नई दिल्ली।
भारत में शहरी परिवहन (Urban Transport) की तस्वीर बदलने के लिए केंद्र सरकार एक और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए सरकार अब देश के 18 प्रमुख शहरों में ‘वाटर मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम’ शुरू करने की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है।
कोच्चि वाटर मेट्रो की शानदार सफलता और पर्यावरण के अनुकूल इसके बेहतर परिणामों को देखते हुए अब इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
इस बड़ी परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘नेशनल वाटर मेट्रो पॉलिसी’ (National Water Metro Policy) का एक मसौदा (Draft) तैयार किया है, जिसे अंतर-मंत्रालयी मशविरे और अंतिम मंजूरी के लिए संबंधित विभागों को वितरित कर दिया गया है।
दो चरणों में लागू होगी योजना: पहले फेज में यूपी और जम्मू-कश्मीर को प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस महापरियोजना को दो अलग-अलग चरणों (Phases) में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में उन शहरों को चुना गया है जो धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं और जहाँ जलमार्गों की बेहतर उपलब्धता है।
पहला चरण (Phase 1): इन 5 शहरों में शुरू होगी सेवा
परियोजना के पहले चरण में देश के 5 प्रमुख शहरों को शामिल किया गया है, जिनमें उत्तर प्रदेश के तीन सबसे बड़े धार्मिक केंद्र भी हैं:
- श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)
- पटना (बिहार)
- वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
- अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
- प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
दूसरा चरण (Phase 2): पूर्वोत्तर भारत को जोड़ेगी वाटर मेट्रो
पहले चरण के सफलतापूर्वक लॉन्च होने के बाद, परियोजना के दूसरे चरण का विस्तार पूर्वोत्तर भारत की ओर किया जाएगा। इसके तहत असम के दो प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक शहरों तेजपुर और डिब्रूगढ़ में वाटर मेट्रो सेवा का संचालन शुरू किया जाएगा।
हाल ही में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस संबंध में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें परियोजना की प्रगति और भविष्य की रूपरेखा पर गहन चर्चा की गई।
कोच्चि मॉडल की सफलता बनी आधार: क्यों खास है वाटर मेट्रो?
केरल के कोच्चि में देश की पहली वाटर मेट्रो का प्रयोग बेहद सफल रहा है। कोच्चि वाटर मेट्रो से मिले अनुभवों और वहां यात्रियों से मिले बेहतरीन फीडबैक के आधार पर ही केंद्र सरकार ने इसे देश के अन्य हिस्सों में विस्तार देने का फैसला किया है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश के अंदरूनी जलमार्गों (Inland Waterways) का सही और कुशल इस्तेमाल करना है। सरकार इन जलमार्गों को आधुनिक, टिकाऊ और सुरक्षित ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करना चाहती है, ताकि आम जनता को आवाजाही का एक बेहतरीन और सस्ता विकल्प मिल सके।
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कम लागत और पर्यावरण के अनुकूल: पारंपरिक मेट्रो से बेहतर विकल्प
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने वाटर मेट्रो की खूबियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह सिस्टम पारंपरिक मेट्रो या अन्य शहरी परिवहन प्रणालियों की तुलना में बेहद किफायती है।
- कम सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर: वाटर मेट्रो के लिए अलग से भारी-भरकम कंक्रीट के ट्रैक या टनल बनाने की जरूरत नहीं होती। यह मौजूदा प्राकृतिक और कृत्रिम जलमार्गों का उपयोग करती है, जिसके कारण इसमें बहुत कम सिविल निर्माण कार्य की आवश्यकता पड़ती है।
- कम पूंजी और जमीन की बचत: इस सिस्टम को तैयार करने में पारंपरिक मेट्रो के मुकाबले काफी कम वित्तीय निवेश (कैपिटल) की आवश्यकता होती है। साथ ही, इसके लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की समस्या भी न के बराबर होती है।
- संचालन की कम लागत: यह प्रणाली तेज निर्माण, जमीन की न्यूनतम जरूरत और कम परिचालन खर्च (Operational Cost) के कारण आज के समय में शहरी यातायात के लिए सबसे सटीक, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) विकल्प साबित हो रही है।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति, KMRL ने पूरा किया व्यवहारिकता अध्ययन
शहरी इलाकों में बढ़ते वाहनों के दबाव और घंटों लगने वाले ट्रैफिक जाम को कम करने में यह वाटर मेट्रो सेवा एक गेम-चेंजर साबित होगी। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए इन 18 शहरों में ग्राउंड स्टडी और व्यवहारिकता जांच (Feasibility Study) का काम ‘कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड’ (KMRL) को सौंपा था।
केएमआरएल (KMRL) ने अपनी व्यापक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का मूल्यांकन किया है, जिनमें शामिल हैं:
- शहरों की मौजूदा सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का आकलन।
- रोजाना सफर करने वाले संभावित यात्रियों (Ridership) का अनुमान।
- वित्तीय और आर्थिक रूप से इस प्रोजेक्ट के फायदे और नुकसान।
- मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन (यानी वाटर मेट्रो स्टेशन को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या मुख्य सड़कों से जोड़ना)।
लेटेस्ट अपडेट: राहत की बात यह है कि विशेषज्ञ टीमों द्वारा सभी 18 चिन्हित स्थानों का साइट विजिट (जमीनी निरीक्षण) पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। कुल 17 शहरों के लिए मसौदा व्यवहारिकता रिपोर्ट (Draft Feasibility Report) भी सरकार को सौंप दी गई है। वर्तमान में केवल लक्षद्वीप की रिपोर्ट लंबित है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
निष्कर्ष: बदल जाएगी भारतीय शहरों की सूरत
भारत सरकार की यह ‘वाटर मेट्रो’ योजना न केवल देश के जलमार्गों का कायाकल्प करेगी, बल्कि पर्यटन को भी एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। विशेषकर अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में, जहाँ सालभर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, वहाँ यह सेवा यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए एक अनोखा आकर्षण बनेगी।
कम लागत, शून्य प्रदूषण और आरामदायक सफर के वादे के साथ शुरू हो रही यह परियोजना नए भारत के आत्मनिर्भर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की एक नई मिसाल पेश करने के लिए तैयार है।








