रुड़की (उत्तराखंड): हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बंजारेवाला गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ गुरुवार दोपहर चीला नदी में नहाने गए एक 12 वर्षीय किशोर पर मगरमच्छ ने हमला कर उसे गहरे पानी में खींच लिया। गुरुवार शाम तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद भी किशोर का कुछ पता नहीं चला, लेकिन शुक्रवार सुबह नदी के पास उसका खून से लथपथ शव बरामद हुआ है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बंजारेवाला निवासी प्रमोद का 12 वर्षीय पुत्र राजा, जो कि गांव के ही सरकारी स्कूल में सातवीं कक्षा का छात्र था, गुरुवार दोपहर घर से साइकिल लेकर चीला नदी की ओर गया था। भीषण गर्मी के चलते वह नदी के किनारे बने पानी के गड्ढों में नहाने लगा।
चश्मदीदों और ग्रामीणों के अनुसार, इसी दौरान पानी में छिपे एक आदमखोर मगरमच्छ ने अचानक राजा पर हमला कर दिया और उसे गहरे पानी की ओर खींच ले गया।
जब काफी देर तक राजा घर वापस नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान नदी किनारे उसकी साइकिल और कपड़े बरामद हुए, जिससे अनहोनी की आशंका गहरा गई। ग्रामीणों ने रात भर अपने स्तर पर तलाश जारी रखी, लेकिन अंधेरा अधिक होने और जंगली क्षेत्र होने के कारण कुछ पता नहीं चल सका।
शुक्रवार सुबह मिला क्षत-विक्षत शव
शुक्रवार सुबह करीब 9:00 बजे जब ग्रामीण और पुलिस की टीम दोबारा तलाशी के लिए नदी किनारे पहुंची, तो झाड़ियों के पास राजा का शव बरामद हुआ। शव की हालत देखकर हर कोई सिहर उठा। मगरमच्छ के हमले के कारण शरीर पर गहरे घाव थे और शव पूरी तरह खून से लथपथ था। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मजदूर पिता का इकलौता सहारा था राजा
राजा के पिता प्रमोद मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। राजा के अलावा उनकी दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई है। घर का बड़ा बेटा होने के नाते राजा परिवार की उम्मीदों का केंद्र था। इस हादसे ने परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है। गांव में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।
वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में मगरमच्छों का आतंक नया नहीं है। पिछले साल भी इसी स्थान पर कई बार मगरमच्छ देखे गए थे, जिसकी लिखित सूचना वन विभाग को दी गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय विभाग की टीम आई जरूर थी, लेकिन केवल खानापूर्ति कर वापस लौट गई। यदि समय रहते मगरमच्छों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया होता, तो आज एक मासूम की जान न जाती।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- नदी किनारे और गड्ढों के पास सुरक्षा घेरा (Fencing) बनाया जाए।
- आदमखोर हो चुके मगरमच्छों को पकड़ने के लिए वन विभाग द्वारा पिंजरे लगाए जाएं।
- मृतक के गरीब परिवार को उचित सरकारी मुआवजा दिया जाए।
दहशत के साये में ग्रामीण
चीला नदी का यह क्षेत्र राजाजी नेशनल पार्क के बफर जोन से सटा हुआ है, जिस कारण यहाँ अक्सर जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है। बरसात और बाढ़ के कारण मगरमच्छ अक्सर रिहायशी इलाकों के करीब आ जाते हैं। इस घटना के बाद से बंजारेवाला और आसपास के गांवों में लोग अपने बच्चों को नदी की ओर भेजने से डर रहे हैं।
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पुलिस और प्रशासन की अपील
बुग्गावाला थाना पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे वर्तमान स्थिति को देखते हुए नदी के गहरे पानी या किनारों पर बने जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाएं। वन विभाग को भी घटना की विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है ताकि तत्काल प्रभाव से मगरमच्छ को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की जा सके।







