देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत ने खाद्य व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। शहर के होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के सामने एक तरफ ग्राहकों की मांग पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ ईंधन की अनुपलब्धता के कारण उनके चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। इस संकट ने न केवल व्यापार को प्रभावित किया है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
व्यापार मंडल की आपात बैठक: उभरा व्यापारियों का आक्रोश
बुधवार को दून वेली महानगर उद्योग व्यापार मंडल के मुख्यालय में होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायियों की एक महत्वपूर्ण आपात बैठक बुलाई गई। बैठक का मुख्य एजेंडा कमर्शियल सिलेंडर की बाधित आपूर्ति और उससे उत्पन्न होने वाला आर्थिक संकट था। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों और व्यवसायियों ने एक स्वर में कहा कि पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग ठप है, जिससे उनके दैनिक कामकाज में भारी बाधा आ रही है।
व्यापारियों ने प्रशासन और गैस एजेंसियों के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि आपूर्ति व्यवस्था को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन अपने प्रतिष्ठानों पर ताले लटकाने पड़ेंगे।
आर्थिक तंगी और बंदी की आशंका
होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशन के सदस्यों ने बैठक में अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर के अभाव में वे मांग के अनुरूप खाना तैयार नहीं कर पा रहे हैं। कई ढाबा संचालकों ने बताया कि उन्हें ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर गैस खरीदने की कोशिश करनी पड़ रही है या फिर काम बंद करना पड़ रहा है।
व्यवसायियों के अनुसार:
- लागत में वृद्धि: गैस न मिलने से वैकल्पिक संसाधनों का उपयोग महंगा पड़ रहा है।
- कर्मचारियों का वेतन: अगर दुकान बंद होती है, तो होटल में काम करने वाले वेटर्स, शेफ और सफाई कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल हो जाएगा।
- पर्यटन पर असर: देहरादून एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है, ऐसे में रेस्टोरेंट्स का बंद होना शहर की छवि और राजस्व दोनों को नुकसान पहुँचाएगा।
पंकज मैसोंन की अपील: संयम और विकल्प पर जोर
बैठक के दौरान दून वेली महानगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष और राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड उत्तराखंड के सदस्य पंकज मैसोंन अपरिहार्य कारणों से स्वयं उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने फोन के माध्यम से व्यापारियों से सीधा संवाद किया।
मैसोंन ने व्यापारियों की समस्याओं को जायज ठहराते हुए अपील की कि:
- सीमित उपयोग: वर्तमान संकट को देखते हुए गैस का उपयोग बेहद सावधानी और कम से कम करें।
- इलेक्ट्रॉनिक विकल्प: जहाँ संभव हो, वहाँ इंडक्शन कुकर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सहारा लें ताकि काम पूरी तरह न रुके।
- धैर्य: उन्होंने व्यापारियों को ढांढस बंधाया कि संगठन उनके साथ खड़ा है और इस समस्या को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की तैयारी
व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया है कि वे इस संकट को ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं करेंगे। पंकज मैसोंन ने आश्वासन दिया कि यदि अगले दो-तीन दिनों के भीतर गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होती है, तो व्यापार मंडल का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। व्यापारियों की मांग है कि सरकार तेल कंपनियों और गैस वितरकों को सख्त निर्देश दे ताकि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर किया जा सके।
मंडल के युवा महामंत्री दिव्य सेठी ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि व्यापारियों का हित सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क साधा जा रहा है ताकि किल्लत के पीछे के तकनीकी या प्रशासनिक कारणों का पता लगाया जा सके।
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निष्कर्ष: समाधान की उम्मीद
देहरादून का खाद्य बाजार शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि कमर्शियल गैस की कमी इसी तरह बनी रही, तो इसका असर आम जनता की जेब पर भी पड़ेगा क्योंकि खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। फिलहाल, व्यापारी वर्ग सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस ईंधन संकट से निपटने के लिए कितनी जल्दी प्रभावी कदम उठाता है।









