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उत्तराखंड: अब बड़े स्तर पर कारोबार करेंगी सहकारी समितियां, खोलेंगी पेट्रोल पंप और होम स्टे

On: July 13, 2025 9:05 AM
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उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल प्रदेश में 671 बहुउद्देशीय सहकारी समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, और कई नई समितियों का गठन भी किया गया है। इन समितियों का प्रमुख उद्देश्य अपने सदस्यों की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। अब ये समितियां परंपरागत कार्यों से आगे बढ़कर व्यापक स्तर पर कारोबार करेंगी।

सिर्फ खाद-बीज नहीं, अब पेट्रोल पंप से लेकर होम स्टे तक

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

बहुउद्देशीय सहकारी समितियां अब खाद, बीज और यूरिया तक ही सीमित नहीं रहेंगी। इन्हें पेट्रोल और डीजल पंप, जन औषधि केंद्र, होम स्टे, सौर ऊर्जा संयंत्र, रसोई गैस वितरण, और कई अन्य सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल गई है। नोडल अधिकारी एमपी त्रिपाठी के अनुसार, समितियों को 27 नए कार्य करने की स्वीकृति दी गई है, जो उन्हें आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

समितियों को मिले नए कार्यक्षेत्र

अब बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य किया जा सकेगा:

रेशम उत्पादन, डेयरी एवं मधुमक्खी पालन

पैकेजिंग, ब्रांडिंग व विपणन

विद्यालय, महाविद्यालय व अस्पताल संचालन

एंबुलेंस सेवा व कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)

प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना

परिवहन सेवाएं एवं निजी गोदाम निर्माण/किराया

कृषि यंत्रों व खाद की बिक्री

कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम

बैंक मित्र व पानी मित्र की भूमिका

श्रमिक समूहों का गठन एवं बीमा एजेंसी के रूप में कार्य

इन गतिविधियों से समितियों को जहां राजस्व के नए स्रोत मिलेंगे, वहीं स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

हर गांव और हर क्षेत्र पंचायत में गठित होंगी समितियां

राज्य सरकार की योजना है कि मैदानी जिलों में हर गांव और पर्वतीय जिलों में हर क्षेत्र पंचायत में कम से कम एक बहुउद्देशीय सहकारी समिति बनाई जाए। इसकी शुरुआत हरिद्वार जिले से की गई है, जहां जुलाई माह में हर गांव में समितियों का गठन होगा। इसके बाद ऊधमसिंह नगर में यह प्रक्रिया लागू की जाएगी।

सहकारिता से गांव होंगे सशक्त

इन समितियों के माध्यम से किसानों, युवाओं और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर जरूरी सेवाएं प्राप्त होंगी। साथ ही सहकारी ढांचे को मजबूत कर आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल उत्तराखंड के समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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