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सियाचिन में तैनात पिथौरागढ़ का लाल शहीद: दिल्ली के RR अस्पताल में ली अंतिम सांस, क्षेत्र में शोक की लहर

On: April 20, 2026 12:59 PM
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शहीद जवान दीपक कुमार जेठी की तस्वीर और श्रद्धांजलि।

​पिथौरागढ़ / दिल्ली:

देवभूमि उत्तराखंड ने देश की रक्षा के लिए एक बार फिर अपना एक वीर सपूत खो दिया है। पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट क्षेत्र के ओझा मल्ला गांव निवासी भारतीय सेना के जवान दीपक कुमार जेठी का सियाचिन ग्लेशियर में ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने से निधन हो गया। दिल्ली के सैन्य अस्पताल (RR Hospital) में उपचार के दौरान रविवार देर शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। इस खबर के बाद से पूरे सीमांत जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।

​अत्यधिक ऊंचाई पर बिगड़ी थी तबीयत

​मिली जानकारी के अनुसार, 7 कुमाऊं रेजिमेंट के सिपाही दीपक कुमार जेठी की तैनाती करीब सात माह पूर्व दुनिया के सबसे ऊंचे और दुर्गम युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में हुई थी। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई और शून्य से कई डिग्री नीचे के तापमान में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई।

​सियाचिन की विषम परिस्थितियों में ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने पर सेना के साथियों ने उन्हें तत्काल स्थानीय सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद जब उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो सेना ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें हवाई मार्ग से दिल्ली स्थित आरआर (Research & Referral) अस्पताल रेफर कर दिया।

​डॉक्टरों की तमाम कोशिशें रहीं नाकाम

​दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पिछले कुछ दिनों से दीपक कुमार को बचाने का हरसंभव प्रयास कर रही थी, लेकिन विधि के विधान को कुछ और ही मंजूर था।
रविवार देर शाम दीपक कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सेना के अधिकारियों ने सोमवार सुबह उनके परिजनों को इस हृदयविदारक घटना की सूचना दी।

​परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

​जवान दीपक कुमार जेठी अपने पीछे एक भरा-पूरा लेकिन अब बिखरा हुआ परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में पत्नी रीना जेठी, 5 वर्षीय मासूम बेटा काव्यांश, वृद्ध माता और दो बड़े भाई हैं। दीपक के पिता भवान सिंह का पूर्व में ही देहांत हो चुका है।

​वर्तमान में दीपक का परिवार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निवास कर रहा था। जैसे ही शहादत की खबर लखनऊ और उनके पैतृक गांव ओझा मल्ला पहुंची, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मासूम काव्यांश को तो शायद अभी यह भी आभास नहीं है कि उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।

​सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

​शहीद जवान का पार्थिव शरीर दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा उनके पैतृक गांव पिथौरागढ़ लाया जा रहा है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र के लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ेंगे।
​अंतिम विदाई: दीपक कुमार जेठी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक घाट हंसेश्वर घाट पर किया जाएगा। यहाँ सेना की टुकड़ी उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देगी और पूरे सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ उन्हें पंचतत्व में विलीन किया जाएगा।

​देवभूमि में पसरा सन्नाटा

​उत्तराखंड की मिट्टी का सैन्य इतिहास गौरवशाली रहा है, लेकिन रह-रहकर आने वाली ऐसी खबरें पहाड़ों को गमगीन कर देती हैं। अस्कोट और पिथौरागढ़ के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दीपक कुमार के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
​देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर जवान की कमी कभी पूरी नहीं की जा सकेगी। आज पूरा उत्तराखंड और देश दीपक कुमार जेठी की शहादत को नमन कर रहा है।

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मुख्य बिंदु: एक नजर में

विवरण
जानकारी
जवान का नाम
दीपक कुमार जेठी
रेजीमेंट
7 कुमाऊं रेजीमेंट
निवासी
ओझा मल्ला गांव, अस्कोट (पिथौरागढ़)
तैनाती स्थल
सियाचिन ग्लेशियर
निधन का स्थान
आरआर अस्पताल, दिल्ली
परिवार
पत्नी, 5 साल का बेटा, मां और दो भाई
अंतिम संस्कार
हंसेश्वर घाट (सैन्य सम्मान के साथ)

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