हरिद्वार में आयोजित भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के किसान महाकुंभ चिंतन शिविर में देशभर से आए किसानों ने एक स्वर में कृषि क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों को लेकर अपनी चिंता जताई। शिविर के पहले दिन किसानों ने एमएसपी की कानूनी गारंटी, बिजली के निजीकरण, बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में किसानों से किए गए वादे पूरे नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार को किसानों के 11 बुनियादी सवालों का जवाब देना चाहिए। टिकैत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसान आंदोलन केवल दिल्ली की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह गाँव-गाँव तक पहुंचेगा।
शिविर में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में हो रही देरी, दूध उत्पादकों की समस्याएं, और भूमिहीन हो रहे किसानों की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। किसानों ने यह भी कहा कि औद्योगीकरण के नाम पर कृषि भूमि का अधिग्रहण गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, जिससे खेती-किसानी का भविष्य संकट में पड़ता जा रहा है।
किसानों की मांग है कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करे और किसानों की आय को सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाए। शिविर का उद्देश्य सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि एक मजबूत रणनीति बनाना है ताकि किसानों की आवाज़ नीतियों में तब्दील हो सके।
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