रामगढ़ (झारखंड)
झारखंड के रामगढ़ जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद घटना सामने आई है। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) बेंगलुरु में कार्यरत एक 35 वर्षीय युवा इंजीनियर का शव उनके पैतृक गांव के पास एक पहाड़ी पर फंदे से लटकता हुआ मिला।
इस दर्दनाक घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और स्थानीय लोगों के बीच सनसनी का माहौल है।
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक स्तर पर इस मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है।
छुट्टी पर पत्नी और बच्चों के साथ आए थे गांव
मृतक इंजीनियर की पहचान कमल किशोर महतो (35 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तालाटांड (भूइंया टोली) के निवासी थे।परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, कमल किशोर बेंगलुरु में बतौर अभियंता (इंजीनियर) देश की सुरक्षा से जुड़े संगठन DRDO में अपनी सेवाएं दे रहे थे।वे बीते 19 अप्रैल को ही अपने कार्यालय से छुट्टी लेकर अपनी पत्नी और दो मासूम बेटों के साथ अपने पैतृक गांव तालाटांड आए थे। परिवार के सदस्यों का कहना है कि गांव आने के बाद सब कुछ पूरी तरह सामान्य चल रहा था और किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि ऐसा खौफनाक मोड़ आ जाएगा।
डिप्रेशन और अनिद्रा के शिकार थे कमल किशोर
कमल किशोर के पिता प्रभु महतो ने घटना के बाद अत्यंत भावुक और दुखी मन से बताया कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक तनाव (डिप्रेशन) का सामना कर रहा था। इस अत्यधिक मानसिक तनाव का सीधा असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा था। कमल को पिछले कई दिनों से रात में नींद न आने (अनिद्रा या इन्सोम्निया) की गंभीर समस्या थी, जिसके कारण वे काफी परेशान चल रहे थे।
डॉक्टर से अपॉइंटमेंट के ठीक पहले घट गई घटना
पिता ने बताया कि कमल की बिगड़ती मानसिक स्थिति को देखते हुए पूरा परिवार बेहद चिंतित था। परिजनों ने उनके समुचित इलाज की पूरी तैयारी कर ली थी। इसके लिए बुधवार को रांची के एक जाने-माने और बड़े डॉक्टर से उनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच (चेकअप) कराने के लिए बाकायदा अपॉइंटमेंट भी ले लिया गया था।लेकिन, डॉक्टर के पास जाने और इलाज शुरू होने से ठीक एक दिन पहले ही उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
रात 11 बजे हुए थे लापता, सुबह मिला शव
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोमवार की रात करीब 11 बजे कमल किशोर को उनके घर के बाहर अकेले टहलते हुए देखा गया था। उस समय किसी को कोई असामान्य बात नहीं लगी। हालांकि, जब देर रात तक वे वापस अपने घर नहीं लौटे, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी।
इसके बाद परिवार के सदस्यों और कुछ ग्रामीणों ने मिलकर रात में ही उनकी तलाश शुरू कर दी। चूंकि रात का समय था और चारों तरफ घना अंधेरा था, इसलिए उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिल सका।सुबह होते ही गांव में इस बेहद दुखद खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया। मंगलवार की सुबह जब कुछ ग्रामीण गांव के पास स्थित पहाड़ी की तरफ गए, तो उन्होंने एक पेड़ से कमल किशोर का शव फंदे से झूलता हुआ देखा।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पहाड़ी पर शव मिलने की खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। घटना की तत्काल सूचना पतरातू थाना पुलिस को दी गई।सूचना मिलते ही पतरातू थाना के पुलिस पदाधिकारी भारी बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया।पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए शव को फंदे से नीचे उतारा और अपने कब्जे में ले लिया।आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए रामगढ़ के सदर अस्पताल भेज दिया है
पुलिस का बयान:
स्थानीय पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए मामला पहली नजर में डिप्रेशन के कारण की गई आत्महत्या का लग रहा है।हालांकि, पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर गहराई से छानबीन कर रही है। मौत के असली और सटीक कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।डीआरडीओ जैसे प्रतिष्ठित संगठन में कार्यरत देश के एक युवा इंजीनियर की इस तरह असामयिक मौत ने कई सवाल छोड़ दिए हैं।









