हाइलाइट्स:
- तनाव का केंद्र: असम का दक्षिण सालमारा-मनकाचर अंतरराष्ट्रीय सीमा सेक्टर।
- ताजा स्थिति: ‘नो-मैन्स लैंड’ में 2 बच्चों और 2 महिलाओं सहित 9 बांग्लादेशी नागरिक फंसे।
- राजनयिक गतिरोध: भारत की बीएसएफ (BSF) और बांग्लादेश की बीजीबी (BGB) के बीच फ्लैग मीटिंग रही बेनतीजा।
- सख्त रुख: असम पुलिस और बीएसएफ ने पिछले दिनों 21 घुसपैठियों को खदेड़ा; सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने सुरक्षा बलों को सराहा।
गुवाहाटी/मनकाचर:
भारत और बांग्लादेश के बीच लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक बार फिर गंभीर गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई है। असम के सामरिक रूप से संवेदनशील दक्षिण सालमारा-मनकाचर सेक्टर में पिछले दो दिनों से भारी तनाव देखा जा रहा है। यहाँ दोनों देशों की सीमाओं को विभाजित करने वाले ‘नो-मैन्स लैंड’ (निर्जन क्षेत्र) में कुल 9 बांग्लादेशी नागरिक फंसे हुए हैं।
भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने इन्हें देश की सीमा में प्रवेश करने से पूरी तरह रोक दिया है, वहीं दूसरी तरफ बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने इन नागरिकों को अपना मानने और अपने देश में वापस लेने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। इस अड़ियल रुख के कारण सीमा पर दोनों सुरक्षा बलों के बीच तनाव चरम पर है।
फ्लैग मीटिंग बेनतीजा, गतिरोध सुलझाने के प्रयास जारी
सीमा पर पैदा हुए इस मानवीय और सुरक्षा संकट को सुलझाने के लिए रविवार को बीएसएफ और बीजीबी के स्थानीय कमांडरों के बीच कई दौर की फ्लैग मीटिंग्स आयोजित की गईं। हालांकि, सीमा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लंबी और गहन बातचीत के बाद भी यह बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही। बीजीबी अधिकारियों ने इन नागरिकों की राष्ट्रीयता के प्रमाणीकरण को लेकर पेंच फंसा दिया है, जिससे यह गतिरोध गहरा गया है।
बीएसएफ के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर शांति व्यवस्था बनाए रखने और इस जटिल मुद्दे का कानूनी व राजनयिक समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों के बीच आज यानी सोमवार को फिर से एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। भारतीय अधिकारी इस बात पर अड़े हैं कि पकड़े गए लोग बांग्लादेशी हैं और उन्हें नियमानुसार वापस जाना ही होगा।
रविवार सुबह से शुरू हुआ तनाव, वीडियो वायरल
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम रविवार सुबह तड़के करीब 5 बजे सामने आया जब मनकाचर के सहापारा और झालोरचार इलाकों में सीमा के करीब संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। दोनों देशों की कंटीली तारों के बीच स्थित नो-मैन्स लैंड में 9 लोग असहाय स्थिति में बैठे पाए गए, जिनमें दो महिलाएं और दो छोटे बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इस बीच, सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में नो-मैन्स लैंड में फंसा एक युवक रोते हुए और हाथ जोड़कर गुहार लगाता दिख रहा है। वह स्पष्ट रूप से कह रहा है, “हम सभी बांग्लादेश के नागरिक हैं। हम काम और मजदूरी के सिलसिले में भारत आए थे।
हमारे पास बांग्लादेशी होने के पुख्ता कानूनी दस्तावेज भी मौजूद हैं। हमें भले ही यहाँ मार दिया जाए या नदी में फेंक दिया जाए, लेकिन हम वापस भारत की मुख्य भूमि पर नहीं जाएंगे, हमें अपने वतन जाने दिया जाए।” वीडियो में अन्य लोगों को भी बदहवास स्थिति में रोते हुए देखा जा सकता है, जो दलालों के जरिए सीमा पार करने की बात स्वीकार कर रहे हैं।
बीएसएफ और असम पुलिस का ‘नो इनफिल्ट्रेशन’ अभियान
पिछले कुछ हफ्तों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की कोशिशों में अचानक तेजी आई है, जिसे देखते हुए बीएसएफ और स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा चक्र को बेहद कड़ा कर दिया है। इसी कड़ी में पिछले सप्ताह असम पुलिस और बीएसएफ की एक संयुक्त टीम ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान 21 बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया और उन्हें वापस खदेड़ दिया।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सीमा पर तैनात जवानों और राज्य पुलिस की मुस्तैदी की जमकर सराहना की है। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा:
”सीमाओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। असम पुलिस और बीएसएफ के बेहतरीन संयुक्त प्रयासों से 21 घुसपैठियों की त्वरित पहचान की गई और उन्हें भारत में प्रवेश करने से सफलतापूर्वक रोका गया। हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए हमारा बहुआयामी दृष्टिकोण लगातार जारी रहेगा।”
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल असम की सीमा को सील करने से घुसपैठ पूरी तरह नहीं रुकेगी, क्योंकि घुसपैठिए अक्सर पड़ोसी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा या मेघालय की छिद्रपूर्ण (porous) सीमाओं का फायदा उठाकर असम में दाखिल होने की फिराक में रहते हैं। इसलिए सभी सीमावर्ती राज्यों को मिलकर सख्त कदम उठाने होंगे।
सीमा प्रबंधन और राजनयिक चुनौतियां
मनकाचर सेक्टर भौगोलिक रूप से नदी और मैदानी इलाकों से जुड़ा होने के कारण हमेशा से मानव तस्करी, मवेशी तस्करी और अवैध घुसपैठ के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में बीएसएफ और बीजीबी के बीच महानिदेशक (DG) स्तर की द्विपक्षीय सीमा समन्वय बैठक संपन्न हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और अवैध क्रॉसिंग को रोकने के लिए रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर सहमति जताई थी।
इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर इस तरह के मामलों में बांग्लादेशी बल (BGB) का टालमटोल वाला रवैया दोनों देशों के सीमा प्रबंधन के दावों पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल, नो-मैन्स लैंड में फंसे इन 9 नागरिकों के भाग्य का फैसला आज होने वाली फ्लैग मीटिंग के नतीजों और दोनों देशों के बीच होने वाले राष्ट्रीयता सत्यापन (Nationality Verification) की प्रक्रिया के बाद ही तय हो सकेगा। दोनों तरफ के सीमावर्ती गांवों में एहतियातन सतर्कता बढ़ा दी गई है।











