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​’नाविकों की सुरक्षा जरूरी’: ट्रंप के बगल में बैठकर पीएम मोदी ने उठाया जहाजों पर हमले का मुद्दा; बोले- बातचीत और कूटनीति से ही निकलेगा समाधान

On: June 17, 2026 6:34 AM
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​एवियन (फ्रांस): फ्रांस के खूबसूरत एवियन रिसॉर्ट में आयोजित हो रहे जी7 (G7) शिखर सम्मेलन के मंच से एक बेहद बड़ी और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज़ पर अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत के कुछ ही दिनों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को बेहद मजबूती से उठाया है।

मंगलवार को जी7 शिखर सम्मेलन के एक विशेष सत्र के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ठीक बगल वाली सीट पर बैठे पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि वैश्विक संघर्षों का स्थायी समाधान केवल बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही संभव है। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर वकालत की।

​G7 के विशेष सत्र में पीएम मोदी का कड़ा रुख

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 समिट के उस सत्र को संबोधित करते हुए यह महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसका मुख्य विषय “नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करना” रखा गया था। दिलचस्प बात यह है कि यह सत्र ईरान और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बनने के ठीक दो दिन बाद आयोजित हुआ।

अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस सत्र में भारत के अलावा ब्राजील, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे दुनिया के अन्य प्रमुख सहयोगी देशों को भी विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया थाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ठीक बगल में बैठे

पीएम मोदी ने बिना किसी हिचकिचाहट के समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा:

“समुद्री रास्तों के जरिए दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें हर हाल में यह पक्का करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहें, ताकि नाविक बिना किसी डर या जीवन के खतरे के अपना काम कर सकें। भारत इन वैश्विक मुद्दों पर अपने सभी सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और तैयार है।”

​ओमान तट की घटना और भारतीय नाविकों की मौत की पृष्ठभूमि

​प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पिछले हफ्ते ओमान के तट के पास समुद्र में एक बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिला था। दरअसल, अमेरिकी नौसेना ने ओमान के तट के पास तीन ऐसे कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया था, जिन पर आरोप था कि वे अमेरिकी नाकेबंदी (Blockade) का उल्लंघन करने या उससे बचने की कोशिश कर रहे थे।

इन जहाजों पर 65 से भी ज्यादा भारतीय क्रू मेंबर (नाविक) सवार थे।इसी सैन्य कार्रवाई के दौरान जब अमेरिकी विमान ने ‘MT Settebello’ नामक ऑयल टैंकर पर हमला किया, तो उसकी चपेट में आने से तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की मौत हो गई। इस घटना के बाद से ही भारत में इस मुद्दे को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई थीं। पीएम मोदी ने ट्रंप के साथ होने वाली अपनी औपचारिक द्विपक्षीय (Bilateral) बैठक से ठीक एक दिन पहले जी7 के इस साझा सत्र में इस संवेदनशील मुद्दे को उठाकर अमेरिका को एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश दे दिया है।

​पश्चिम एशिया में शांति के प्रयासों का स्वागत और आर्थिक चिंताएं

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया (मिडिल-ईस्ट) क्षेत्र में शांति बहाली के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों और प्रगति का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुख भी व्यक्त किया कि इस पूरे क्षेत्र में जारी संघर्षों और हालिया सैन्य कार्रवाइयों के कारण कई निर्दोष भारतीय नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, साथ ही भारत के मित्र देशों को भी बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है।

.पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का जिक्र करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होने वाले वैश्विक व्यापार में किसी भी तरह की रुकावट या हमला सीधे तौर पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। ऊर्जा आयात (Energy Imports) और व्यापारिक जहाजों के अवरुद्ध होने से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा होती है, जिससे विकासशील देशों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।

​’भरोसे पर आधारित साझेदारी ही एकमात्र रास्ता’

​दुनिया के सामने खड़ी वर्तमान साझा चुनौतियों से निपटने के लिए भरोसेमंद वैश्विक एकजुटता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा, “भारत का यह दृढ़ और स्पष्ट विश्वास है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में चल रहे तनाव, टकराव या युद्धों का कोई भी सैन्य समाधान नहीं हो सकता। इनका स्थायी और न्यायसंगत समाधान केवल आपसी बातचीत, प्रभावी कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहकर सहयोग करने से ही निकाला जा सकता है।”

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​इस सत्र के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें अगले दिन होने वाली पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं, जहां उम्मीद जताई जा रही है कि भारत अपने नाविकों की सुरक्षा और ऊर्जा हितों को लेकर और अधिक विस्तार से चर्चा कर सकता है।

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