उत्तराखंड में फर्जी निवास प्रमाण पत्र रैकेट का पर्दाफाश, बाहरी लोगों को ‘स्थायी निवासी’ बनाने का खेल बेनकाब - Doonprimenews
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उत्तराखंड में फर्जी निवास प्रमाण पत्र रैकेट का पर्दाफाश, बाहरी लोगों को ‘स्थायी निवासी’ बनाने का खेल बेनकाब

On: November 14, 2025 6:24 AM
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हल्द्वानी में एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है जो दूसरे राज्यों के लोगों के लिए उत्तराखंड का फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र तैयार कर रहा था। यह गिरोह स्थानीय निवासियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बाहर से आने वालों को उत्तराखंडी बताने का अवैध खेल चला रहा था। कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत को जनसुनवाई के दौरान इसकी शिकायत मिली, जिसके बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में तहसील कर्मचारियों से लेकर कुछ सरकारी विभागों की मिलीभगत सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि इस तरह की हेराफेरी के जरिए प्रदेश की जनसांख्यिकी को प्रभावित करने की साजिश रची जा रही है।
शिकायत के बाद आयुक्त स्वयं बनभूलपुरा पहुंचे, जहां पता चला कि उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी रईस और जलीस के नाम पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह थी कि उसी इलाके में पहले से रह रहे रईस और जलीस नाम के लोगों के दस्तावेजों का उपयोग कर यह सारा खेल किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कई और फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए जाने की आशंका है, जिसे लेकर सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जनसुनवाई के दौरान बनभूलपुरा निवासी रईस ने बताया कि उसके नाम और कागज़ों का इस्तेमाल कर किसी बाहरी व्यक्ति को स्थायी निवास जारी कर दिया गया। यह सुनकर आयुक्त ने तुरंत जांच शुरू की और गुरुवार को पुलिस व प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि तहसील के अरायजनवीस फैजान मिकरानी ने बरेली से आए रईस और जलीस के लिए फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र तैयार किया था। फैजान के घर से बड़ी संख्या में आधार कार्ड, बिजली के बिल और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए गए। जिस कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से फर्जी प्रमाण पत्र बनाया गया था, वह भी बंद मिला।
आयुक्त की जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी प्रमाण पत्रों को पटवारियों ने ऑनलाइन सत्यापित किया है, जिससे सरकारी विभागों की मिलीभगत स्पष्ट होती है। इसके बाद आयुक्त ने एसडीएम को मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए और संबंधित अरायजनवीस का लाइसेंस खंगालने, साथ ही बिना लाइसेंस काम करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एसडीएम राहुल शाह को FIR दर्ज करवाने और सीओ सिटी नितिन लोहनी को आरोपितों से पूछताछ करने को कहा गया है।
जांच में यह तरीका सामने आया कि आरोपित अरायजनवीस पीड़ित के मोबाइल नंबर पर ओटीपी मंगाकर एक फर्जी ईमेल आईडी बनाता था, और उसी ईमेल से बाहरी व्यक्तियों का स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाता था। यही तरीके का उपयोग आय प्रमाणपत्र बनाने आए देवेंद्र पांडे के मामले में भी किया गया। इतना ही नहीं, ऊर्जा निगम के एक कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जो फैजान को बिजली के बिल उपलब्ध कराता था। इन बिलों को मिलते-जुलते नाम वाले लोगों के नाम पर स्थायी निवास तैयार कराने में इस्तेमाल किया जाता था। फैजान के पास से बड़ी संख्या में बिजली के बिल भी बरामद हुए हैं।
पूरा मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर जनसांख्यिकीय और सुरक्षा खतरे के रूप में देखते हुए बड़े स्तर पर जांच शुरू कर दी है।

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