देहरादून के पटेलनगर क्षेत्र में रविवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब एलपीजी गैस रिसाव के कारण एक घर में जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। सभी घायलों को एंबुलेंस की मदद से तत्काल दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही पटेलनगर कोतवाली पुलिस, फोरेंसिक विशेषज्ञ और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा और पूरे घटनास्थल की बारीकी से जांच की। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि घर के अंदर गैस सिलेंडर से धीरे-धीरे गैस रिसाव हो रहा था। सुबह लगभग 6:45 बजे बिजली के स्विच में लगी खुली तार में हल्की सी चिंगारी (स्पार्किंग) हुई, जिससे पूरे कमरे में फैली गैस ने आग पकड़ ली और तेज धमाका हो गया।
दीवार और दरवाजा भी हुए क्षतिग्रस्त
धमाका इतना जबरदस्त था कि कमरे की एक दीवार और दरवाजा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कमरे की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह बंद होने के कारण गैस कमरे में भर गई थी, जो हादसे का बड़ा कारण बनी।
घायलों की पहचान
इस दर्दनाक हादसे में झुलसे लोगों की पहचान विजय साहू पुत्र अशरफी लाल निवासी ग्राम असहीपुर, थाना व जिला बलरामपुर, उत्तर प्रदेश (वर्तमान निवासी टपरी, पटेलनगर, देहरादून), उनकी पत्नी सुनीता, और तीन बच्चे—अमर, सनी व अनामिका के रूप में हुई है। सभी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
फोरेंसिक व बम निरोधक दस्ते की जांच में पुष्टि
फोरेंसिक और बीडीएस (बम डिस्पोजल स्क्वॉड) टीम द्वारा की गई जांच में यह साफ हो गया कि धमाके का कारण एलपीजी गैस का रिसाव और स्पार्किंग थी। राहत की बात यह रही कि धमाके के बाद तुरंत स्थानीय लोगों और पुलिस की तत्परता से बड़ी जनहानि होने से बच गई।
इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दे दी है कि गैस सिलेंडरों और इलेक्ट्रिक वायरिंग की समय-समय पर जांच कितनी जरूरी है, खासकर बंद कमरों में गैस का रिसाव जानलेवा साबित हो सकता है।
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