देहरादून में हालिया आपदा ने ऐसी तबाही मचाई कि शहर और ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी पूरी तरह चरमरा गई। नदियों के उफान और बादल फटने की घटनाओं ने सड़कों से लेकर पुलों तक की बुनियाद हिला दी। आलम यह रहा कि केवल 24 घंटे के भीतर आठ पुल धराशायी हो गए, जबकि लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) अब अस्थाई इंतजाम कर यातायात बहाल करने की कोशिशों में जुटा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत बने कई पुलों को भी गंभीर क्षति पहुंची है।
24 घंटे में आठ पुल टूटे, टूटी कनेक्टिविटी
15–16 सितंबर को सिर्फ 24 घंटे की अवधि में देहरादून में आठ पुल क्षतिग्रस्त हो गए। जबकि पूरे राज्य में तीन माह के आपदाकाल में 19 पुलों को नुकसान हुआ था। इस घटना ने मानसून के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। जिन पुलों को दशकों तक सुरक्षित माना जा रहा था, वे नदियों के तेज बहाव के आगे ढह गए। नतीजा यह हुआ कि देहरादून के कई हिस्सों में संपर्क टूट गया और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।
पीएमजीएसवाई के पुल भी चपेट में
धूमाकोट में कलगड़ी और भटवाड़ी के धियागाड स्थित पुल पूरी तरह बह गए, जबकि 17 पुल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इनमें 9 पुल उत्तरकाशी और 8 पुल देहरादून क्षेत्र के हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत बने दो पुल पूरी तरह नष्ट हो गए और 17 अन्य को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इनकी मरम्मत का कार्य फिलहाल जारी है।
भारी मरम्मत लागत
क्षतिग्रस्त पुलों को दुरुस्त करने में करोड़ों रुपये का खर्च आने वाला है।
धारचूला का सोबला–उमचिया पुल: 6.3 करोड़ रुपये
जखोली का रणधार पुल: 5 करोड़ रुपये
साड असोला मोटर मार्ग पुल: 4.5 करोड़ रुपये
चमोली का देवाल–खेता पुल: 4 करोड़ रुपये
देहरादून का कार्लीगाड मझाड़ा पुल: 4 करोड़ रुपये
धराली का भागीरथी नदी पर 100 मीटर का सेतु: 3.3 करोड़ रुपये
राज्यभर में पुलों की स्थिति
पूरी तरह क्षतिग्रस्त पुल:
धूमाकोट – नयार नदी पर बना स्टील पुल
भटवाड़ी – धियागाड पैदल पुल
आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पुल (चयनित):
धराली – भागीरथी नदी पर पैदल सेतु
भटवाड़ी – गवाना गाड, हर्षिल, गदेरे, सौरा सिरौर, गजोली गाड क्षेत्र के पुल
चिन्याली सौड़ – खालसी गांव मोटर पुल
बड़कोट – स्यानाचट्टी कुपड़ा मार्ग सेतु
देहरादून क्षेत्र में प्रभावित पुल
मसूरी मार्ग – शिव मंदिर के पास का पुल
झाझरा स्थित पुल
कार्लीगाड मझाड़ा मोटर मार्ग पुल
ऋषिकेश – थानो भोगपुर मार्ग पुल
ऋषिकेश – भट्टोवाला मार्ग पुल
मालदेवता मार्ग पुल
ऋषिकेश – भानियावाला मार्ग पुल
फव्वारा चौक–अग्रवाल बेकर्स के बीच का पुल
विभाग की प्राथमिकता
लोनिवि विभागाध्यक्ष राजेश शर्मा के अनुसार, प्राथमिकता पुलों पर अस्थाई यातायात संचालन शुरू करने की है ताकि कनेक्टिविटी आंशिक रूप से बहाल हो सके। वर्षा थमते ही सड़क और पुलों की मरम्मत का काम तेजी से शुरू किया जाएगा। सभी क्षतिग्रस्त संरचनाओं को दुरुस्त कर दोबारा सुरक्षित बनाया जाएगा।
इस आपदा ने यह साफ कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने कई दशकों तक टिके रहने वाले ढांचे भी पलभर में ध्वस्त हो सकते हैं। देहरादून और आसपास के क्षेत्र अब राहत और पुनर्निर्माण की दिशा में संघर्ष कर रहे हैं।
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