कुवैत सिटी/तेहरान। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी के बीच, ईरान ने कुवैत की सबसे महत्वपूर्ण मीना अल-अहमदी (Mina Al-Ahmadi) तेल रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला किया है। इस हमले के बाद रिफाइनरी की कई प्रमुख इकाइयों में आग लग गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (Global Oil Supply Chain) पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनियों और ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में देखा जा रहा है।
शुक्रवार की सुबह ड्रोन से दहला कुवैत
कुवैत की राष्ट्रीय तेल कंपनी, कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (KPC) के अनुसार, शुक्रवार तड़के ईरान की ओर से आए आत्मघाती ड्रोनों ने मीना अल-अहमदी रिफाइनरी को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रिफाइनरी परिसर में एक के बाद एक कई धमाके हुए, जिसके बाद आसमान में धुएं का काला गुबार और आग की ऊंची लपटें देखी गईं।
सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, रिफाइनरी की कई ऑपरेशनल यूनिट्स इस हमले की चपेट में आई हैं। हालांकि, कुवैत की फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी रिस्पांस टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं, लेकिन तेल और रसायनों की मौजूदगी के कारण आग पर काबू पाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई: 8 पुलों को उड़ाने की धमकी
मिडिल ईस्ट में इस ताज़ा तनाव की जड़ अमेरिका द्वारा ईरान के एक सबसे ऊंचे और रणनीतिक ब्रिज (पुल) पर किए गए हमले को माना जा रहा है। इस कार्रवाई से तेहरान बुरी तरह भड़का हुआ है। ईरानी सैन्य कमांडरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब खामोश नहीं बैठेंगे। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह खाड़ी देशों के 8 प्रमुख पुलों को निशाना बनाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र का परिवहन और रसद तंत्र ठप हो सकता है।
सऊदी अरब ने नाकाम किए 5 ड्रोन हमले
ईरान की आक्रामकता सिर्फ कुवैत तक सीमित नहीं रही। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) ने ईरान की ओर से भेजे गए 5 ड्रोनों को इंटरसेप्ट कर हवा में ही नष्ट कर दिया। इनमें से चार ड्रोन को शुरुआत में ही रोक लिया गया था, जबकि पांचवें ड्रोन को देर रात मार गिराया गया। सऊदी अरब ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाज़ार पर असर
मीना अल-अहमदी रिफाइनरी कुवैत का सबसे बड़ा तेल प्रोसेसिंग केंद्र है। यहाँ से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल को रिफाइन कर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भेजा जाता है। इस हमले के कारण उत्पादन ठप होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। यदि ईरान इसी तरह खाड़ी के तेल केंद्रों को निशाना बनाता रहा, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की ‘आक्रामकता’ और ईरान का रुख
अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनके ‘सख्त’ बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। ईरानी विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की “लापरवाह आक्रामकता” और अपमानजनक भाषा ने ईरान को सैन्य रूप से और अधिक जुझारू बना दिया है।
हाल ही में ‘फॉरेन अफेयर्स’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के भीतर एक बड़ा वर्ग युद्ध के पक्ष में नहीं है, लेकिन वे अपनी सेना और राष्ट्रीय स्वाभिमान के साथ समझौता करने को भी तैयार नहीं हैं। ईरान की स्पष्ट शर्त है कि यदि कोई शांति योजना बनती है, तो वह उसके राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होनी चाहिए, न कि किसी विदेशी दबाव में।
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निष्कर्ष
कुवैत पर हुआ यह हमला इस बात का प्रमाण है कि मिडिल ईस्ट की आग अब इजरायल-फिलिस्तीन से निकलकर खाड़ी के अन्य देशों तक फैल चुकी है। अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब और कुवैत के बीच का यह शक्ति संतुलन (Power Balance) पूरी तरह बिगड़ चुका है। यदि कूटनीतिक स्तर पर जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो यह ‘ड्रोन युद्ध’ एक पूर्ण पैमाने के क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) में तब्दील हो सकता है, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना होगा।











