Dehradun:फ्लैट की लालसा में राजपत्रित पिता ने बेटे-बहु व 4 वर्षीय पौती को बेदखल करने की रची साजिश, डीएम कोर्ट ने किया खारिज - Doonprimenews
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Dehradun:फ्लैट की लालसा में राजपत्रित पिता ने बेटे-बहु व 4 वर्षीय पौती को बेदखल करने की रची साजिश, डीएम कोर्ट ने किया खारिज

On: August 20, 2025 3:54 PM
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देहरादून, जिलाधिकारी न्यायालय में सुना गया एक मार्मिक प्रकरण समाज की प्रचलित सोच को झकझोर गया। राजपत्रित पद से सेवानिवृत्त एक पिता ने अपने ही अल्पवेतनभोगी बीमार बेटे, बहु और चार वर्षीय पौती को घर से बेदखल करने की योजना बनाई। पिता ने भरण-पोषण अधिनियम के तहत डीएम कोर्ट में वाद दायर किया, जिसमें बेटे-बहु पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए।

हालांकि, जांच में सामने आया कि पिता शारीरिक रूप से सक्षम हैं और माता-पिता की कुल मासिक आय 55 हजार रुपये है। वहीं, बेटा एक छोटी निजी नौकरी करके परिवार का पालन-पोषण करता है जिसकी आय मात्र 25 हजार रुपये है।

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डीएम ने किया कब्जा वापसी

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्य परखने के बाद डीएम ने पाया कि पिता ने निजी स्वार्थ और फ्लैट की लालसा में झूठा वाद दायर किया था। अदालत ने न केवल वाद को खारिज किया बल्कि बेटे-बहु को कब्जा भी वापिस दिलाया। महज दो सुनवाई में ही डीएम ने मामले का निस्तारण कर दिया।

“कानून की आड़ में लाचारों का हक नहीं छिनेगा”

डीएम ने स्पष्ट कहा कि “महज उम्रदराज होना बहु-बच्चों को बेघर करने का लाइसेंस नहीं है। कानून की आड़ में लाचारों का हक छिनने की इजाजत प्रशासन नहीं देगा।”

सुरक्षा के निर्देश

गौरतलब है कि पिता पहले भी बाहरी तत्वों को बुलाकर बेटे-बहु से मारपीट करवा चुके थे। इस पर डीएम ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिए कि दम्पति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और हर माह दो बार उनके निवास का निरीक्षण किया जाए, ताकि पारिवारिक शांति व्यवस्था बनी रहे।

नजीर बनेगा फैसला

जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट का यह निर्णय उन सभी मामलों में नजीर साबित होगा जहां भरण-पोषण अधिनियम का दुरुपयोग करके निर्दोष और असहाय लोगों को फंसाया जाता है। इससे न केवल कानून के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा, बल्कि पीड़ित परिवारों में न्याय के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा।

यह पूरा मामला एक उदाहरण है कि कैसे जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता और दृढ़ता दिखाते हुए असहाय परिवार को न्याय दिलाया।

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