उत्तराखंड में भूमि मालिकों के लिए बड़ी राहत — अब भूमि के बदले विकसित भूमि, न मिलने पर सर्किल रेट का तीन गुना मुआवजा - Doonprimenews
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उत्तराखंड में भूमि मालिकों के लिए बड़ी राहत — अब भूमि के बदले विकसित भूमि, न मिलने पर सर्किल रेट का तीन गुना मुआवजा

On: December 11, 2025 4:28 AM
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उत्तराखंड सरकार ने राज्य में बड़े स्तर पर औद्योगिक विकास, नए शहरों की स्थापना और आधुनिक शहरी ढांचे के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए भूमि अधिग्रहण का अमरावती (आंध्र प्रदेश) मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है। इस मॉडल के तहत भूमि स्वामियों को भूमि के बदले भूमि देने की व्यवस्था की गई है, जिससे अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी और लाभदायक बनेगी।

सरकार द्वारा तैयार किए गए इस फॉर्मूले में भूमि मालिकों की सहमति को प्राथमिकता दी गई है और उन्हें अधिकतम लाभ दिलाने पर जोर दिया गया है।

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क्या है नई नीति?

1. भूमि के बदले विकसित भूमि

भूमि पूलिंग स्कीम के तहत भू-स्वामियों से कृषि या अविकसित भूमि ली जाएगी और इसके बदले उन्हें विकसित आवासीय या वाणिज्यिक भूमि दी जाएगी।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

  • 24% विकसित आवासीय भूमि भू-स्वामी को मिलेगी।
  • यदि कोई मालिक वाणिज्यिक जमीन चाहता है तो उसे 7% विकसित वाणिज्यिक भूमि प्रदान की जाएगी।
  • और यदि वाणिज्यिक भूमि नहीं ली जाती है, तो मालिक को 14% अतिरिक्त आवासीय भूमि का विकल्प दिया जाएगा।

विकसित प्लाट न मिलने पर बड़ा मुआवजा

यदि किसी कारण से प्राधिकरण भू-स्वामी को विकसित प्लॉट देने में सक्षम नहीं होता, तो मुआवजा सामान्य से कहीं अधिक रखा गया है—

  • आवासीय प्लॉट के बदले: सर्किल रेट का दो गुना
  • वाणिज्यिक प्लॉट के बदले: सर्किल रेट का तीन गुना

यह निर्णय भूमि मालिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा और अधिग्रहण के प्रति उनकी चिंताओं को कम करेगा।


भूमि सौंपने पर मासिक सहायता भी

लैंड पूलिंग स्कीम में शामिल हर भूमि स्वामी को भूमि सौंपने की तिथि से अधिकतम तीन वर्ष तक आर्थिक सहायता दी जाएगी—

  • गैर-कृषि भूमि पर: ₹12 प्रति वर्गमीटर प्रति माह
  • कृषि भूमि पर: ₹6 प्रति वर्गमीटर प्रति माह
    यह राशि तब तक मिलेगी, जब तक मालिक को उसके आवंटित प्लॉट का स्वीकृत नक्शा (प्लान) नहीं मिल जाता।

दिल्ली–हरियाणा मॉडल की तर्ज पर उत्तराखंड आगे

अधिकारियों के अनुसार दिल्ली में लैंड पूलिंग नीति से लगभग 20,000 हेक्टेयर भूमि विकसित हुई, जिससे 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आया। हरियाणा में भी उद्योग और शहरी विस्तार इसी मॉडल पर सफल हुए।
इन्हीं परिणामों को देखते हुए उत्तराखंड ने भी अपनी लैंड पूलिंग स्कीम में संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया है।

इस स्कीम का उद्देश्य—

  • बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
  • नए शहर और सैटेलाइट टाउन्स
  • योजनाबद्ध शहरी विस्तार
    के लिए मजबूत ढांचा तैयार करना है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक योजना है जहां भू-स्वामी स्वयं की इच्छा से भूमि देंगे।

लैंड पूलिंग प्रक्रिया ऐसे आगे बढ़ेगी

  1. संभावित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
  2. भू-सीमा निर्धारण कर स्कीम की बाउंड्री तय होगी।
  3. अथॉरिटी ड्राफ्ट लेआउट और भौतिक सर्वे करेगी।
  4. जन-सुनवाई व हितधारक परामर्श होंगे।
  5. आवेदन स्वीकार कर उनकी जांच की जाएगी।
  6. स्वीकृति के बाद अंतिम लैंड पूलिंग स्कीम प्रकाशित होगी।
  7. मूल भूमि का भौतिक कब्ज़ा प्राधिकरण को सौंपा जाएगा।
  8. भूमि स्वामियों को विकसित प्लॉट देने के लिए डीड निष्पादित होगी।
  9. इसके बाद स्कीम पूर्ण रूप से लागू कर दी जाएगी।

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