ऋषिकेश में उत्तराखंड का पहला कांच वाला बजरंग सेतु अब अपने अंतिम चरण में है। लगभग 90 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है और मात्र 10 फीसदी काम शेष रह गया है। संभावना है कि जनवरी माह तक यह सेतु श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। शुक्रवार को प्रदेश के लोक निर्माण, पर्यटन, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने स्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
68 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहा आधुनिक सेतु
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि यह वैकल्पिक पुल लक्ष्मणझूला (निर्मित 1929) के समीप तैयार किया जा रहा है।
सेतु की कुल लंबाई 132.30 मीटर स्पान है।
परियोजना पर कुल लागत 68 करोड़ 86 लाख 20 हजार रुपये आंकी गई है।
पुल के दोनों छोर पर पेंटिंग और फिनिशिंग का कार्य तेजी से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि इस सेतु के बन जाने से स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों को आने-जाने में बड़ी सुविधा मिलेगी और क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
घाट और आस्था पथ का भी हो रहा निर्माण
निरीक्षण के दौरान सतपाल महाराज ने नरेन्द्रनगर विकास खंड के तपोवन क्षेत्र में बन रहे घाट और आस्था पथ का जायजा भी लिया।
1219.93 लाख रुपये की लागत से यह कार्य मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत SASCI 2024-25 मद से कराया जा रहा है।
सच्चाधाम घाट (गऊ घाट) की लंबाई 100 मीटर और चौड़ाई 18 मीटर होगी।
घाट से सटे आस्था पथ को 300 मीटर लंबा और 7 मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए चेंजरूम, अप्रोच मार्ग, रेलिंग, बेंच और विद्युत व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्री के निर्देश
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता न हो। सभी कार्य मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित व आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।
माना जा रहा है कि यदि कार्य निर्धारित समय से पूरे हो गए तो जनवरी 2026 से बजरंग सेतु पर आवाजाही औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।









