नोएडा (उत्तर प्रदेश): दिल्ली से सटे औद्योगिक शहर नोएडा में सोमवार की सुबह हिंसा और हंगामे के नाम रही। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे निजी कंपनियों के कर्मचारियों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। वेतन वृद्धि (Salary Hike) की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कों पर जाम लगाया, बल्कि पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाया और कई निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए जिले के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात हैं।
सुबह-सुबह रणक्षेत्र बना सेक्टर-60 और 62
सप्ताह के पहले दिन सोमवार को जब लोग अपने दफ्तरों के लिए निकल रहे थे, तभी नोएडा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों—सेक्टर 60, 62, 63 और फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में हजारों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले काफी समय से वे न्यूनतम वेतन और इंक्रीमेंट की मांग कर रहे हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन उनकी बातों को अनसुना कर रहा है।
देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। सेक्टर-60 मेट्रो स्टेशन के पास प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। उग्र भीड़ ने वहां खड़ी एक पुलिस जीप को पलट दिया और उसमें तोड़फोड़ की। इसके अलावा, फेज-2 स्थित मदरसन फैक्ट्री के पास भी प्रदर्शनकारियों ने संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया और कई वाहनों में आग लगा दी, जिससे आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया।
चार प्रमुख केंद्रों पर जबरदस्त विरोध
नोएडा पुलिस के मुताबिक, शहर के चार मुख्य स्थानों पर सबसे अधिक तनाव देखा गया:
- फेज-2 होजरी कॉम्प्लेक्स: यहाँ सबसे ज्यादा आगजनी और तोड़फोड़ की खबरें आईं।
- सेक्टर-60 मेट्रो स्टेशन: यहाँ भीड़ ने मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया।
- सेक्टर-62 गोल चक्कर: नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर के पास स्थित इस इलाके में जाम की वजह से यातायात पूरी तरह ठप रहा।
- सेक्टर-63 फैक्ट्री परिसर: यहाँ सुरक्षा कारणों से कई फैक्ट्रियों के गेट बंद करने पड़े।
आम जनता और ऑफिस जाने वालों को हुई भारी परेशानी
सोमवार का दिन होने के कारण नोएडा के इन सेक्टरों से गुजरने वाले कामकाजी लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सेक्टर-60 और 62 के बीच की मुख्य सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए चक्काजाम के कारण एम्बुलेंस और स्कूल बसें भी काफी देर तक फंसी रहीं। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के आगे व्यवस्था बौनी नजर आई।
पुलिस प्रशासन का पक्ष और कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्र भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पीएसी और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।
अपर पुलिस आयुक्त ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त बल सुनिश्चित किया गया है। हम श्रमिकों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार श्रमिक संगठनों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच वार्ता कराने का प्रयास कर रहे हैं। उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन फिलहाल हमारी प्राथमिकता शांति व्यवस्था बनाए रखना है।”
पुलिस ने स्पष्ट किया कि स्थिति को काबू में करने के लिए ‘न्यूनतम बल’ का प्रयोग किया गया है और फिलहाल हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में हैं। पुलिस सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भी नजर रख रही है और लोगों से उन पर ध्यान न देने की अपील की गई है।
क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में उनका वेतन स्थिर बना हुआ है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- न्यूनतम वेतन में तत्काल प्रभाव से वृद्धि की जाए।
- सालों से लंबित प्रमोशन और इंक्रीमेंट को लागू किया जाए।
- ओवरटाइम के भुगतान में पारदर्शिता लाई जाए।
- फैक्ट्री परिसरों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों में सुधार हो।
आगे की राह
फिलहाल, नोएडा के इन सेक्टरों में तनाव बरकरार है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कुछ रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया है। फैक्ट्री मालिकों और मजदूर यूनियनों के बीच सुलह की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, जिस तरह से सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में पुलिस दंगाइयों की पहचान कर उन पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है।










