भीमताल/नैनीताल।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद अपने चार दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर गुरुवार शाम सरोवर नगरी के निकटवर्ती पर्यटन स्थल भीमताल पहुंचे। देवभूमि के शांत वातावरण और आध्यात्मिक केंद्रों के दर्शन हेतु तय इस प्रवास के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। पूर्व राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल व्यक्तिगत प्रवास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके आध्यात्मिक पहलू भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
प्रशासन ने संभाली कमान: भीमताल के ‘कंट्री इन’ में रात्रि विश्राम
गुरुवार शाम करीब 3:50 बजे जब पूर्व राष्ट्रपति का काफिला भीमताल पहुंचा, तो स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने उनकी अगवानी की। उनका रात्रि विश्राम भीमताल स्थित प्रसिद्ध ‘कंट्री इन’ रिसॉर्ट में तय किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) भीमताल ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि पूर्व राष्ट्रपति के प्रवास को देखते हुए रिसॉर्ट और उसके आसपास के क्षेत्रों में विशेष प्रोटोकॉल लागू किया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि प्रवास के दौरान पूर्व राष्ट्रपति की निजता (Privacy) और गोपनीयता का पूरी तरह से सम्मान किया जाए। सुरक्षा कारणों से ‘कंट्री इन’ रिसॉर्ट के आसपास आम नागरिकों और बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, जिला पुलिस के अलावा खुफिया विभाग की विशेष टीमें भी चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही हैं।
पंतनगर से भीमताल तक का सफर
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद का उत्तराखंड आगमन गुरुवार दोपहर को हुआ। वह दोपहर करीब 1:00 बजे विशेष विमान से पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से वह सड़क मार्ग द्वारा काठगोदाम होते हुए पहाड़ों की वादियों में स्थित भीमताल के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा ताकि यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे और वीआईपी मूवमेंट में कोई बाधा न आए।
आध्यात्मिक यात्रा: राम चंद्र मिशन और सतखोल का कार्यक्रम
पूर्व राष्ट्रपति का यह दौरा केवल भीमताल तक सीमित नहीं है। उनके कार्यक्रम का मुख्य केंद्र आध्यात्मिक शांति और ध्यान है।
* शुक्रवार का कार्यक्रम: निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, शुक्रवार सुबह 10:00 बजे पूर्व राष्ट्रपति भीमताल स्थित ‘कंट्री इन’ से चेक-आउट करेंगे। यहाँ से उनका काफिला मल्ला रामगढ़ के लिए प्रस्थान करेगा।
* सतखोल आश्रम: मल्ला रामगढ़ के रास्ते वह सतखोल स्थित सुप्रसिद्ध ‘राम चंद्र मिशन हिमालयन आश्रम’ पहुंचेंगे। यह आश्रम अपनी शांति और ध्यान (Meditation) पद्धतियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। माना जा रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति यहाँ कुछ समय मौन और साधना में व्यतीत करेंगे।
8 मार्च को दिल्ली वापसी
चार दिनों के इस शांतिपूर्ण प्रवास के समापन के बाद, पूर्व राष्ट्रपति 8 मार्च को अपनी वापसी यात्रा शुरू करेंगे। वह उसी सड़क मार्ग (सतखोल-रामगढ़-भीमताल-हल्द्वानी) से होते हुए वापस पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहाँ से वह दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे।
विशेष सुरक्षा और सतर्कता
चूँकि राम नाथ कोविंद देश के पूर्व प्रथम नागरिक हैं, इसलिए उनके उत्तराखंड प्रवास को लेकर जिला प्रशासन किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरत रहा है।
* स्वास्थ्य विभाग: भीमताल और रामगढ़ के स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है और एक मेडिकल टीम उनके साथ तैनात है।
* खुफिया तंत्र: स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) को सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी अनधिकृत गतिविधि को रोका जा सके।
* ट्रैफिक मैनेजमेंट: भीमताल-हल्द्वानी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है ताकि उनके काफिले को सुरक्षित मार्ग मिल सके।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड हमेशा से ही राष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपतियों के लिए पसंदीदा गंतव्य रहा है। राम नाथ कोविंद का यह दौरा भी इसी कड़ी का हिस्सा है। भीमताल और सतखोल जैसे शांत स्थलों का चयन यह दर्शाता है कि वह भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर हिमालय की गोद में आध्यात्मिक ऊर्जा संचय करने आए हैं।
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