गए।
​विशालकाय चट्टानों के बीच दबने और गहरी चोटें आने के कारण दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

मृतकों की शिनाख्त निम्नलिखित रूप में की गई है:

  • ​मनेंद्र राम (उम्र 30 वर्ष) – निवासी: धारचूला, पिथौरागढ़ (उत्तराखंड)
  • ​प्रकाश (उम्र 28 वर्ष) – मूल निवासी: नेपाल

​मृतकों की शिनाख्त होने के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के घरों में कोहराम मच गया है और पूरे सीमांत क्षेत्र में शोक की लहर है।

​नेटवर्क विहीन क्षेत्र होने के कारण सूचना में हुई देरी

​पर्वतीय इलाकों की सबसे बड़ी भौगोलिक समस्या एक बार फिर इस हादसे के दौरान देखने को मिली। जिस रड़गाड़ी क्षेत्र में यह दुर्घटना हुई, वह पूरी तरह से ‘नो-नेटवर्क ज़ोन’ यानी मोबाइल नेटवर्क विहीन क्षेत्र है। इस वजह से हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक मदद के लिए कॉल करना असंभव था।
​घटना के बाद घायल चालक जगत मेहता ने अदम्य साहस दिखाते हुए किसी तरह ऊपर की ओर चिल्लाना शुरू किया। संयोगवश, उसी समय भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान उस मार्ग पर नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) कर रहे थे। शाम करीब 5:15 बजे आईटीबीपी के जवानों को चालक के चीखने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वे तुरंत मौके पर पहुंचे। जवानों ने बिना वक्त गंवाए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वायरलेस सिस्टम के जरिए तहसील प्रशासन और स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी दी।

​अंधेरे और खड़ी चट्टानों के बीच 8 घंटे चला ‘ऑपरेशन जिंदगी’

​सूचना मिलते ही मुनस्यारी से पुलिस उपनिरीक्षक (SI) नीरज चौहान के नेतृत्व में पुलिस टीम और एसडीआरएफ (SDRF) के उपनिरीक्षक सुनील चंद के नेतृत्व में रेस्क्यू दस्ता अत्याधुनिक उपकरणों और एम्बुलेंस के साथ घटना स्थल पर पहुंच गया।
​”रात का घाघ अंधेरा और करीब 80 से 85 डिग्री की सीधी खड़ी चट्टानें रेस्क्यू में सबसे बड़ी बाधा थीं। टॉर्च और सर्च लाइटों के सहारे जवान रस्सी (रोप) बांधकर गोरी नदी के मुहाने तक उतरे। दोनों शव चट्टानों के मलबे और वाहन के बीच बुरी तरह फंसे हुए थे।” –

रेस्क्यू टीम के सदस्य

​कड़ी मशक्कत, सूझबूझ और जान जोखिम में डालकर आईटीबीपी, एसडीआरएफ और पुलिस के संयुक्त दल ने रात के लगभग 1:00 बजे (करीब 8 घंटे बाद) दोनों शवों को खाई से बाहर निकाला और मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद शवों को तुरंत आपातकालीन वाहन के जरिए मुनस्यारी भेजा गया।
​पुलिस का आधिकारिक बयान और आगामी कार्रवाई

​मामले की पुष्टि करते हुए मुनस्यारी पुलिस के उपनिरीक्षक नीरज चौहान ने बताया कि रविवार शाम को हुए इस हादसे में दो लोगों की मृत्यु हुई है और एक घायल है। घायल चालक का मुनस्यारी के स्थानीय चिकित्सालय में उपचार चल रहा है, जहां उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

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​उन्होंने आगे बताया कि सोमवार सुबह दोनों मृतकों के शवों का मुनस्यारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमॉर्टम (Panchnama & Autopsy) कराया जा रहा है। वैधानिक और चिकित्सीय प्रक्रियाएं पूरी होने के तुरंत बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या मानवीय भूल की वजह से।

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